INTERVIEW!! ‘रांझणा’ के बाद आपके लिए सफलता व असफलता कितनी मायने रखती है ?

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‘रांझणा’ से पहले मेरी फिल्में असफल हुई थी। ‘रांझणा’ के बाद तो मेरी सारी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल हो रही है। कभी कोई फिल्म बहुत बड़ी हिट हुई है, तो कभी कोई फिल्म एवरेज रही पिछले चार पांच वर्षों के दौरान मुझे असफल फिल्म का कोई महत्व समझ में नहीं आया क्योंकि इस बीच मेरी फिल्में असफल नहीं हुई। ‘बेवकूफियां’ एवरेज चली थी, तब मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ था क्योंकि ‘बेवकूफियां’ के लिए मैंने बहुत मेहनत की थी पर लोगों को मेरा काम भी पसंद आया था ‘डॉली की डोली’ में भी लोगों ने मेरे काम की तारीफ की थी। ‘प्रेम रतन धन पायो’ में भी मुझे तारीफ मिली मुझे उम्मीद है कि शीघ्र प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘नीरजा’ से मेरे करियर को गति मिलेगी।

फिल्म ‘नीरजा’ को लेकर क्या कहेंगी?

मैं खुश हूं कि नीरजा भनोट की कहानी लोगों तक पहुंचेगी। नीरजा भनोट हम सब की ही तरह 23 साल की आम मुंबईया लड़की थी मगर उसके अंदर अद्भुत ताकत, अदम्य साहस था और उसमें कई गुण थे। वह बुद्धिमान थी, वह नेकदिल थी। वह अपने परिवार के अलावा दूसरों के लिए बहुत कुछ करती रहती थी। इस किरदार को निभाकर मेरी समझ में आया कि यदि ऐसी लड़की थी, तो हम इस तरह की क्यों नहीं बन सकते। नीरजा भनोट की शूटिंग पूरी होने के बाद मुझे अहसास हुआ कि यदि आप अच्छे काम करेंगे, तो चैन की नींद सो सकेंगे। 23वें जन्मदिन से दो दिन पहले ही उसे आतंकवादियों ने मार दिया था नीरजा भनोट से मैंने रिश्तों को निभाना सीखा।

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फिल्म ‘नीरजा’ से जुड़ना कैसे हुआ?

लगभग ढ़ाई साल पहले मेरे सामने फिल्म ‘नीरजा’ की स्क्रिप्ट आयी। मुझे बताया गया कि यह फिल्म राम माधवानी निर्देशित करने वाले हैं और उनकी राय में नीरजा का किरदार मैं ही निभा सकती हूं। स्क्रिप्ट पढ़ते पढ़ते मैं रो पड़ी मैंने तुरंत फिल्म करने के लिए हामी भर दी पर मुझसे कहा गया कि मुझे नीरजा के परिवार वालों से मिलना पड़ेगा। वह स्वीकृति देंगे, तभी मैं यह फिल्म कर पाऊंगी मैं चंडीगढ़ नीरजा के घर गयी तो मुझे देखते ही नीरजा की मां यानी कि रमा आँटी ने कहा कि, ‘अरे, यह तो मेरी लाड़ो है’ यह सुनते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए।

क्या आपने रमा आँटी से पूछा था कि उन्हें क्यों लगा कि आप नीरजा बन सकती हैं ?

उन्होंने कहा कि मेरी फितरत में कुछ बात है मैंने रमा आंटी का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने मेरे बारे में इतनी बड़ी बात कही। नीरजा मेरी हीरो बन चुकी है मैं जितना जान पायी हूँ, उसके अनुसार यह आम लड़की होते हुए भी बहुत अलग थी। नीरजा मुंबई की लड़की थी मुंबई के स्कॉटिश स्कूल में पढ़ी थी उसके पिता पत्रकार और माँ गृहिणी थी। एक आम मध्यमवर्गीय परिवार से वह थी उसके पिता मनोरंजन के क्षेत्र से नहीं आम पत्रकार थे। उसके व्यक्तित्व में खूबी थी वह ईमानदार व प्रिंसिपल वाली लड़की थी, अन्यथा सहन नहीं कर सकती थी। वह अपने काम को पूरी ईमानदारी व शिद्दत के साथ करने में यकीन रखती थी और अंत तक उसने अपने काम को पूरी शिद्दत के साथ अंजाम दिया उसने अपनी जिंदगी को त्यागा मुझे रोना इस बात को लेकर आया था कि उसके त्याग के बाद माता पिता ने कितना दर्द सहा। उसके भाई उसे बहुत प्यार करते थे, उसका भविष्य बहुत उज्ज्वल था।

