INTERVIEW: लेखनी का गुण अपने पिताजी से विरासत में मिला है – सोहा

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लिपिका वर्मा

सोहा अली अपनी अगली फिल्म 31 अक्टूबर को लेकर ख़ासा उत्साहित है। इस रात श्रीमती इंदिरा गाँधी के निधन के बाद सरदारों पर क्या बीती खास कर दिल्ली में – बस यही कुछ दर्शाती है यह फिल्म हम सब को। काफी इमोशनल फिल्म है -” सोहा ने इस बात की पुष्टि भी की-“दरअसल में इस दिन लगभग लाखोँ सरदारों को सारे आम मर दिया गया था, और इसके बाद वह हमें कभी नहीं दिखने वाले थे। यह एक दुःखद घटना थी ।”

आपका किरदार क्या है 31 अक्टूबर फिल्म में ?

बस इन्हीं सरदारों के बीच एक परिवार का में हिसा हूँ। 1983 के दंगे में जो परिवार और लोग बच गए थे वह आप बीती इस फिल्म में दिखला रहे है।soha-ali-khan

आपने यह किरदार क्या सोच कर स्वीकार किया?

मुझे अच्छे किरदार करना बेहद पसन्द है। आपको बतला दूँ इस बीच मेरे पास काफी ढेर सारे करैक्टर आये ,मैंने कुछ स्क्रिप्ट्स पढ़ी भी और उन सब में मुझे यह स्क्रिप्ट बहुत ही अच्छी लगी जो कुछ भी हुआ उसे बेहतरीन स्केल पर दर्शाया गया है फिल्म में.यह बहुत इमोशनल फिल्म है। “

जब यह घटना घाटी थी तो आप कहाँ पर थी ?

मैं उस वक़्त बहुत छोटी थी किन्तु अपनी दादी को मिलने हम सब उस समय दिल्ली गए हुए थे। उस वक़्त तो बहुत घबराही हुई थी। जब कभी भी उसकी जुबान पर वही मंजर नजर आता है तो उस बेचारी का दिल देहल जाता है।

इस फिल्म में क्या कुछ दर्शाया गया है ?

इस फिल्म में जो कुछ हुवा है वह राइटर /प्रोड्यूसर का एक बेहतरीन आंकलन है। लेकिन इस फिल्म में सब कुछ नाकारात्मक नहीं दर्शाया गया है। लोगों ने सबकी मिल कर मदद भी की थी वह सब भी बहुत पॉजिटिव वे में दिखलाया गया है। जो बच गये है उनकी जुबान से हम कहानियां सुनते है तो पाकिस्तान पार्टीशन के समय से भी बदतर एहसास होता है।

आप फिल्म प्रोडक्शन भी करने की सोच रही है -कुछ बतलायें?

जी हाँ एक अच्छी स्क्रिप्ट मिली है हमे सो उसे बनाने की सोच रहे है । बहुत जल्द हमारे होम प्रोडक्शन के तहत हम फिल्म अनांउस करने जा रहे है। हम दोनों ने यह भी तय किया है कि जो फिल्म का हम निर्माण कर रहे है उस में अभिनय नहीं करेगे।soha-ali-khan

भईया सैफ अली खान से फिल्म निर्माण के बारे में कुछ सीख लेती है आप?

हंस कर बोली,” सीख देने वाले तो बहुत सरे लोग मिल जाते है किन्तु हम ने अभी काम शुरू नहीं किया है,फिल्म का टाइटल भी नहीं रखा है और कास्ट भी तय नहीं की है। ..सो बाद में देखते है। “

आप अच्छी खासी राइटर भी है किस से यह गुण मिला है आपको?

देखिये, मेरे पिताजी नवाब पटौदी भी अच्छे लेख लिखा करते। दरअसल में -मैं क्रिएटिव राइटर नहीं हूँ बस कुछ हल्की फुल्की हंसी से जुड़े कुछ बेहतरीन लेख कभी लिख लिया करती हूँ। जी हाँ अपनी किताब जो में लिख रही हूँ आपको कुछ लेख जरूर भेजूंगी। यकीन है मुझे की यह लेखनी का गुण मुझ में अपने पिताजी से विरासत में मिला है।


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Mayapuri

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