INTERVIEW: ‘‘मैंने स्क्रीन पर कभी ‘किस नही किया, हाँ थोड़ा बहुत क्लीवेज दिखाया होगा’’ – शिल्पा शिरोडकर

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लिपिका वर्मा

शिल्पा शिरोडकर ने अपनी दूसरी पारी भले ही रिकू की फिल्म ‘गन्स ऑफ  बनारस’ से शुरुआत की  हो, अभी उस फिल्म को रिलीज  होने में कुछ समय लग  रहा है, तो शिल्पा एक  के बाद एक टेलीविजन शोज में नजर आ रही है। शिल्पा टेलीविजन शो ‘सावित्री  देवी कॉलेज और हॉस्पिटल’ में नजर आ रही हैं। शिल्पा अपने जमाने की बोल्ड और ब्यूटीफुल हीरोइन मानी जाती रही है।  शिल्पा का पहला फिल्मी सफर एवं सैकन्ड इनिंग को लेकर हमने ढेर सारी बातचीत की

पेश है शिल्पा के साथ लिपिका वर्मा की बातचीत के कुछ अंश –

आप अपने जमाने की काफी बोल्ड हीरोइन रही है क्या कहना चाहेंगी ?

मुझे नहीं लगता कि-मैंने कोई भी बोल्ड अवतार निभाया  हो ? मैंने स्क्रीन पर कभी  ‘किस (चुंबन) भी नहीं किया  है। हाँ थोड़ा बहुत क्लीवेज दिखाया होगा। .. तो सिल्वर स्क्रीन के लिए उतना तो जायज है, आज का दौर हमारे दौर से कुछ अधिक अच्छा हो गया है। सामाजिक चीज को स्क्रीन पर दर्शाने के लिए सच्चाई से पेश करना भी तो जरुरी है। टेक्निकली भी हमारा सिनेमा फिर चाहे वो बड़े परदे पर हो या छोटे पर आजकल सच्चाई से दृश्य को पेश करना अनिवार्य है।

आपका किरदार एक बदला लेने वाली महिला का है क्या इस शो में भी?

हंस कर बोली, जी नहीं मैं किसी से बदला नहीं ले रही हूँ। जिसकी मैं रियल मदर हूँ। ठीक वैसे ही मैं इस शो में भी बहुत ही स्वीट माँ का किरदार  निभा रही हूँ। उम्र के इस पड़ाव  पर टी वी पर काम कर रही हूँ बहुत एन्जॉय भी कर रही हूँ। मुझे फिर छोटे पर्दे पर काम करने का मौका मिले या फिर बड़े परदे पर  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मुझे कैमरे के सामने काम करना बहुत पसंद है।

टेलीविजन एवं फिल्मी पर्दे पर अब काम करना कैसा लगता है ?

 टेलीविजन अमूमन महिला प्रधान मुझे पिक करता है। इस शो को करते भी  है। एक महिला किस प्रकार से अपने बच्चों के भूत के बारे में भी चिंतित रहती है और क्या कुछ करती है ताकि उनका आगे का जीवन भी सुखमय रहे। सावित्री-….शो में मुझे एक बहुत ही शुष्क यह नारी का किरदार निभाने को मिला है अतः बहुत प्रसन्न  हूँ।

आपके पसंदीदा सीओ एक्टर गोविंदा के साथ पहली पारी में काम करने का अनुभव कैसा रहा ?

मेरी पहली बड़ी फिल्म ‘हम’ गोविंदा के साथ ही थी। फिल्म कृष्ण कन्हैया के बाद यह फिल्म शूट करनी थी मुझे. आज भी याद है मुझे डांस की रिहर्सल्स करते हुए भले ही मेरे  घुटने छिल गए हो लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी मेरा बहुत साथ दिया था। भले ही मेरे कई रीटेक्स  हुए हो मुझे आज भी  याद  है बतौर एक न्यू  कमर। …फिर भी गोविंदा जी ने मेरा हर पल साथ दिया। अमिताभजी,  डैनी  सर और सुनील के साथ काम कर के हमने बहुत अच्छा अनुभव प्राप्त किया है। सो आज जब भी हम किसी के साथ   काम करते हैं तो हम उसे उतना ही प्रोत्साहन देते है। क्योंकि मुझे याद है जब मैं नयी थी तब मुझे भी बहुत प्रोत्साहन की आवश्यकता हुआ करती थी और इन सब जाने माने कलाकारों ने मुझे बहुत कुछ सिखाया भी है।

आपने अपनी पहली फिल्मों की पारी कुछ जल्द खत्म कर दी ऐसा क्यों किया आपने?

