शहनाज का मोदी को खुला पत्र

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‘आज जो मैं लिख रही हूं हो सकता है कि मेरे माता-पिता को पढ़ने में दु:ख हो, इस पर मुझे शर्म करने की जरूरत नहीं बल्कि उनको शर्म करना चाहिए जो रेप जैसी संघीन घटनाओं में भागीदार होते हैं। जब मैं 13 साल की थी तब मुझे एक ऐसी ही घटना का शिकार होना पड़ा।

सड़क पर एक आदमी के हाथों न चाहते हुए मैं शारीरिक अंगों के छेड़छाड़ का शिकार बनी। मुझे आज भी याद है कि उस दिन मैंने क्या पहना था। मैं आज उस ड्रेस से इतना नफरत करती हूं जैसे वह सब ड्रेस की ही गलती से हुआ हो।

मैंने इस संबंध में अपने माता-पिता से बातें करने की कोशिश भी कि, मेरी मां ने तो मेरी बात को समझा पर मेरे चाचू और पापा ने कहा कि मैं कल्पना कर रही हूं। उन्होंने शायद ऐसा इसलिए कहा हो क्योंकि वे उस परिस्थति से पार पाने में सक्षम नहीं थे। पर क्या आप करेंगे मेरी मदद?

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जब मैं 15 साल की थी सेंट जेवियर कॉलेज जाना मैंने बस और ट्रेन से शुरू किया। इस दौरान कई बार मुझे शारीरिक अंगों के छेड़छाड़ का शिकार बनना पड़ा और ऐसे मैं बड़ी हुई। यह सिर्फ मेरी कहानी नहीं है बल्कि हर उस भारतीय महिला की कहानी है जिनके पास लक्जरी कार व ड्राइवर नहीं है।

टीन एजर होते हुए मैं सोचा करती थी, बल्कि कभी-कभी आज भी सोचती हूं अगर मेरे पास गन मशीन होती तो मैं हर एक उस आदमी को भून के रख देती जिसने मेरे शारीरिक अंगों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की हो। क्या आप नहीं सोचते कि बच्चे के लिए ऐसा सोचना कितना खतरनाक साबित हो सकता है?

मुझे मॉडल के रूप में पहला असाइनमेंट एफवाईजीसी में मिला जहां मुझे स्कूल की तरफ से स्क्रीन टेस्ट के लिए जाना था। जैसा कि स्क्रीन टेस्ट मॉडल के लिए था तो अच्छे कपड़ों में तो जाना था ही। मुझे आज भी वह समय याद है जब मैं रेड कलर के सूट और काली रंग की स्कर्ट में ऑडीशन के लिए गई थी।

वहां जो वाकया हुआ उससे दुखी होकर मैंने उस ड्रेस को हाथ तक नहीं लगाया। धीरे-धीरे समय के साथ मैंने खुद को बदला और अपने आपको माहौल के मुताबिक ढालना सीख लिया। इसके चलते मैं हमेशा अपने बैग को अपने सामने रखती और इस दौरान मेरी मुट्ठी हमेशा बंद रहती थी। मैं हर 20 सेकंड में देखती कि कहीं कोई मेरे पीछे खड़ा होकर हरकत तो नहीं कर रहा। इसी के चलते मैंने कई लोगों को थप्पड़ भी रसीद किए और कभी मुझे भी थप्पड़ खाने पड़े।

कभी-कभी मुझे पब्लिक ने बचाया पर हमेशा ऐसा नहीं हुआ। मेरी मां ने उन लोगों से न लड़ने के लिए मुझे बहुत समझाया जो मुझे छूते थे क्योंकि उन्हें डर था कहीं कोई मुझ पर तेजाब न डाल दें या मुझे बुरी तरह घायल न कर दें। वे आज भी डरती हैं और उन्होंने मुझे कल की मीटिंग के लिए उबेर टैक्सी में बैठने के लिए सख्त रूप से मना किया।

जब मेरी बहन ने सोफिया कॉलेज में एडमिशन लिया, हम सभी बड़े खुश थे। जब वह पहले दिन बस से कॉलेज गई और वापस आई तो वह बहुत डरी हुई थी रो रही थी। एक आदमी ने चलती बस में उसकी टी-शर्ट में हाथ डाल दिया। इसे देख मेरी बहन ठिठक गई और कुछ न कर सकी। वह भी एक बच्ची है। और तो और इस सबका मतलब भी नहीं समझती। यह जानकर मुझे बहुत गुस्सा आया। मेरी बहन दुनिया को यह बताने के लिए मुझे माफ करना, मेरे से बात करना मत बंद कर देना। इस पर हमें शर्म करने की जरूरत नहीं बल्कि उनको शर्म करना चाहिए जो रेप जैसी जघन्य घटनाओं में भागीदार होते हैं।

ऐसा ही एक और जघन्य घटना से मेरी दोस्त को भी गुजरना पड़ा। मेरी दोस्त रात 11:15 पर बीमार होने के चलते लेडीज कंपार्टमेंट में सफर करते हुए अपने घर लौट रही थी। उस समय फर्स्ट क्लास में कोई व्यक्ति नहीं था। इसी बात का फायदा उठाते हुए एक युवक ने उसका रेप किया और उसकी हेयर टाई से अपने आपको पोंछने के बाद वह वहां से नदारद हो गया।

इसके लहुलुहान होकर वह जैसे-तैसे घर पहुंची। वह तब मात्र 16 साल की थी उसने सोचा कि इसको बताने से उसकी बदनामी होगी इसलिए यह बात किसी को नहीं बताई। इस पर उसको शर्म करने की जरूरत नहीं बल्कि उनको शर्म करना चाहिए जो रेप जैसी जघन्य घटनाओं में भागीदार होते हैं।’


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Mayapuri

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