स्व. एन दत्ता को श्रदांजलि देता कार्यक्रम ‘ कितना हंसी है जहां’

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हाल ही में सास्कृतिक कार्य संचनालय, महाराष्ट्र शासन तथा एन दत्ता ममोरियल ट्रस्ट द्धारा संचाालित इस कार्यक्रम में जावेद अख्तर आज के संगीतकारों को नसीहत देते हुए कह रहे थे कि एन दत्ता की कम से कम प्रयोग करते हुए संगीत रचने की अद्भुत क्षमता थी । अगर उन्हें आज सही तौर पर श्रदांजलि देनी है तो आज के म्यूजिशियन समार्टनेस थोड़ी कम करते हुए उनकी इस क्षमता को आत्मसात करें ।

kitna hansi hay ye jahan (1)

वे अगर ऐसा करेगें तो आज सात दिन की उम्र वाले गीतों की उम्र भी लंबी हो जायेगी। आशा भोसंले ने इस अवसर पर कहा कि मैं उन्हें उस वक्त से जानती हं जब वे एस डी बर्मन के सहायक हुआ करते थे । बाद में वे स्वतंत्र तौर पर संगीतकार बने । उन जैसे लोग यहां सीधे आते हैं और सीधे ही चले जाते हैं ।

 

kalyanji, suresh wadkar

उनकी कोई आवाज नहीं होती लेकिन उनके गाने आज भी याद किये जाते हैं । यह अमरतत्व भला उनसे कौन छीन सकता है । तबीयत खराब होने के वजह से लता जी कार्यक्रम तो नहीं आ सकी लेकिन वीडियो बाइट में उन्होंने कहा कि राॅक एन रोल जैसी जैसी संगीत की अलग विधा को दत्ता जी ने संगीत से जोड़ा था। उनकी और साहिर लुधयानवी जी की जोड़ी सुपरहिट हुआ करती थी । उनके साथ मेरे गाये तकरीबन सभी गाने हिट रहे । उनके बिना फिल्मी इतिहास पूरा नहीं हो सकता ।

kalyanji

इनके अलावा इस कार्यक्रम में रविन्द्र जैन, खय्याम, कल्यानजी,अजीत वाडेकर तथा सचिन पिलगांवकर, राजदत्त, सुरेश वाडेकर, अमर हल्दीपुर तथा अशोक पत्की आदि फिल्मी हस्तीयों ने भी एन दत्ता को भावपूर्ण श्रदांजलि देते हुए उनके बारे में ढेर सारे सस्ंमरण कहे । कितने ही गायकों ने इस अवसर उनके गीतों को स्वर दिया जिसमें सचिन भी शामिल थे ।


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