शत्रुघ्न सिन्हा ‘मायापुरी के प्रशंसक और मित्र’

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मायापुरी अंक 53,1975
अरे आप, मैं कब से आपको तलाश कर रहा था। शत्रुघ्न सिन्हा ने फेमस स्टूडियो में हमें देखते ही कहा।
खैरियत! कोई फिर गड़बड़ हो गई क्या है? हमने पूछा। नहीं जनाब, मैं आपको ‘मायापुरी’ को अति सुंदर और साफ सुथरी पत्रिका के रूप में प्रकाशित करने की बधाई देना चाहता था। शत्रुघ्न सिन्हा ने गर्मजोशी से हाथ मिलाते हुए बधाई दी।
ओह! शुक्रिया, हम तो समझे शायद फिर आपको कुछ बुरा लग गया हमने व्यंग्य वाक्यों को याद करके कहा।
आपको मालूम है मैं ‘मायापुरी’ में सबसे पहले ‘शरारते’ बोलते चित्र और सैट पर पढ़ता हूं। बड़ा मजा आता है।
शत्रुघ्न सिन्हा ने बताया।
और हम सोच रहे थे कि कहीं आपको अंक न. 48 सैट पर निर्माता गुल्लू सिप्पी के साथ का व्यंग्य कैप्सन बुरा तो नहीं लग गया। हमने आपके गुल्लू के बीच सवांद रखा था यदि आप को बदलना हो तो आप बदल सकते हैं। अभी कुछ नहीं बिगड़ा। हमने कहा।
मैं तो इस प्रकार का ‘सैंन्स ऑफ ह्युमर’ पसंद करता हूं I love Maya Puri give my regards to mr. Bajaj इतना कहते हुए शत्रुघ्न सिन्हा दुश्मनी के सैट पर चले गए।


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Mayapuri

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