बॉयफ्रेंड्स होना मेरे लिए कोई बड़ी डील नहीं है- शोभिता धूलिपाला

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शोभिता धूलिपाला का जन्म हैदराबाद में हुआ किन्तु उन्होंने अपनी पढ़ाई लिखाई और जीवन के शुरूआती दिन विशाखापट्नम में गुजारे थे। शोभिता को शुरू से किसी महानगर (मेट्रोपोलिटन सिटी) में रहने का चाव था।  शोभिता ने मुंबई महानगर का चयन किया। उन्हें यहाँ का कल्चर बहुत ही पसंद था। मिस इंडिया फेमिना पगंत का ख़िताब जीतने के पश्चात भी उन्हें फिल्मी दुनिया  चकाचौंध से ज्यादा  लगाव नहीं था। बतौर मॉडल और मिस इंडिया  के  कम्पटीशन में वह केवल इसलिए उतरी क्योंकि उन्हें अपने साथियों को यह दिखाना था के वह बहुत ही कूल है। “जी हाँ ! क्योंकि, में बहुत ही पढ़ाकू किस्म की विद्यार्थी रही हूँ। स्कूल में भी में ज्यदा मेल जोल पसंद नहीं किया करती और  तो और मेरे सिर पर ढेर सारा तेल लगा होता था। मेरे माता पिताजी की आपस में बनती नहीं थी। सो में अपनी ख़ुशी किताबों में ढूंढने लगी। बस 16 वर्ष की उम्र में ही मुंबई आ गयी और आज जिस मुकाम पर हूँ खुश हूँ। “

 अपने बच्चपन के बारे में कुछ बतलायें ?

मुझे बच्चपन से महानगर में बसने की इच्छा थी। यहाँ के बड़े बड़े ब्रिज, बड़ी बड़ी ऊँची इमारते देख कर बहुत अलग सा महसूस होता था। यह ख़ुशी की बात रही मेरे  लिए कि मेरे माँ बाप में मुझे मुंबई आकर रहने की अनुमति दे दी। में उस वक़्त केवल 16 वर्ष की थी। जब मुंबई की सड़कों पर निकलती तो बड़ा ताज्जुब होता मुझे-एक तरफ पायजामे कुर्ते में किसी  राजनेता को देखने का अवसर मिलता तो दूसरी तरफ छोटे कपड़े पहन किसी मॉडल को चलते हुए देख पाते। अमूमन  समकालीन  कपड़े यहाँ सब कोई पहने दिखलाई देते। यहाँ का कल्चर (संस्कृति) मिला जुला देख कर भी मुझे बहुत अलग सा लगता और अच्छा भी लगता था। मुझे यह नहीं समझ आ रहा था की मैं क्या करूंगी ? दरअसल बचपन से ही मेरी  यही  इच्छा  रही कि में राष्ट्रपति कार्यालय में उनकी खास  अर्थशाष्त्री के रूप में कर्यरत रहूँ।

फिर क्यों आपने  फ़िल्मी दुनिया, फैशन  की दुनिया ,एवं मॉडलिंग की दुनिया में पदार्पण कैसे और क्यों किया आपने ?

जैसा की पहले ही मैं आपको बतला चुकी हूँ महानगर में ही रहने मन बना लिया था मैंने। और फिर स्कूल में  भी मुझे एक जिद्दी लड़की समझा जाता। मेरा कोई भी दोस्त नहीं हुआ करता। किन्तु में अपने अध्यापकों की सबसे प्रिय छात्र हुआ करती अतः मुझे स्कूल कप्तान की भी पद्वी मिली हुई थी। पर क्योंकि घर पर और दोस्तों के बीच ज्यादा प्रासंगिक  नहीं मानी जाती और सब यही समझते कि यह एनवी है। सो सबको यह जतलाने कि मैं भी सबकुछ कर सकती हूँ। और अन्य लड़कियों की तरह ही मैं भी बहुत कूल हूँ। मैंने सबसे पहले मिस इंडिया  फेमिना का ख़िताब जीता। और अनुराग कश्यप की फिल्म, “रमन राघव 2.0” की। अनुराग के साथ आगे भी दो फिल्म का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है।

16 वर्ष की उम्र में मुंबई में सेटल हुई, कुछ अनुभव शेयर करेंगी हमसे ?

