‘‘फिल्म ‘बायपास रोड’ में मेरा सेंट्रल कैरेक्टर है..’’- शमा सिकंदर

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‘‘फिल्म ‘बायपास रोड’ में मेरा सेंट्रल कैरेक्टर है..’’- शमा सिकंदर

मशहूर टीवी व फिल्म कलाकार शमा सिकंदर 21 वर्ष के अपने करियर में हर माध्यम पर काम कर चुकी हैं। उन्होंने करियर व जिंदगी के बीच सामंजस्य बैठाना सीख लिया है। एक समय वह भी था, जब वह निराश होकर डिप्रेशन में चली गयी थीं। पर अब वह पूरे जोश के साथ काम कर रही हैं। बतौर निर्माता लघु फिल्में व वेब सीरीज भी बना रही हैं। इन दिनों वह नमन नितिन मुकेश निर्देशित फिल्म ‘‘बायपास रोड’’ को लेकर चर्चा में हैं।

आप कलाकार,निर्माता और एंटरप्रेन्योर भी हैं। खुद कहां कितना व्यस्त रहती हैं?

-मुझे लगता है कि एक इंसान में बहुत सारी खूबियां होती हैं। हर इंसान एक साथ कई काम सफलतापूर्वक कर सकता है, बशर्ते उस इंसान को इस बात का अहसास हो। अगर आपको पता है कि आप कर सकते हैं, तो आपको जरूर करना चाहिए.एक जिंदगी है, जितना कर सकते हैं, उतना कीजिए। मुझे नहीं लगता कि कहीं कोई सीमा है। यदि कोई कहता है कि आपको यह काम नहीं करना चाहिए, तो वह पूरी तरह से गलत है। कम से कम मैं तो इसे पूर्णरूपेण गलत मानती हूं। मुझे लगता है कि मैं बहुत सारी चीजें अच्छे से कर सकती हूं, इसलिए कर रही हूं। मेरे प्रोडक्शन हाउस में काफी अच्छा काम हो रहा है। मेरी अभिनय यात्रा भी अच्छी चल रही है।

लेकिन आप खुद को इतने कामों में किस तरह से विभाजित करती हैं?

-विभाजन की बात मेरी समझ से परे है। जिस वक्त मैं जो काम कर रही होती हूं,उस वक्त मेरा सारा ध्यान सिर्फ उसी पर रहता है। मैं हर इंसान को सलाह देती हूं कि जिस वक्त आप जो काम करते हैं, उस पर आपका पूरा ध्यान रहना चाहिए। आधे मन से कोई काम नहीं करना चाहिए। उसी पर पूरा फोकस दें,ताकि वह काम बेहतर ढंग से संपन्न हो सके और उसके अच्छे परिणाम मिले। अगर मैं निर्माता की हैसियत से प्रोडक्शन करती हूं, तो उस वक्त सिर्फ प्रोडक्शन करती हूं। अगर मैं कलाकार की हैसियत से अभिनय कर रही हूं, तो मेरा पूरा ध्यान अपने अभिनय और किरदार पर रहता है। कलाकार के तौर पर अपने काम को अंजाम देने के बाद मैं वहां से हट जाती हूं। जिस दिन मुझे शूटिंग करनी होती है,उस दिन मैं सिर्फ कलाकार रहती हूं। उस दिन निर्माण/प्रोडक्शन का सारा काम मेरी टीम देखती है। उस दिन मैं सिर्फ अपने किरदार के साथ न्याय करने पर ही ध्यान देती हूं।

आपने 1998 में अभिनय करियर की शुरूआत की थी.अपने 21 वर्ष के अभिनय कैरियर को किस रूप में देखती हैं?

-मैंने इस क्षेत्र के उतार-चढ़ाव को अच्छी तरह से देखा व महसूस किया है। मेरे कैरियर में कुछ ज्यादा ही उतार-चढ़ाव रहे और इसका असर मेरी निजी जिंदगी पर भी पड़ा। एक इंसान के तौर पर मैं बहुत प्रभावित हुई। एक कलाकार के तौर पर भी बहुत प्रभावित हुई। मगर मैं हर काम पूरे मन से करती हूं। ऐसे में यदि मेरे कैरियर में उतार आया, तो उसे भी स्वीकार करती हूं। मैं दिल से रोई भी हूं। पर जब मेरे कैरियर में चढ़ाव/कुछ अच्छा हुआ, तो उतना ही दिल लगाकर हंसी भी। फिलहाल मैं फिल्म ‘‘बायपास रोड’’ को लेकर उत्साहित हूं।

फिल्म‘‘बायपास रोड’’क्या है?

