INTERVIEW: ‘किसी फिल्म में पहली बार शीर्ष भूमिका निभा रही हूं’’ – श्रद्धा कपूर

1 min


आशिकी टू, एक विलन, बागी, हैदर तथा एबीसीडी टू जैसी फिल्मों में अलग अलग भूमिकायें निभा बेहतरीन साबित हो चुकी श्रद्धा कपूर इस बार फिल्म ‘ हाफ गर्लफ्रेंड’ में एक और अलग सी भूमिका में नजर आने वाली है। फिल्म के बारे में श्रद्धा से एक छोटी सी मुलाकात।

आज का यूथ लव मैरिज में बिलीव करता है ?

लव मैरिज तो दूर की बात हो चली है अब तो यूथ डायरेक्ट किसी के साथ भी रिलेशनशिप रखने से उस वक्त तक बचता है जब तक उसकी सामने वाले की जाचं परख कंपलीट न हो जाये लिहाजा वो पहले उसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहता है। इसलिये इस आधुनिक युग में गर्लफ्रेंड और ब्वायफ्रेंड के रिश्ते पर ज्यादा विश्वास किया जाता है क्योंकि ये रिश्ता एक दूसरे को जानने में काफी मदद करता है।barish

इस फिल्म को आप कैसे देखती हैं ?

यह चेतन भगत के हिट नावल हाफ गर्लफ्रेंड पर आधारित बहुत ही बेहद इन्टेंस और इमोशनल फिल्म है। आशिकी टू और एक विलन जैसी फिल्में बनाकर, निर्देशक मोहित सूरी ऐसी फिल्में बनाने में सिद्धहस्त माने जाने लगे हैं। ये फिल्म भी उन्हीं के स्टाइल की है।

हाफ गर्लफ्रेंड को लेकर आपका क्या सोचना है?

बेशक अभी तक मैने हर तरह की फिल्में की हैं लेकिन इस फिल्म को लेकर मैं बहुत ज्यादा एक्साइट़ेड हूं। दरअसल मैं किसी फिल्म में पहली बार शीर्षक भूमिका निभा रही हूं इसलिये रोमांच के अलावा थोड़ा दबाव भी महसूस हो रहा है। इसी वजह से मैं पिछले दो हफ्तों से ढंग से सोई भी नहीं हूं। जब कोई लेखक या निर्देशक आपको लेकर सोचने लगता है कि आप ही आप ही इस रोल के लिये सही हैं, तो एक अनोखी सी अनुभूति होती है जिसमें गर्व छुपा होता है।Mohit suri

क्या इस बार भी गाने का मौंका मिला?

गाने के अलावा मैने इस बार एक और चीज नई की है मैने इस बार बास्केटबाल खेला है। यही नहीं इस बार मैने इतना कुछ किया है कि इस बारे में सोचने पर ही पसीने छूटने लगते है। उन कामों में एक काम यह भी था कि इस बार मैने अर्जुन कपूर को मराठी सिखाई।

फिल्म में आपको सबसे ज्यादा क्या पंसद आया ?

दोस्त से ज्यादा और गर्लफ्रेंड से कम। फिल्म की टैग लाइन मुझे बहुत पसंद है और काफी हद तक मैं वैसी ही हूं। दूसरे फिल्म का दर्शन मुझे बहुत अच्छा लगा। हमारी जिन्दगी में स्कूल कॉलेज से लेकर अभी तक न जाने कितने लोग आये और चले गये उनमें कुछ इतने प्रभावशाली थे जो आज भी हमें याद हैं लेकिन कुछ ऐसे भी रहे जो हमें याद नहीं। जरूरी नहीं कि हम या वह हमसे रिलेशनशिप चाहते थे। यह सारी बातें आपको फिल्म में देखने को मिलेगी।Shraddha-Kapoor

भोजपुरी या हरियाणवी लोगों और भाषा को हमेशा हास्य के तहत लिया जाता रहा है। इस बारे में फिल्म क्या कहती है?

आप भोजपुरी की ही बात क्यों कर रहे हैं आज तो हिन्दी समेत हर प्रादेशिक भाषा को अंग्रेजी के आगे तुच्छ समझा जाता है। अगर आप इंगलिश नहीं बाल पाते तो सामने वाले का आपको देखने का नजरिया ही बदल जाता है क्योंकि उनकी नजरों में जो अंग्रेजी बोलता है, वही इन्टैलीजेनट है। जबकि  हिन्दी या दूसरी भाषा बोलने वाला कितना ही इन्टेलीजेंट और समझदार शख्स हो उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता। फिल्म में यही सब बताने की कोशिश की गई है ।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये