INTERVIEW!! मुझे खुद नहीं पता कि सब से भावुक क्षण इस चरित्र को निभाते हुए कौन सा था – सोनम

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लिपिका वर्मा

सोनम ने धीरे धीरे फिल्मी दुनिया में अपना सिक्का जमा ही लिया है – अनिल कपूर (पिताश्री) ने भी हम से बातचीत के दौरान सोनम की तारीफ करते हुए कहा था- “सोनम धीरे -धीरे अपना मुकाम बना लेगी लेकिन “जब सोनम से हमने यह पूछा तो वह बोलीं, “बिल्कुल ठीक कहा पापा ने। वह मुझे कोई सलाह नहीं देते हैं वह कहते हैं जो ठीक लगे आप कीजिये। यह होता है अक्सर – बच्चे अपनी गलतियां माँ -बाप पर थोप देते हैं। मैंने आज तक जो भी किया अपनी सोच समझ से ही किया है।”
पेश है सोनम कपूर के साथ एक भेंटवार्ता – लिपिका वर्मा द्वारा

फिल्म, “नीरजा के चरित्र चित्रण को पर्दे पर करते हुए आपका सब से भावुक क्षण कौन सा था ?

मुझे खुद नहीं पता कि सब से भावुक क्षण इस चरित्र को निभाते हुए कौन सा था मेरे लिए। मुझे इस फिल्म का हिस्सा बनाया गया और नीरजा का किरदार निभा रही हूँ यही मेरे लिए एक विशेष बात है और नीरजा के किरदार से में बहुत प्रेरित भी हुई हूं। नीरजा एक बहुत ही साधारण लड़की थी किन्तु उसमें जो ताक़त थी वह काबिले तारीफ थी। दया और जोश का मिश्रण था नीरजा में। इसलिए उसने अपने साथी यात्रियों के लिए अपनी जान भी जोखिम में ड़ाल दी। इस से हम सब को प्रेरित होना है। केवल तेईस साल की नीरजा ने अपनी जान जोखिम में ड़ाल कर इतना बड़ा काम कर दिया है जो कि हर औरत के लिए गर्व की बात है।

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आप ऐसी स्थिति में क्या करती ?

हम महिलाओं को अपने लिए खड़ा होना है। आजकल तो क्लब और बहुत सारी साधारण जगहों में भी टेरेरिस्ट्स अटैक आम से हो गए है और यदि मैं भी कभी आतंकवादियों के चुंगल में आ जाऊँ, तो जाहिर सी बात है कभी ऐसी स्थिति में हम आ जायें तो पीछे नहीं हटेंगे उनका डट कर सामना करेंगे।

आपने ढ़ेर सारे किरदार निभाए हैं क्या कहना चाहेंगी ?

जब भी मैं कोई किरदार निभाती हूँ तो मैं वह किरदार बन जाती हूँ। कई लोग सोचते हैं मैं आयशा जैसी हूँ, या फिर मैथेली जैसी ही हूँ। या फिर दिल्ली – 6 की मिल्ली की तरह हूँ। पर मेरे लिए ऐसा कुछ भी नहीं है। हाँ यह जरूर है कि – उस वक़्त मैं वह चरित्र बन जाती हूँ। मैं दरअसल बहुत सिंपल और मुँह फट किस्म की लड़की हूँ। पर हाँ मैं बहुत ऑनेस्ट हूँ और यही चाहती हूँ कि जो भी मेरे सम्पर्क में आये वह भी ऑनेस्ट ही हो। मेरे अंदर कोई भी विचित्र गुण नहीं है।

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आप की जीवन शैली इतनी सिंपल है इसका क्रेडिट किसे जाता है ?

सीधी सी बात है हम फिल्मी परिवार से आते हैं। किन्तु हमारे यहां बहुत ही साधारण जीवनचर्या होती है। हमें बचपन से यही सिखाया गया है कि सच्चाई और साधारण जीवन जीते हुए मेहनत करो और आगे बढ़ो। नैतिक मूल्य हर बच्चा घर और स्कूल से ही सीखता है। हमारा भारतवर्ष कल्चरल मूल्यों के लिए ही जाना जाता है। भारतीय मूल्यों को ही आगे लेकर मैंने अपने जीवन में सब कुछ पाया है।

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Mayapuri