शाहिद कपूर ने फिल्म ‘रंगून’ के लिए इस चैम्पियन निशानेबाज से ली ट्रेनिंग

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‘कामिने’ और ‘हैदर’ यह दो फिल्में साथ करने के बाद अब तीसरी फिल्म ‘रंगून’ के लिए फिल्मकार विशाल भारद्वाज और अभिनेता शाहिद कपूर एक साथ आयें हैं।

विशाल भारद्वाज वह फिल्मकार हैं, जो हमेशा शाहिद से फिल्म में बेहतर परफॉर्मन्स निकाल पायें हैं। और फिर एक बार दर्शकों के सामने फिल्म ‘रंगून’ से शाहिद का एक अच्छा परफॉर्मन्स देखने मिलनेवाला हैं। शाहिद ने इस फिल्म में बेहतर परफॉर्मन्स देने के लिए कड़ी मेहनत की हैं।

इस पीरियड ड्रामा में शाहिद एक सैनिक के भूमिका में नजर आने वाले हैं। जिसके लिए उन्होंने चैम्पियन निशानेबाज रौनक पंडित से ट्रेनिंग ली हैं। रौनक पंडित ने 2006 के राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों के 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।

राइफल शूटिंग सिखाते वक्त रौनक पंडित ने शाहिद को गन कैसे पकड़ते हैं। शूटिंग के वक्त कैसे आसन में आपको खड़े रहना चाहियें, और अपने लक्ष्य पर किस तरह निशाना साधें, ऐसी कई सारी बातें सिखायीं।

इस बारे में जानकारी देते हुए रौनक पंडित कहतें हैं, “निशानेबाजी शायद शाहिद कपूर के खून में ही हैं। हमने उन्हें हमारे मलाड और वरली के सेंटर्स में निशानेबाजी की ट्रेनिंग दी। हमने करीबन एक सप्ताह तक उन्हें ट्रिगर का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया। ओलिम्पिक के लिए जो प्रशिक्षण दिया जाता हैं, वही प्रक्रिया का इस्तेमाल हमने यहाँ किया। हमने अलग अलग क्षमता और निशानेबाजी करतें वक्त लगनेवाली दुरियों का इस्तमाल कर टेनिंग दी। जिससे शाहिद को बेहतरीन ट्रेनिंग पाने में मदद मिली। फिल्म में कुछ लंबी दूरी के शॉट्स हैं। और हम चाहते थे, की वह उसमें अच्छी तरह मंझे हुए लगे। ट्रेनिंग के आखिरी दिन बंदूक और असली गोलियों के साथ हमने वरली के शूटिंग रेंज पर प्रैक्टिस की। “

Ronak Pandit
Ronak Pandit

चैम्पियन पदक विजेता रौनक पंडित, शाहिद कपूर को ट्रेनिंग देने के लिए काफी उत्साहित थे। क्योंकी शाहिद अपने किरदार के लिए तैयार होने में विश्वास रखते हैं। हाल ही में शाहिद ने अपने ‘उड़ता पंजाब’ में निभायें किरदार के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का क्रिटिक्स च्वाइस पुरस्कार जीता था।

शाहिद के अपने काम के प्रति रहें समर्पण को लेकर पंडित कहतें हैं, “शाहिद कपूर एक प्रतिभाशाली अभिनेता है। और ट्रेनिंग के वक्त दूसरे ही दिन वह काफी सरल व्यक्ति लगें। मुझे लगा नही था, की वह इतने तेजी से निशानेबाजी की सारी चालें सीख पायेंगें। उनका अच्छा फिटनेस इस मामले में काफी मददगार साबित हुआ। किसी कॉलेज के दोस्त की तरह ही वह काफी विनम्र और मिलनसार हैं। वक्त की पाबंदी का वह खयाल रखतें हैं। और उनके साथ काम करना एक अच्छा अनुभव रहा हैं।“


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Mayapuri

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