‘‘मेरे मम्मी व पापा ने मुझे पूरी छूट दे रखी थी ’’ -अक्षरा हासन

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फिल्म  ‘‘शमिताभ’’ से अमिताभ बच्चन और धनुष के साथ अभिनय कैरियर की शुरूआत करने वाली अक्षरा हासन का नाम अनजाना नहीं है. अब तक उनकी पहचान दक्षिण के मशहूर अभिनेता व फिल्म निर्माता कमल हासन व बालीवुड की चर्चित अदाकारा रही सारिका की छोटी बेटी तथा अभिनेत्री व गायक श्रुति हासन की छोटी बहन के रूप में ही होती रही है. मगर अब उनकी पहचान अभिनेत्री के रूप में बनती जा रही है.

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आप भी शुरू से अपनी मम्मी पापा व दीदी की तरह अभिनेत्री बनना चाहती थी?
-जी नहीं! मैं तो पहले फुटबाल खिलाड़ी बनना चाहती थी. मैं स्कूल में जब फुटबाल खेल की कैप्टन बनी, तो बहुत खुशी हुई थी. उसके बाद मुझे डांसर बनने का भूत सवार हुआ. फिर मैं सहायक निर्देशक बनी और अचानक अभिनेत्री बन गयी.

पर सहायक निर्देशक..?
-मैं शुरू ही मस्ती खोर रही हूं. पढ़ाई में तेज नहीं थी. मैं तो खेलकूद में ही ज्यादा ध्यान देती थी. ग्यारहवीं के बाद मैं पढ़ाई छोड़कर डॉस करने लगी. एक दिन मेरी एक सहेली ने अपने एक नाटक में डांस करने के लिए बुलाया. दो दिन बाद उसने मेरे सामने उसी नाटक में एक सीन करने के लिए कहा. जिसे करते हुए मुझे लगा कि अभिनय करने में भी इज्वॉमेट है. फिर भी मैने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने की बजाय सहायक निर्देशक के रूप में काम करना शुरू किया. मैंने राहुल ढोलकिया की फिल्म ‘सोसायटी’ में उनके साथ बतौर सहायक निर्देशक काम किया.

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तो नाटक में लोगो ने आपके अभिनय को पसंद किया था,या..?
-दुर्भाग्य की बात यह रही कि उस नाटक का मंचन ही नहीं हो पाया. मगर उसी नाटक की वजह से मैंने अपने अंदर की अभिनय प्रतिभा को खोजा.
फिल्म ‘‘शमिताभ’’कैसे मिली?
-मैं एक फिल्म का पोस्ट प्रोडक्षन खत्म होने के बाद नीचे खड़ी थी.वहीं पर आर बालकी ने मुझे देखा और उन्होने मुझसे कहा कि वह बात करना चाहते हैं.फिर उन्होने मुझे ‘षमिताभ’की कहानी सुनायी.मुझे कहानी अच्छी लगी और बात आगे बढ़ गयी.

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‘शमिताभ’ के लिए आपने बाल भी कटवाए?
-इस फिल्म में मेरा जो किरदार है,उसके लिए छोटे बाल चाहिए थे.जब ‘षमिताभ’ मुझे ेमिली,उस वक्त मेरे बाल कमर तक लंबे थे.पर आर.बालकी सर ने जब बाल काटने के लिए कहा तो मैने बिना देर किए,अपने बालांे पर कैंची चलायी.मैं‘षमिताभ’की स्क्रिप्ट सुनने के बाद इतना उत्साहित थी कि किसी भी वजह से मैं इस फिल्म को खोना नहीं चाहती थी.
फिल्म ‘‘शमिताभ’’ क्या है?
-‘शमिताभ’में अलग दम है.यह फिल्म उनकी पिछली दोनों फिल्मों से अलग है. जब आप फिल्म देखेंगें,तो आपकी समझ में आएगा.

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किरदार क्या है?
-मैं बता नहीं सकती. पर फिल्म में मेरा सरनेम पांडे है.
अमिताभ बच्चन का मानना है कि फिल्म में आपका किरदार कैटलिस्ट है?
-जी! उन्होंने सही कहा. उन्होंने एकदम सही बता दिया.अब मैं क्या कह सकती हॅू? फिल्म में पाण्डेय एक छोटी बच्ची है. वह दोे कलाकारों के ‘ईगो’ के बीच आकर उन्हे एक साथ लाती है.

अमिताभ बच्चन, धनुष और आर बालकी के साथ काम करना?
-मेरे लिए बहुत बड़ी चुनौती थी.अंदर से डरी हुई थी कि मुझसे कहीं कोई गलती न होने पाए.मगर सेट पर मुझे इन सभी का भरपूर सहयोग मिला.

आपके परिवार में सभी इसी क्षेत्र में हैं, तो उनकी तरफ से कोई दबाव था?
-बिलकुल नही. मेरे पापा और मम्मी ने मुझे पूरी छूट दे रखी थी कि मैं अपने मनपसंद माहोल में करियर बना सकती हॅू.

कहा जाता है कि स्टार सन या स्टार डॉटर को बालीवुड में काम करने के अवसर आसानी से मिलते हैं?
-मैं दूसरों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती.पर मेरे परिवार ने मुझे हमेशा जमीन से जुड़े रहने दिया. आज मैंने जो कुछ पाया है, वह सब मेरी अपनी मेहनत का नतीजा है. मेरे लिए किसी ने कोई सिफारिष नहीं की. मैंने अपनी मेहनत व प्रतिभा के बल पर ही सब कुछ पाया है.माना  कि किसी स्टार का सरनेम होने पर पहली फिल्म आसानी से मिल जाए,पर अंततः अपनी काबीलियत के बल पर ही टिका जा सकता है.मेरी राय में हर इंसान को अपनी कमजोरी,अपने सकारात्मक पक्ष आदि को समझकर अपने प्रयासों से आगे बढ़ना चाहिए.

आपको अपने मम्मी पापा की कौन सी फिल्में पसंद है?
-मुझे मम्मी की ‘परजानिया’ व ‘भेजा फ्राय’ तथा पापा की ‘चाची 420’, ‘नायकन’ और ‘पुष्पक’ जैसी फिल्में पसंद हैं.


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Mayapuri

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