शत्रुघ्न सिन्हा

1 min


शत्रुघ्न सिन्हा और उनकी कुछ खास राज़

शत्रुघ्न सिन्हा का जन्म 9 दिसंबर, 1945 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ वो एक प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता और एक सफल राजनीतिज्ञ दोनों हैं। शत्रुघ्न सिन्हा  को याद करते ही उनके गाल का निशान दिखाई देता है जीके बारे में कई कहानिया मशहूर है लेकिन असली कहानी ये है की हिंदी फ़िल्मों के जाने माने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को लोग बिहारी बाबू के नाम से जानते हैं।बात उन दिनों की है जब शत्रुघ्न सिन्हा की उम्र दस बारह साल रही होगी। उन्हीं दिनों में से कोई एक दिन अमेरिका में रहने वाले उनके मामा उनके घर पटना आए हुए थे। उस शाम उनके मामा को वापस अमेरिका जाना था, और अपने शत्रु जी को अचानक सूझी कि दाढ़ी कैसे बनाई जाती है, इसे देखा जाए। उनके हाथ एकदम शार्प ब्लेड वाला रेजर लग गया था, और उन्होंने बाकायदा गाल पर साबुन लगा कर पहले अपनी बहन की दाढ़ी बनाने का खेल खेला, फिर अपनी। अपनी दाढ़ी बनाते हुए उनके हाथ होठ के पास फंसे और ब्लेड ने ये निशान उनके गाल पर हमेशा के लिए छोड़ दिया जो उनकी पहचान बन गया । आइये उनके बारे मे ऐसी ही कुछ और बातें जानते हैं :-

शत्रुघ्न सिन्हा को कटे होंठ के कारण किस्मत साथ नहीं दे रही थी। ऐसे में वे प्लास्टिक सर्जरी कराने की सोचने लगे। तभी देवानंद ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया था।

शत्रुघ्न सिन्हा पटना साइंस कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद पुणे के ‘फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (FTII) से पढ़े जिसके लिए उनके पिता की जगह उनके बड़े भाई ने उन्हें सपोर्ट किया और साईन किये जिसके कारण एफटीआईआई में आज भी शत्रुघ्न के नाम पर डिप्लोमा कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप दी जाती है

शत्रुघ्न सिन्हा बॉलीवुड के ऐसे पहले अभिनेता हैं, जिन्होंने फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में भी एक सफल पारी खेली व बॉलीवुड से निकलने वाले पहले नेता हैं जो अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री बनाये गये। वे बिहार के पटना साहिब से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं। हाल ही में बिहार चुनाव को लेकर बीजेपी ने उन्हें अपने स्टार कैम्पेनर लिस्ट में शामिल भी किया है।

शत्रुघ्न सिन्हा को मिला कर ये चार बड़े भाई जिनका नाम राम लखन भारत और शत्रुघ्न सिन्हा  हैं और उनमे से बड़े भाइयों में राम अभी अमेरिका में हैं और पेशे से साइंटिस्ट हैं। लखन इंजीनियर हैं और मुंबई में हैं। तीसरे भरत पेशे से डॉक्टर हैं औैर लंदन में रहते हैं।

अभिनेत्री मुमताज की सिफारिश से उन्हें चंदर वोहरा की फिल्म ‘खिलौना’ (1970) मिली।

शत्रुघ्न सिन्हा को उनके मुँह से निकलने वाले शब्दों के कारण जो बंदूक की गोली के समान होते थे, उन्हें ‘शॉटगन’ का टाइटल भी दे दिया गया।

अस्सी का दशक शत्रुघ्न के करियर का गोल्डन दशक कहा जा सकता है।क्योकि इस दशक मे उनकी कई सुपरहिट फिल्मे जैसे क्रांति (1981-मनोज कुमार), वक्त की दीवार (1981-रवि टंडन), नरम-गरम (1981-ऋषिकेश मुखर्जी), कयामत (1983-राज सिप्पी), चोर पुलिस (1983-अमजद खान)माटी माँगे खून (1984-राज खोसला) और खुदगर्ज (1987- राकेश रोशन) आदि आई

सुभाष घई निर्देशित फिल्म कालीचरण (1976) में वे शत्रु दोहरी भूमिका में दिखाई दिए। एक ईमानदार पुलिस इंसपेक्टर के साथ एक खूंखार कैदी के रोल को उन्होंने बखूबी निभाया व ‘कालीचरण’ रिलीज होने के बाद 24 घंटे में शत्रुघ्न ने यूनिट मेंबर्स को अपनी एक महीने की सैलरी को बोनस के रूप में देने का ऐलान कर दिया था।

कलिचरण फिल्म के बाद वे मंजे हुए खिलाडी हो गए और उन्होंने अन्य एक्ट्रेस पर हावी होना शुरू कर दिया उदाहरण के लिए फिल्म दोस्त (1974) इस फिल्म में शत्रुघ्न ने चलते पुर्जे पॉकेटमार का रोल किया था, जबकि धर्मेन्द्र उसका एक आदर्शवादी दोस्त था। गरम धरम को शत्रु ने जमकर टक्कर दी और गौतम गोविंदा (1979) में वे शशि कपूर पर भारी साबित हुए।यहाँ तक की महानायक अमिताभ बच्चन भी कई फिल्मे करने के बाद ये महसूस किया कि शॉटगन का दबाव उन पर बढ़ता जा रहा है तो उन्होंने शत्रुघ्न के साथ फिल्मों में आगे काम करने से अपने निर्माताओं को मना कर दिया।

रीना रॉय से असफल प्रेम के बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने पूर्व मिस यंग इंडिया ‘पूनम सिन्हा’ के साथ शादी रचाई व इसके लिए शत्रुघ्न ने पूनम को चलती हुई ट्रेन में फिल्म ‘पाकीजा’ के डायलॉग ‘अपने पांव जमीन पर मत रखिएगा…’ को कागज पर लिखकर प्रोपोज किया था।

शत्रुघ्न सिन्हा को मध्यप्रदेश सरकार ने किशोर कुमार अलंकरण से सम्मानित भी किया है।

SHARE

Mayapuri