सही मायने में -मेरा 12 सालो का करियर जो मैंने बहुत स्ट्रगल करके बनाया था छोड़ना पड़ा। क्यूंकि 27 वर्ष की उम्र में मेरी शादी हो गयी और 30 वर्ष की उम्र में – बेटी अनुष्का आ गयी। मुझे सही मायने में पैसों के लिए ही काम करना पड़ा. और जैसे ही शादी हुई मुझे  ऐसा नहीं लगा कि मैं कैमरों की चका चौंध मिस कर रही हूँ। यह ऐसा इसलिए लगा क्योंकि- मेरी माँ ने मुझे यही  कहा था -जब जब जहाँ रहो वहां खुश रहो। और यदि वापस फिर वही काम पर  आओ  तो दोबारा से शुरू करो सब कुछ। इसीलिए मैं छोटे परदे पर भी काम कर के खुश हूँ। मैं अपने काम को पसंद करती हूँ सो यहाँ काम करना मेरे लिए सौभाग्य ही है।

आपकी बिटिया अनुष्का भी क्या आप ही के पद्चिन्ह : पर चल कर अभिनेत्री बनना चाहेगी क्या ?

देखिये, अनुष्का केवल 13 वर्ष की ही है , किन्तु यह कहते हुए मुझे गर्व महसूस  होता है कि अनुष्का मेरी बहुत इज्जत करती है। अनुष्का पढ़ाई लिखाई में ज्यादा रूचि रखती है। किन्तु हाँ उसे डांस का भी शोक है जैसे हाल में तो उसका विचार एक वकील बनने का है। अनुष्का  का इरादा बहुत अटल रहता है, वो हर बार यही कहती है की विदेश जाकर एक अच्छे लॉयर की पढ़ाई कर अपने देश में वकालत करेगी।

आपके पति और ससुराल के यहाँ से आपको काम करने की छूट है क्या?

जी हाँ, मेरे  ससुराल एवं मेरे पति और बेटी अनुष्का  के सहयोग से ही  मैं काम कर पा रही हूँ। और इसका  मुझे बहुत गर्व एवं प्रसन्नता भी है। यदि  इन सबका सहयोग नहीं मिलता तो मैं सुबह लगभग 9 बजे की शूट पर किस तरह जा पाती ? वह भी अमूमन  शूटिंग नये गांव में ही होती है।

आपकी बहन नम्रता शिरोडकर कब फिल्मों में वापसी करेगी?

अभी तो उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है। वो अपने परिवार की देख रेख में बहुत व्यस्त रहती है। अपने दोनों बच्चों को स्कूल भेजना और उनकी पढ़ाई  लिखाई का दारोमदार भी नम्रता पर ही है। यहाँ  तक अपने पति महेश की डेट्स और एड्रेस  का काम  भी नम्रता  ही रखती है। तो कुल मिला कर वो अपने परिवार में इतनी व्यस्त रहती है, सो इस ओर उसका ध्यान आकर्षित भी नहीं होता होगा फिलहाल।

बतौर एक माँ सेंसरों बोर्ड के रूल्स से क्या आप संतुष्ट है ?

सही मायेंने  में मेरी बेटी केवल 13 वर्ष की है। और हम काम काजी महिला है। यही  है कि मुझे अपनी बेटी पर भरोसा  है। किन्तु आज के दौर में बहुत ऐसी चैनल्स भी है जहाँ कुछ भी  देखा जा सकता है। सो यदि सेंसर बोर्ड   कुछ रोक लगाता है तो यह हम सब के लिए अच्छा ही है। हमारे बच्चे बड़े हो रहे है और यदि सेंसर बोर्ड कुछ नियम एवं कानून लेकर आगे बढ़ता है तो यह हमारे आने वाली पीढ़ी  के लिए अच्छा ही है। बतौर एक माँ मैं तो यही कहना चाहूंगी पेरेंट्स, टीचर्स के अलावा यदि सेंसरों बोर्ड की रोक टोक से हमारे समाज में कोई सुधार लाया जा सके तो बेहतर ही है।

 


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Mayapuri

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