बस यही  की इतनी सी उम्र में यह निर्णय लेना बहुत ही साहसी निर्णय रहा। और तो और मेरे माता -पिता ने भी मेरा साथ दिया। हम दोनों बहनों का अपने माता पिता से काफी जनरेशन गैप भी है। वह जबकि 60 वर्ष के हो चुके है और में और मेरी बहन 20 से 25 के बीच ही है। मेरे माता पिता ने अपने समय में जितना भी कुछ दिया हमें वह  बहुत रहा हमारे लिए। हम मध्य वर्गीय परिवार से बिलोंग करते है। जो कुछ भी हमे शिक्षा एवं संस्कार दिए वह हमारे जीवन में काम आये । में बहुत ही फोकस्ड हूँ जो कुछ भी काम करती हूँ। मुझे पार्टी इत्यादि में जाना बिलकुल पसंद नहीं है। मुझे अपने आप पर बहुत भरोसा है और यही  मेरी एक बड़ी ताक़त है।

आपके बॉयफ्रैंड्स है। या आप सिंगल है ?

बॉयफ्रैंड्स होना मेरे लिए कोई बड़ी डील नहीं है। अपने समय में क्रश भी हो गया था मुझे। और लड़को की दोस्ती को में एक साधारण सी बात ही है मेरे लिए।

शादी का कोई विचार है क्या आपका  ?

अभी तो बिलकुल भी नहीं है। आगे चल कर सोचा जाएगा। अभी तो मुझे कुछ सोशल वर्क करना है। कुछ समय से सोच रही हूँ बतौर अभिनेत्री क्योंकि मेरी आवाज़ को लोग समझेंग, सो कुछ उन बेहतरी के लिए करना चाहती हूँ।

आपके माता पिता एक साथ नहीं रह पाए इसका आप पर क्या असर पड़ा ?

वह दोनों एक दूसरे के लिए भले सही साबित नहीं हुए हो। किन्तु हमारे लिए बहुत कुछ किया दोनों ने अपने अपने स्तर पर।  सही शिक्षा एवं फाइनेंसियल  सपोर्ट भी बहुत दिया। हाँ यह जरूर है कि – मेरा बचपन अपनी मासी के यहां बिता तो में अपनी ख़ुशी एकांत में एवं किताबों में ढूंढने लगी। उससे एक अच्छी बात यह हुई -मैं अपनी उम्र के बच्चों से थोड़ी ज्यादा इमोशनल और सीरियस भी हो गयी। आज जिंदगी के मायने मुझे बेहतर मालूम है।

आप कौन सी किताबें ज्यादा पढ़ती रही बचपन में ?

सच कहूँ तो हैरी पॉटर की किताबें बचपन में पढ़ना मुझे बहुत ही अच्छा लगता हैं। और थोड़ी वयस्क हुई तो मॉलिन मोनरो की बायोपिक इत्यादि भी पढ़ी है मैंने। कुछ और समय गुजारने के बाद मैंने ओशो की किताबें भी पढ़नी शुरू की। यह सब किताबों ने मुझे न केवल दुनियादारी से अवगत करवाया अपितु  मुझे  जीवन मैं भी सिखलाया।

आप को प्रेजिडेंट के कार्यालय में अर्थशास्त्री के रूप में कर्यरत होने की इच्छा रही। फिर आप फिल्मों,में ,फैशन की दुनिया में कैसे आ गयी ?

हंस कर बोली दरअसल में मैंने यह प्रतियोगिता यही एक दिन ज्वाइन कर  ली। मुझे जीतने की मंशा बिलकुल भी नहीं थी। किन्तु जैसे ही प्रतियोगिता की दिनचर्या में भाग लेती, मुझे जीतने की आशा भी होने लगी। और जाने अनजाने में मिस इंडिया फेमिना का ख़िताब  जीत लिया। फिर ‘रमन राघव’ के लिए ऑडिशन में भाग लिया, फिर फिल्मों में भी चयन हो गया। निर्देशक अनुराग कशयप एक ऐसे फिल्मकारों में से है जो रियलिटी (सच्चाई) को फिल्मों द्वारा पेश करते है। कुछ ही फ़िल्मकार है जो फिल्मों रियलिटी पेश करते  है।

आगे कितनी फ़िल्में है आपके पास ?

देखिये दो फ़िल्में अनुराग कश्यप के साथ है, अभी मै यह नहीं बतला पाऊँगी यह रोमांटिक कॉमेडी या फिर थ्रिलर है। समय आने पर आपको वही (निर्माता) आप लोगो को बतलायेंगे.तेलुगु फिल्म भी है एक और एक मलयालाम फिल्म भी है।

आप इतनी ग्राउंडेड कैसे है ?

देखिये, अभी मै आपपके साथ इस पॉश होटल में बैठी हूँ ,पर कुछ समय बाद सड़क पर चलना होगा। सो ग्राउंड रियलिटी से में कभी भी दूर नहीं भागती हूँ। मुझे पता है कि सच्चाई यही है।


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Lipika Varma

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