सिम्पल कभी डिम्पल नही बन सकती

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मायापुरी अंक 13.1974

हैरानी है कि सिम्पल कपाड़िया ‘ऑफर रेस’ में बड़ी-बडी हीरोइनों को पछाड़ गई। इन दिनों उनके पास धड़ाधड़ नई फिल्मों के ऑफर आ रहे है मगर सिम्पल के पप्पा इन फिल्मों को एक-एक करके ठुकराए जा रहे है। बहुत सोच-विचार कर (यानी धर्म-पत्नी और दामाद श्री काका की सलाह लेकर) पप्पा चूनिया ने अपनी मूनिया के लिए दो फिल्में स्वीकार की है। इनमें से एक राजेश खन्ना के साथ है। इस फिल्म की कहानी के.के. शुक्ला ने खास तौर पर सिम्पल कपाड़िया के लिए लिखी है (ऐसी धांसू कहानी है कि हीरोइन पूरे पर्दे पर छा जाएगी) दूसरी फिल्म का हीरो ऋषि कपूर है। इसके निर्देशक है राज खोसला अब आप भी हमारी तरह कहने लगेंगे। 1975 में सिम्पल स्टार बन जाएगी मगर इस नक्कार खाने में एक तूती ऐसी जो अलग सुर में बोल रही है वह है सिम्पल की छोटी बहन इनका कहना है, सिम्पल कभी डिम्पल नही बन सकती क्यों, मुन्नी? इसलिए कि डिम्पल सुन्दर है (यानी थी) और सिम्पल नही सिम्पल का नाक छोटा है और साइड-पोज में आते ही जाने कहां गायब हो जाती है आपने गीत सुना होगा, बच्चे मन के सच्चे मगर नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है?


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Mayapuri

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