एक सुलझा हुआ कलाकार शशि कपूर

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shashi

 

 

मायापुरी अंक 2.1974

शशि कपूर से मेरी सबसे पहली मुलाकात दिल्ली के प्रेस क्लब में हुई थी लगभग चार वर्ष पहले, जबकि उसके सम्मान में एक पार्टी का आयोजन किया था। शशि अतिथि था मगर मैंने देखा कि वहां उपस्थित पत्रकारों के लिए वह स्वयं किचन से गर्म-गर्म पकौड़े तलवा कर ला रहा था। वहां के एक दो बैरों के साथ वह इस बेतकुल्लफी से घूल-मिल गया था कि शशि का अस्तित्व ही खोज पाना असम्भव था।

इसके बाद तो एक बार नही अनेकों बार शशि कपूर से मिलने का अवसर मिला, मगर हर बार वह पहले से अधिक उन्मुक्त, बेपरवाह और प्यारा व्यक्तित्व लगा। उनकी फिल्में जब एक के बाद एक बॉक्स ऑफिस पर असफलता प्राप्त कर रही थी तब भी वही शशि थे और आज जबकि शशि कपूर की मांग फिर से बढ़ने लगी है तब भी वह एकदम वही है अपने आपसे बेपरवाह, मिलनसार और साहसिक व्यक्तित्व।

अगर कोई और कलाकार होता तो असफलाताओं से घबरा कर अब तक कभी का किनारा कर गया होता मगर शशि कपूर ने हमेशा ही संघर्षों से जूझते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त की है। गुटबन्दी की इस दुनिया में शशि ही ऐसा कलाकार है जिनका कोई विरोधी नही है। बड़े स्टारों की तरह उनमें घमंड नाम मात्र को भी नही है और वह अपनी फिल्मों के निर्माताओं को भरपूर सहयोग देते है।

शशि कपूर वास्तविक अर्थो में कलाकार है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि सहनायकों के रोल भी स्वीकार कर लेते है। बस कोई पात्र उसे अच्छा लगना चाहिए, फिर तो वह इस पर्दे पर साकार करने में कोई कसर नही छोड़ेगा।

उनके अभिनय की शुरुआत राजकपूर की फिल्म ‘आग से हुई। ‘आवारा’ में भी एक छोटी सी भूमिका का निर्वाह किया परन्तु नायक के रूप में शशि कपूर को सबसे पहले स्वर्गीय विमल राय ने अपनी फिल्म ‘प्रेमपत्र’ में प्रस्तुत किया। ‘प्रेमपत्र’ में नायिका का अभिनय साधना ने किया था। शशि के नाम की धूम ‘जब जब फूल खिले’ हुई। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने अपूर्व सफलता प्राप्त की। श्रीधर की कॉमेडी फिल्म ‘प्यार किये जा’ ने भी शशि कपूर की मार्केट को काफी बढ़ावा दिया। मगर यह फिल्मी माहौल किसी का सगा नही होता। कुछ फ्लॉप फिल्मों ने शशि को विचलित कर दिय मगर आज फिर वही पहले वाला शशि जीवन के उतार-चढ़ावों से एकदम ‘अनाड़ी’ बना हुआ सफलताओं का वरण कर रहा है।

दिन भर की जी तोड़ मेहनत के बाद भी वो अध्ययन का समय निकाल लेते है। उनका कृतियों फिल्म तकनीक से सम्बन्धित सैकड़ो पुस्तकें उसके पास है जिन्हें आज भी वह एक विधार्थी की हैसियत से मन लगा कर पढ़ते है। उनकी पत्नी जैनीफर उन्हें हर काम सहयोग देती है, उनकी लापरवाही और बिखराव को समेटती हुई वह उसके लिए हर समय प्यार का सागर उंडेलती रहती है। अपने पारिवारिक जीवन से शशि कपूर भी बेहद सतुंष्ट है। सप्ताह का हर रविवार उनका अपना दिन होता है ‘होली डे के मूड और इस दिन वह कोई काम नही करते।

शशि कहना है ‘किसी फिल्म की सफलत-असफलता में पूरी टीम का योगदान होता है किसी एक व्यक्ति का। हमारे यहां की यह विचारधारा कि कोई फिल्म सिर्फ हीरो या हीरोइन के कारण फ्लॉप होती है एकदम गलत है। शशि की इस बात में क्योंकि फिल्म निर्माण के लिए हर छोटे छोटे व्यक्ति उतना ही उत्तरदायी है जितना हीरो या हीरोइन।

शशि की आने वाली फिल्में है ‘अनाड़ी’ मार उठे संसार’ ‘चोरी मेरा काम’ ‘कोई जीता कोई हारा’ तथा ‘रोटी’ आदि।

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Mayapuri