सिम्पल कपाड़िया बहुत सिम्पल है

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मायापुरी अंक 9.1974

यह कितनी अजीब बात है कि डिम्पल के हीरोइन बनने पर नाराजगी प्रगट करने वाली सिम्पल अब खुद भी फिल्मों में हीरोइन बनकर चमकने वाली है। यदि सिम्पल को फिल्म लाइन इतनी नापसन्द थी तो अब वह स्वंय क्या देखकर फिल्मों में आ रही हैं ? यह बात जानने के लिए मैं ही नही, फिल्म दर्शक भी बैचेन होंगे। यही वह बात थी जो कि मुझे सिम्पल के घर ले गई।
मैं निश्चित समय पर जब जुहू तट पर स्थित समुंदर महल में दाखिल हुआ पहले घुंघरुओं को झंकार कानों में पड़ी। अन्दर ड्रांइग रूम में पहुंचा तो प्रवेश द्धार के सामने ही सिम्पल किसी नृत्य निर्देशक के साथ तबले की थाप पर ताता थइया के स्वरों के साथ अपने पैरों और हाथों से हाव भाव पैदा और कर रही थी। उसके पिता चुनी भाई कपाड़िया मेरी प्रतीक्षा कर रहे थे। मुझे देखते ही उन्होंने चाय का आर्डर दे दिया और समुद्र तट से आ रही ताजी हवाओं के रुख वाली कुर्सी पर हम विराजमान होकर रूम का निरीक्षण करने लगे। सिम्पल रियाज करती रही। यह देखकर चुनी भाई ने कहा, “अभी इन्टरव्यू करेंगे या ठहर कर ?
“रियाज कर लेने दीजिये.” मैंने कहा। मैं देखना चाहता था कि सिम्पल नृत्य में कितनी निपुण है और कितनी अनाड़ी!
“चलिये फिर हम अन्दर बैठकर बातें करते है”
और मैं अन्दर चुनी भाई के बैंड रूम में आ गया। चुनी भाई बोंले, “मै दो साल से इसे टाल रहा था। मैं नही चाहता था, कि यह फिल्मों मे आए। मैं इसे विदेश भेजकर डाक्टर बनाना चाहता था लेकिन डिम्पल को देखकर इसके मन में भी अभिनेत्री बनने की इच्छा जागृत हो गई। बहुत समझाया लेकिन अन्त में हथियार डालने पडें तभी सिम्पल की एन्ट्री हुई और बोली, “आप क्या मुझे इतना बेवकूफ समझते है। इतनी मेहनत करके यह जो एक्टिंग आदि की ट्रेनिंग में अपना खून-पसीना एक किया है वह यूं ही जाने दूं ! नही, नही ! अब जो ठान ली, सो ठान ली !
“आप तो फिल्मों के इतने खिलाफ थी कि डिम्पल की साइनिंग की न्यूज सुनकर ही उसे थप्पड़ मारने को उतारू हो गई थी। अब एकदम से हीरोइन बनने का विचार कैसे आ गया ? हमने पूछा।
दरअसल डिम्पल के बारे में मैं सोच भी नही सकती थी कि वह एक्टिंग कर लेगी। मैं तो उसे एकदम बुद्धु समझती थी। इसलिए मुझे बड़ा गुस्सा आया था, सिम्पल बोली।
‘इसका अर्थ है कि आप अपने को अभी से डिम्पल से बेहतर समझती है। आपको अपने पर इतना विश्वास है ? मैनें कहा।
सिम्पल आत्मविश्वास के स्वर में बोली, “अपने पर विश्वास न होता, तो यह सब चक्कर क्यों चलाती ! मैं नाटक आदि में हमेशा डिम्पल से अच्छी रही हूं और अब जब डिम्पों इतना अच्छा काम कर सकती है तो मैं क्यों नही कर सकती आपको मालूम है बॉबी की सफलता में डिम्पी का बहुत बड़ा हाथ है। फिल्म देखने के पश्चाच ऐसा लगता था कि फिल्म चलेगी जरूर किन्तु इतना नही कि सिल्वर जुबिली और गोल्डन जुबिली कर जाए यह तो डिम्पी की शादी और रिटायरमेंट के समाचार ने बॉबी को हिट कर दिया। एक तो फिल्म अच्छी ऊपर से डिम्पी की शादी और फिल्मों से सन्यास की खबर ! बस बॉबी को देखने के लिए लोग टूट पड़े” सिम्पल बोली।