Sonam kapoor with Neerja bhanot's mother
Sonam kapoor with Neerja bhanot’s mother

क्या पंजाबी लड़की होने की वजह से रमा आंटी को आप में उनकी लाडो नजर आयी थी?

-पता नहीं! मैं तो जुहू में रहने वाली लड़की हूं अनिल कपूर मेरे डैड हैं, कुछ तो अलग हूं पर मुझमें रमा आंटी को क्या नजर आया था, मैं नहीं जानती, उन्होंने मुझसे सिर्फ इतना कहा था कि मेरी फितरत में कुछ बात है मेरी नजर में तो नीरजा फरिश्ता थी।

नीरजा की रिलीज का आज की युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

फिल्म देखने के बाद युवा पीढ़ी की हर लड़की व लड़के को अहसास होगा कि यदि आप आम इंसान हैं, पर अपनी जिम्मेदारी को व अपने काम को पूरी इमानदारी के साथ अंजाम देते हैं, तो भी आप बहुत कुछ कर सकते हैं और अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं। यदि आप सच्चे दिल के हैं, तो कुछ भी कर सकते हैं। नीरजा 23 साल की आम लड़की थी, जिसने 350 लोगों की जान बचायी थी।

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हाईजैकरों पर फिल्म के अंदर कोई कमेंट है?

हाईजैकर अपनी ड्यूटी निभा रहे थे उनके अनुसार वह अपना काम कर रहे थे। हिंसा, हत्या व खून खराबे से कुछ नहीं हो सकता, यह बात हर किसी को समझनी चाहिए।

आपने फिल्म ‘दिल्ली 6’ में गीत गाया था तो अपको हर फिल्म में अपने ऊपर फिल्माए जाने वाले गीत को खुद गाने के बारे में सोचना चाहिए?

मुझे नहीं लगता कि मैं बहुत अच्छी गायिका हूं पर तमाम ऐसे निर्देशक हैं, जिन्हें लगता है कि मैं अच्छा गा सकती हूं कई संगीतकारों को लगता है कि मैं अच्छा गा लेती हूं ‘दिल्ली 6’ के निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा को लगा कि मैं अच्छा गा लेती हूं, इसीलिए उन्होंने मुझसे फिल्म ‘दिल्ली 6’ में गीत गवाया था। उसके बाद मुझे गीत गाने का कोई अवसर मिला नहीं मुझे नहीं लगता कि मैं अच्छा गाती हूं फिर हमारी इंडस्ट्री में तमाम अच्छे गायक हैं, जो बहुत बेहतरीन आवाज के मालिक हैं वह मुझसे भी बेहतरीन गाती हैं मेरी आवाज बहुत अलग आवाज है टिपिकल श्रेया घोषाल या पलक मुच्छल जैसी मेरी आवाज नहीं है।

किस गायिका की आवाज आपको खुद पर फिट लगती है?

सुनिधि चैहाण और श्रेया घोषाल।

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अपने डैड के साथ कोई फिल्म नहीं कर रही हैं?

डैड के साथ फिल्म करने में डर लगता है अन्यथा मैंने फरहान अख्तर सहित कई कलाकारों के साथ फिल्में की है।

निर्देशक के तौर पर राम माधवानी कैसे लगे?

वह सर्वश्रेष्ठ निर्देशक हैं एक सुलझे हुए इंसान भी हैं।

इसके अलावा क्या कर रही हैं?

बैटल फॉर बिठोरा, जिसकी शूटिंग मार्च माह में शुरू होगी।


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Mayapuri

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