-यह एक थ्रिलर फिल्म है। मैं इस फिल्म की मिस्ट्री हूं। इस फिल्म की सारी मिस्ट्री मुझसे जुड़ी है। इस तरह आप मान सकते हैं कि मैंने इसमें सेंट्रल लीड कैरेक्टर निभाया है। इसका कथानक जबरदस्त है। अब तक इस तरह की फिल्म बनी ही नहीं है।

अपने करेक्टर को लेकर क्या कहेंगी?

-मैने सुपर मॉडल सारा ब्राउंजा का किरदार निभाया है। यह इतनी खूबसूरत है कि हर कोई उस पर फिदा हो जाता है। पूरी कहानी सारा ब्राउंजा के इर्द गिर्द ही घूमती है। ट्रेलर में नजर आता है कि सारा ब्राउंजा की मौत हो गयी है। मगर सवाल है कि क्या उसकी मौत हुई या नहीं.. और यदि हुई तो सारा को किसने मारा?

शमा सिकंदर

फिल्म के निर्देशक नमन नितिन मुकेश की यह पहली फिल्म है.आपके अनुभव क्या रहे?

-निर्देशक नया या पुराना होने से फर्क नहीं पड़ता। जरुरी यह है कि वह अपने काम को, अपने क्राफ्ट को कितना समझता है। इस मामले में नमन काफी समझदार हैं। वह फिल्म माध्यम की शिक्षा लेकर इस क्षेत्र में आए हैं। उन्हें फिल्मी माहौल विरासत में मिला है। फिल्म की पटकथा नील नितिन मुकेश ने लिखी है। जब नमन ने मुझे पटकथा सुनायी, तभी मेरी समझ में आ गया था कि वह फिल्म को अपने अंदर कितना बसा चुके है। सेट पर हमने उनके साथ काम करते हुए काफी इंज्वॉय किया।

‘‘बालवीर’’के बाद आपने टीवी को एकदम से अलविदा कह़ दिया?

-‘बालवीर’ से पहले भी मैंने टेलीविजन बहुत कम ही किया है। आप स्वयं दूसरे कलाकारों से इसकी तुलना करके देख लीजिए। मैंने टीवी में वही चुनिंदा काम किया है, जिसे करने में मुझे मजा आया। जहां लोग अच्छे थे। जिस सीरियल में एनर्जी अच्छी थी। जिनकी एनर्जी के साथ मिलकर मेरी एनर्जी कुछ बेहतर काम कर सकती थी, उसे ही मैंने चुना। इसीलिए मैंने बहुत ही गिना चुना काम किया है।  ‘बालवीर’ के बाद टीवी पर मन नहीं लगा। क्योंकि कुछ रोचक काम ही नहीं आ रहा था, ऐसा काम जो मुझे व मेरे कैलीबर के साथ इंसाफ करे.या जिसे करते हुए मैं इंज्वॉय करुं। जब वेब सीरीज शुरू हुई, तो मुझे एकदम नई ताजी हवा का अहसास हुआ। मुझे लगा कि वेब सीरीज में हम एक कलाकार के तौर पर कुछ अच्छा कर सकते हैं, तो मैंने कई वेब सीरीज की। सच कहूं तो अब अच्छी अभिनेत्रियों का जमाना है। अब अच्छा परफॉर्म करने वालों का जमाना है। मुझे लगता है कि आज मेरा जमाना है।

शमा सिकंदर

आपके प्रोडक्शन में कुछ नया हो रहा है?

-हम ‘अब दिल की सुनो’ के भाग दो पर काम कर रहे हैं। थोड़ा वक्त लग रहा है, क्योंकि कहानियां बहुत ही संगीन और सादी हैं। सादी चीजों को बाहर लाने में वक्त लगता है। आपने मेरे प्रोडक्शन की फिल्में देखी होंगी। छोटी छोटी फिल्में है। छोटी फिल्म के माध्यम से बड़ी बात कह जाना आसान नहीं होता। हमने योजना बनायी थी कि हमें अपने प्रोडक्शन हाउस में कोई बड़ी एक्शन फिल्म नहीं बनानी है। बल्कि छोटा सा काम करते हुए लोगों के दिलों तक पहुंचना है। कुछ वेब सीरीज पर काम कर रहे हैं। जब कुछ तय हो जाएगा, तो हम आपको बताएंगे।

इसके अलावा क्या कर रही हैं?

-एक हिंदी फीचर फिल्म के अलावा दक्षिण भारत की फिल्म कर रही हूं. कुछ वेब सीरीज हैं, जिन पर अभी बात करना संभव नहीं। आप भी जानते है कि इन दिनो मार्केटिंग का खेल ऐसा हो गया है कि फिल्म के रिलीज का समय नजदीक आने से पहले कुछ भी बोलना मना होता है।

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