बॉलीवुड के बड़े डायरेक्टर्स की अर्थपूर्ण शॉर्ट फिल्में

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आज के दौर में सोशल मीडिया एक ऐसा मंच बन गया है जहां पर कोई भी अपने विचार निसंकोच रख सकता है, आम लोगों के लिए तो ये एक बेहतरीन विकल्प है कि यहां पर वो अपना हुनर आसानी से दिखा सकते हैं लेकिन ये सोशल मीडिया कहीं न कहीं इंडस्ट्री के लोगों को भी अपनी ओर खिंचता हुआ नजर आ रहा है बॉलीवुड के बड़े बड़े डायरेक्टर्स जिनकी फिल्में बड़े पर्दे पर तो अपना जादू बिखेरती हैं वो अब शॉर्ट फिल्म्स के जरिए लोगों तक अपनी पहुंच और आसान बनाने में लगे हुए हैं हाल ही हाइवे जैसे फिल्म के निर्देशक इम्तियाज अली ने एक शॉर्ट फिल्म ‘इंडिया टूमोरो’ का निर्माण किया है जिसे दर्शकों द्वारा काफी सराहा जा रहा है इम्तियाज ने इस फिल्म के जरिए डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने की बात कही है। उनसे पहले और भी कई बड़े निर्देशकों ने शॉर्ट्स फिल्म बनायी हैं जो दर्शकों को काफी पसंद आयी और उनके दिमाग पर एक छाप भी छोड़ी..

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इंडिया टूमोरो – इम्तियाज अली

फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली ने ‘इंडिया टुमॉरो’ नाम से एक शॉर्ट फिल्म फेसबुक पर रिलीज की है। जिस तरह से वो बॉलीवुड में अर्थ पूर्ण फिल्में बनाते हैं वैसे ही उनकी ये फिल्म भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। इस शॉर्ट फिल्म में एक यौनकर्मी और उसके ग्राहक के बीच बातचीत दिखाई गई, जिसे देख कर आप चकित हो जाएंगे।

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देड डे ऑफ्टर येस्टरडे – अनुराग कश्यप

हमारे देश में गली-मोहल्लों में छेड़ छाड़ आम है,  ऐसा न्यूज पेपर का कोई न कोई कोना ऐसी खबर से जरुर भरा होता है जिसमें स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों से छेड़खानी की खबर आ ही जाती है  ऐसे अपराधों को न तो कानून और न ही समाज बहुत गंभीरता से लेता है। अनुराग कश्यप की इस शॉर्ट फिल्म को देखकर आप समझ सकते हैं कि कैसे हजारों लड़कियों को रोज इस खतरनाक हालात से दो-चार होना पड़ता है और इसका इलाज़ क्या है

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गोइंग होम – विकास बहल

विकास बहल के निर्देशन में बनीं शार्ट फिल्‍म गोइंग होम एक शानदार संदेश देने वाली शार्ट स्‍टोरी हैयह छोटी सी फिल्‍म महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क पर महिलाओं की सुरक्षा को बेहतर करने और लोगों को जागरूक करने के लिए बनाई है। फिल्म लड़की के बारे में है जो रात को देर से घर लौट रही है कि उसकी गाड़ी खराब हो जाती है। उधर से पांच आदमी गुजरते हैं जिनके इरादे बेहद खराब हैं। इस फिल्म को विकास बहल ने बेहद ही अनूठे तरीके से पेश किया है जो आप सोच भी नहीं सकते।

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ए डे इन द लाइफ ऑफ लक्ष्मी मंचूज़ फीट – राम गोपाल वर्मा

जहां निर्देशक खुशी फैलाने और बेहतर दुनिया बनाने की बात करते हैं कि वहीं राम गोपाल वर्मा ने ये शॉर्ट फिल्म बनाई है जिसका इन चीज़ों के साथ कुछ लेना देना ही नहीं है बस ये फिल्म एक युवा अभिनेत्री के नजरिए से दुनिया को दिखाती है बाकी फिल्म के नाम में ही इस फिल्म का अर्थ छुपा है। महिला को जिंदगी में कितनी समस्याएं होती है सब दिखाती है ये फिल्म ।

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घर वाली दिवाली – विक्रमादित्य मोटवाने

पेप्सी इंडिया के लिए बनाई गई ये फिल्म इस बात का एहसास दिलाती है कि हमारे माता पिता हमारे लिए कितने खास हैं लेकिन जब तक ये बात हमे समझ आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इस फिल्म के साथ पेप्सी की छवि सामान्य से कहीं आगे बढ़ गयी थी जिस तरह के विज्ञापन आजकल बनाए जाते हैं ये उनसे काफी अलग था।

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आई एम देट चेंज – सुकुमार

साल 2014 मेंस्वतंत्रता दिवस के मौके पर रिलीज हुई ये फिल्म भ्रष्टाचार के खिलाफ है साथ ही ये फिल्म महात्मा गांधी के उस संदेश को दोहराती है जिसमें कहा गया है ‘be the change, we want to see in the world around us’ कुल मिलाकर कहें तो इस फिल्म में खुद को बदलने के लिए कहा गया है। फिल्म में भ्रष्टाचार पर जोरदार प्रहार किया गया है, जिसमें वंदे मातरम का पुट देकर राष्ट्रभक्ति की तरफ भी मोड़ा गया है।


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Mayapuri

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