रिमिक्स-गीत हो या कहानी क्या उन पर रोक लगनी चाहिए?

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इस हफ्ते रिलीज होने वाली दो फिल्मों (बाला और उजड़ा चमन) के कथानक को लेकर बवाल खड़ा हुआ है कि उनमें एक ‘रिमेक’ है और दूसरी उसी कथानक की ‘रिमिक्स’! दोनो का स्त्रोत दक्षिण भारत में बनी एक कन्नड़-फिल्म है। वैसे ही गीतों को लेकर विशाल ददलानी ने इस हफ्ते ट्वीटर और सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफॉर्मों पर अपने गाने ‘साकी साकी’ को लेकर चर्चा खड़ी कर दी है। सवाल है कहां तक जायज है ‘रिमिक्स’ का फलता-फूलता कारोबार?

विशाल ददलानी (संगीतकार विशाल-शेखर के विशाल) का आक्रोश उनके द्वारा बनाये गये गीत ‘साकी साकी रे..’ के रिमिक्स कॉपीज को लेकर है। बिना उनकी अनुमति के इस गीत के सैकड़ों रिमिक्स बन गये हैं। कई फिल्मों में इस गाने को इस्तेमाल कर लिया गया है। और नये गायकों ने इसे गाकर यू-ट्यूब जैसे नेट मीडिया को भर दिया है। अरे भाई, कोई इतनी मेहनत करके लाइन बनाता है, रात-दिन एक कर देता है एक एक लाइन तैयार करने में…. उसकी मेहनत यूं ही जाया चली जाएँ? क्या इसके लिए हल्ला नहीं मचाया जाना चाहिए? विशाल तो कोर्ट में जाने और केस फाइल करने की बात कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए संबंधित फिल्म-युनियनें क्या कर रही हैं? संगीत से जुड़ी संस्थाएं है, जिनमें एक IPRS ने हाल ही में करोड़ों रूपए बांटे हैं। क्या सब पैसा मौलिक संगीतकारों, गीतकारों को गया है? खबर तो यह है कि मूल रचनाकारों की अपेक्षा ‘रिमिक्स’ वालों को खूब पैसा बाँटा गया है। सवाल उनके ‘नियमों’ में बंधे होने की बाध्यता का नहीं है और ना ही कॉपी राइट की पुरानी परिपाटी के चलन का, हम बात कर रहे हैं एक व्यक्ति के मेहनत का! ‘साकी साकी रे…’ एक उदाहरण है। 1986 की फिल्म जांबाज का गाना ‘प्यार दो प्यार लो’ और ‘हर किसी को नहीं मिलता’ के भी रिमिक्स आये हैं। हालिया रिलीज फिल्म ‘हाउसफुल 4‘ में ‘चाचा भतीजा‘ फिल्म का गीत ‘भूत राजा‘ को फिर से रीक्रिएट किया गया है। नितिन मुकेश ने भी फिल्म ‘बाईपास रोड‘ में दोबारा से खुद का ही गाया हुआ ‘तेजाब‘ फिल्म का गीत ‘सो गया ये जहां‘ गाया है। ‘दिलबर दिलबर’, ‘मिलो ना तुम तो’, ‘लैला मैं लैला’, ‘एक दो तीन’, जैसे कई सदाबहार गानों के रिमिक्स आ चुके हैं, जो अक्सर दर्शकों को निराश ही करते हैं। और ऐसे गाने सुनकर सच में उनके मुँह से यही निकलता है- ओ गॉड वन मोर रिमिक्स! वैसे ही, फिल्म की कहानी का मामला भी वहीं है। फिल्म ‘उजड़ा चमन’ और ‘बाला’ की आपसी लड़ाई में फिल्म की रिलीज की तारीखें बदली गई हैं। दोनों निर्माताओं का इस फेरबदल के चलते नुकसान हुआ है। फिल्म का रिजल्ट किसके पक्ष में बॉक्स-ऑफिस पर चार्ट बनाता है, बाद की बात है…. लेकिन, खड़ा हुआ बवाल क्या है। एक ही कहानी पर दो फिल्में, एक ही हफ्ते में रिलीज पर आ जाएं तो नुकसान तो कहीं ना कहीं होगा ही। इन फिल्मों में निर्माता जो दावेदारी कर रहे हैं, उनके मुताबिक मामला वहीं रिमेक और रिमिक्स का है। ‘उजड़ा-चमन’ को रिमेक का लाइसेन्स मिला हुआ है। तो ‘बाला’ को क्या कहेंगे हम ‘रिमिक्स’ ही ना? हम तो यही कहेंगे मामला रिमिक्स गीत का हो या रिमिक्स कहानी का, इन पर कड़े कानून बनने चाहिए।

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