माँ की भूमिका निभाना मेरे लिए एक नैसर्गिक बात थी”: स्मिता बंसल

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ज़ी थिएटर की पेशकश  ‘चंदा है तू ’,  में बंसल मातृत्व का एक ख़ास रूप पेश कर रही हैं

ज़ी थिएटर की नयी पेशकश  ‘चंदा है तू ’ जाने माने  नाटककार जयवंत दलवी की रचना है और मातृत्व को एक मर्मस्पर्शी रूप में पेश करती है.  ये  टेलीप्ले पूरे हफ्ते देखा जा सकता है  Dish TV & D2H Rangmanch Active पर और दर्शाता है की किस जतन , मुश्किल और सब्र से माता पिता एक दिव्यांग बालक की देखरेख  करते हैं.  नाटक के मुख्य किरदार हैं शुक्ला  दम्पति  जो जीविका कमाने के साथ साथ किसी तरह अपने बेटे  ‘बच्चू’ ‘की देखभाल  भी करते हैं. दिन रात वह दोनों उसका  ख्याल भी रखते हैं और अलग अलग शिफ्ट में नौकरी भी करते हैं.
एक सामान्य जीवन को जीने में असमर्थ होने के बावजूद भी वे दोनों हमेशा मुश्किलों को खुशहाली में बदलने  की उम्मीद और कोशिश करते रहते हैं और इसी बात  में  कहानी  का पूरा सार है.

छोटे पर्दे और रंगमंच की जानी मानी अभिनेत्री  स्मिता बंसल जो नाटक में माँ की भूमिका निभाती हैं , कहती हैं, “माँ की भूमिका निभाना मेरे लिए एक नैसर्गिक बात थी क्योंकि मेरी भी दो बेटियां हैं जिन्हे मैं बेहद प्यार करती हूँ, उनके प्रति चिंतित रहती हूँ और उनकी एक मुस्कान के लिए कोई भी जतन कर सकती हूँ. मैं उन्हें किसी तरह की पीड़ा में नहीं देख सकती और जीवन की हर ख़ुशी देना चाहती हूँ. नाटक में श्रीमती शुक्ला की गहरी ममता को मैं खूब समझती हूँ क्योंकि हर माँ का अपनी संतान के प्रति अंतहीन प्यार स्वाभाविक होता है. मेरा किरदार एक ऐसी सशक्त महिला का है जो संतान और घर के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को बखूबी निभा रही है.  नाटक पढ़ते वक़्त मैं उसकी ढृढ़ता, कोमलता, प्रतिबद्धता, अथाह प्रेम और  त्याग से बेहद प्रभावित हुई.”

नाटक की रिहर्सल और अभिनय की  वर्कशॉप्स करते वक़्त  स्मिता ने अपने किरदार की भावनाओं में  लीन  होने की पूरी कोशिश की. वे कहती हैं, “सभी कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं का सही सुर पकड़ने की बहुत कोशिश की है और जैसे जैसे हम एक दुसरे से जुड़ने लगे , वैसे ही घनिष्ठता भी बढ़ी और अभिनय बेहतर होता चला गया. एक बार संवाद याद हो जाएं, सही भावनात्मक सुर समझ में आ जाये तब एक कलाकार अपनी भूमिका में बह जाता है और अपने किरदार को सार्थक कर लेता है.  जब तक नाटक को फिल्माने की बारी आयी तब तक हम सभी कलाकार पूरी तरह से तैयार थे. ये पूरा अनुभव जादुई था और उम्मीद है की दर्शक ‘चंदा है तू’ देखंगे और हमारी लगन और मेहनत को सराहेंगे.”


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Mayapuri

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