“इस हिसाब से तो आपको अब तक हीरोइन बन जाना चाहिये था। डिम्पल की शादी से जो स्थान खाली हुआ था, वह आपको मिल जाता, मैंन कहा। तभी चुनी भाई ने सिम्पल की बात को कुछ और आगे बढ़ाते हुए कहा “आफर तो तभी आने लगे थे किन्तु मैं नही चाहता था कि यह फिल्मों में काम करे। इसलिए सबको टाल दिया था लेकिन बाल हठ ने तो बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं को हरा दिया है सो हमें भी हथियार डालने पड़े इसके शौक को देखकर काका ने कहा जब करना है तो फिर मेरे साथ पिक्चर करे ताकि झिझक दूर हो जाए और इस तरह पहली फिल्म की घोषणा हुई। इसे तो खुद अखबार से मालूम हुआ। मैने इसे बताया नही था” चुनी भाई ने बताया।
“डैडी सब आप ही बोले जायेंगे, तो मै चली जाती हूं सिम्पल ने बाल हठ दिखाते हुए कहा।
“आप खड़ी क्यों है ? बैठ जाइये ना मैंने कहा।
“नही डांस के पश्चात आधे घंटे तक बैठने की इजाजत नही है। सिम्पल बोली।
“सुना है फिल्मों में आने से पहले ही आपने शर्ते रखनी शुरू कर दी है” क्या यह सही है ? हमने पूछा। ”मैं भला क्या शर्ते रख सकती हूं ? मैं तो फिलहाल अच्छे रोल और अच्छी फिल्में पकड़ने के चक्कर में हू। सिम्पल बोली।
“हमने सुना था कि आपको चोपड़ा की फिल्म काका की वजह से छोड़नी पड़ी क्योंकि काका ने कहा था कि वह आपके साथ रोमांस नही कर सकेगा। क्या यह सही है ? हमने पूछा
“जी नही, बिल्कुल गलत है। यह काका ने नही बल्कि मैंने काका से कहा था कि मैं तुम्हारे साथ कैसे रोमांस करूंगी। क्योंकि काका ने मुझसे पूछा था क्या मेरे साथ काम करोगी ? मैंने उसी का जवाब दिया था। हां यश चोपड़ा की फिल्म मैं इसलिए नही कर रही हूं क्योंकि उसमें चार-पांच हीरोइनें है। उससे किसी को भी इम्पोरटैंस नही मिलेगी और मैं शुरू में ऐसी फिल्म नही करना चाहती, जिससे सही रिकॉगनेशन न मिले। सिम्पल ने बताया।
“आप फिल्मों में किस प्रकार की भूमिका करना चाहती है ? हमने पूछा।
“मैं हर किस्म की भूमिका करना चाहती हूं। मैं खुद को किसी दायरे में बन्द नही करना चाहती। सिम्पल ने कहा।
“आपका फेवरिट हीरो कौन है ?”
“शशि कपूर” सिम्पल तुरन्त बोली और हीरोइन भी बना दूं जया भादुड़ी
“यह शशि की फैन है संजीव कुमार इसका फैन है चुनी भाई बोले। “वह कैसे हमने सिम्पल से पूछा। बात यह है, कि पार्टियों आदि में हैलो-हैलो तो थी ही, एक दिन वह हमारे घर आए हुए थे राज साहब (राजकपूर) भी यही बैठे थे। उन्होनें फिल्म ऑफर की और बोले “काम करोगी ना मैंने तुरंत कहा, ”सोचूंगी” बस उस दिने से संजीव फैन हो गया है। कहता है राज जी से कोई इस से बोल नही सकता लेकिन तुमने कमाल कर दिया। बस तभी से वह फैन बन गया है। दरअसल मैं किसी से नही डरती जो बोलना होता है बोल देती हूं सिम्पल ने बड़ी सरलता से कहा।
“आपने फिल्मों में आने के लिए क्या कुछ सीखा है ? हमने पूछा। ”एक्टिंग, रायडिंग, नृत्य आदि सभी कुछ सीख रही हूं सिम्पल बोली। “आपकी आने वाली फिल्में कौन सी है ?
“यह मैं नही बता सकती मुझे तो खुद अखबार से ही मालूम होता है। डैडी मुझे इस बारे में न कुछ बतलाते है और न मैं पूछती हूं मेरी तरह आप भी अखबार पढ़िये सिम्पल मासूमियत और शरारत भरे स्वर में कहा।
“सिम्पल आने वाले कल में जरूर फिल्माकाश का एक जगमगाता सितारा बनेगी। तभी मैंने दिमाग को झटका दिया और उठ खड़ा हुआ। मुझे लगा, कि मैं भी संजीव कुमार की तरह सिम्पल का फैन होता जा रहा हूं


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Mayapuri

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