INTERVIEW!! हर फिल्म की सफलता बेहतरीन डायरेक्शन  और कहानी पर निर्भर होती  है – सोनम कपूर

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लिपिका वर्मा 

सोनम कपूर की फिल्म, “नीरजा” ने हाल ही में बहुत सारी तारीफ बटोरी है। सोनम खुश तो बहुत हैं पर उनका मानना है कि, “हर फिल्म में मैं उतनी ही मेहनत  करती हूँ जितनी कि मैंने  इस फिल्म में की है। जिन सब निर्देशकों के साथ मैंने काम किया है वह सब मेरे साथ वापस काम करने को इच्छुक हैं। फिर चाहे वह आनंद राय हो, राकेश ओमप्रकाश मेहरा या फिर संजय लीला भंसाली जी। पर हर फिल्म की सफलता बेहतरीन डायरेक्शन  और कहानी पर निर्भर होती  है। यदि एक्टर्स उनके निर्देशक  ने जो कुछ अपने किरदार में सजोया है उसे हूबहू पर्दे पर उतारने  में सफल हो जाये तो फिल्म बेहतरीन लगती है सबको।”

फिल्म की सफलता पर कितने खुश हैं आप ?

खुशी से ज्यादा मुझे अपने काम को बेहतर करने की जरूरत  है अब। मेरी हर फिल्म चाहे वो आयेशा, रांझणा, भाग  मिल्खा भाग, दिल्ली -6 हो सबकी सब सिल्वर स्क्रीन पर मुझे एक अलग पहचान देती है। मुझे अपने आप को बेहतर करना है हर फिल्म से मैं कुछ न कुछ सिखती  हूँ। ‘नीरजा’ से मुझे इस बात का एहसास हो गया है कि ऑडियंस इमोशनल कहानियों से कितना कनेक्ट करते हैं  और फिर निर्देशक ने उसे बहुत ही अच्छे ढ़ंग से संजोया भी है। मैं तो भाई डायरेक्टर की एक्टर हूँ जैसा उन्हें चाहिए होता है वैसा ही करने की कोशिश करती हूँ।

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फिल्म शूट करते हुए कुछ यादें हम से शेयर कीजिये?

हाँ यह कि जितने बच्चे, टेररिस्ट और अन्य जहाज पर सवार क्रू और लोगों को अलग अलग वर्क शॉप करवाई गयी। इससे जब हम जहाज में सवार हुए तो एक अंजानापन खुद ब खुद आ गया और वह डर  जो पर्दे पर दिखना था बहुत रियल लगा सब को। “हंस कर सोनम ने कहा – जब मैंने कहते सुना, “टेररिस्ट अंकल” तो बहुत हंसी आयी। बच्चे सच में कितने विनम्र होते हैं।

पाकिस्तान में ‘नीरजा’ का स्क्रीनिंग नहीं हो रही  है खेद है क्या आपको ?

बिलकुल दुखी हूँ। दरअसल में लोगों को यह फिल्म दिखानी चाहिए पाकिस्तान में भी ताकि उन्हें सच्चाई  पता चले। मेरा ऐसा मानना है कि लोग बहुत ही साधारण होते हैं किन्तु यह कुछ राजनीतिज्ञ ताकत होती है जो ऐसा करती हैं। मैं विदेश में बोर्डिंग स्कूल में पढ़ती थी वहां पाकिस्तानी छात्र भी पढ़ते थे मेरे साथ, हम अच्छे दोस्त थे। भारतीय और पाकिस्तानी लोगो में ज्यादा फर्क नहीं दिखता है। हमारा रंग रूप मिलता जुलता है। हमारा कल्चर भी एक सा ही है। यदि आगे चल कर ‘नीरजा’ पाक में भी रिलीज़ हो तो मुझे बेहद ख़ुशी होगी।

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‘की एंड का’ में आपका भाई अर्जुन एक बड़ी उम्र की लड़की के साथ काम कर रहा है क्या कहना चाहेंगी आप ?

उम्र का कोई तकाजा नहीं है हमारे प्रोफेशन में। मुझे अर्जुन और बेबो की जोड़ी बहुत ही अच्छी लग रही है। यह कोई ट्रेंड नहीं सेट हो रहा है कि अर्जुन छोटा है और बेबो बड़ी है। काम तो  काम ही होता है। मैं फिल्म देखने के लिए बहुत ही उत्सुक हूँ। प्रोमोज और गाने देखे है मैंने, मुझे अर्जुन और बेबो स्क्रीन पर बहुत ही अच्छे लग रहे हैं।

अर्जुन ने मुझे अभी  तक कुछ ग्रिल खाना बना कर खिलाया है सिर्फ ।

 


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Mayapuri

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