फिल्म ‘सोनाली केबल’ – असरदार प्रभावशाली नहीं

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box 24 1कुछ अरसा पहले मुम्बई में केबल वॉर को लेकर काफी खून बहा था। निर्देशक चारूदत्त आचार्य की फिल्म ‘सोनाली केबल’ में इस क्षेत्र में आई मल्टीनैशनल कंपनीयों के दबदबे के तहत छोटी कम्पनियों को कब्जाना दिखाया गया है। फिल्म की नायिका का अपनी केबल कंपनी को बचाने को लेकर जो कथा बुनी गई है वो असरदार है लेकिन प्रभावशाली नहीं। रिया चक्रवर्ती यानि सोनाली दत्तूराम तांडेल मुंबई के इलाके में सोनाली केबल नाम से इन्टरनेट केबल चलाती है। उसमें इलाके की विधायक स्मिता जयकर की भागीदारी है। विधयक का बेटा अली फजल हाल ही में अमेरिका से पढ़कर लौटा है। रिया और अली दोनो बचपन के साथी हैं। इसलिये आज भी आपस में प्यार करते हैं। लेकिन इसी दौरान एक मल्टीनेशनल कंपनी शनशाईन मबुंई में अपना जाल फेला देती है जिसमें सोनाली केबल भी आ जाता है। लेकिन बाद में किस प्रकार रिया अपनी तरकीबों से उस मल्टी नैशनल कंपनी के मालिक अनुपम खेर को नाकों चने चबवाती है। फिल्म की कथा में नायिका का अपनी कंपनी से भावनात्मक जड़ाव इस कदर है कि वो अकेली हो जाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारती। और अंत में अपनी कंपनी बचाने में कामयाब रहती है। लीड रोल में रिया चक्रवर्ती काफी खूबसूरत लगी है लेकिन अपने जितना खूबसूरत अभिनय नहीं कर पाई। अली फजल एक अच्छा अभिनेता है लेकिन उस हिसाब से उसके रोल को लैंथ नहीं मिल पाई। सदा की भूमिका में राघव जुयाल अपने अभिनय से खूब आकर्षित करते हैं। उन्हें मौंका भी अच्छा मिला है जिसे उन्होंने अच्छी तरह से इस्तेमाल किया है। गीतकार संगीतकार स्वानंद किरकिरे अपनी छोटी सी भूमिका को बढि़या तरह से निभा ले जाते हैं। लेकिन अनुपम खेर कुछ अलग करने के चक्कर में जोकर बन कर रह जाते हैं। दरअसल इस तरह की भूमिकायें वे कितनी ही बार कर चुके हैं। इसलिये हर बार वे कुछ अलग करना चाहते हैं लेकिन इस बार उनका दाव उलटा पड़ गया। गीत संगीत काफी लोगों का है लेकिन एक दो गीत जैसे एक मुलाकात अच्छा बन पड़ा है। अंत में सोनाली केबल अपने नये सब्जेक्ट के कारण एक बार देखी जा सकती है।

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Mayapuri