बॉलीवुड व होली का संगम

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होली यानी रंगों, प्यार और खुशियों का त्यौहार। बॉलीवुड में भी इस रंगों के त्यौहार का एक अलग ही महत्व है। बॉलीवुड को होली के त्यौहार ने जिस हद तक प्रभावित किया है, उतना किसी अन्य त्यौहार ने ने नहीं किया है। तभी तो होली निर्माता-निर्देशकों की पहली पसंद रही है और लगभग हर दौर की फिल्मों को होली के रंग में सराबोर (रंग में सना हुआ) करने की कोशिश की गई। फिल्म ‘नवरंग’ के गाने ‘अरे जा रे हट नटखट’ से लेकर नए जमाने की ‘वक्त’ के ‘लेट्स प्ले होली’ के गानें हमेशा के लिए यादगार बन गए।
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बॉलीवुड में होली की शुरूआत

बॉलीवुड में होली खेलने की परंपरा शोमैन राज कपूर के आर. के. स्टूडियो से शुरू होकर फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के बंगले ‘प्रतीक्षा’ तक पहुंच गई। एक जमाना था जब होली के दिन फिल्म जगत के सभी छोटे-बडे कलाकार आर. के स्टूडियो में जमा होकर ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं, रंगों में रंग मिल जाते हैं’ की तर्ज पर धमाल मचाते हुए रंगों से सराबोर मस्ती में डूब जाया करते थे। उस समय आर. के. स्टूडियो में एक छोटे से पूल में रंग घोला जाता था और इसमें लोगों को डुबोया जाता था व जमकर मस्ती की जाती थी। राजकपूर इस बात का पूरा ख्याल रखते थे कि होली के रंग में किसी तरह का भंग न पड़े और विशेष रूप से महिलाओं के साथ होली के नाम पर छेडखानी न की जाए।

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फिल्म की कहानी का हिस्सा बन गए ये होली के दृश्य

सन् 1944 में पहली बार निर्देशक अमिय चक्रवर्ती ने अपनी फिल्म ‘ज्वार भाटा’ में होली का दृश्य फिल्माया। फिल्म में दिलीप कुमार, मृदुला रानी, शमीम बानो अहम किरदार में नज़र आए थे। फिल्म को अधिक रोचक बनाने, प्रेम संबंधों या किसी अच्छी-बुरी घटना के अंजाम को प्रगाढ़ बनाने के लिए होली के त्यौहार को दर्शाया जाता था। जैसे कि ‘दामिनी’ फिल्म में होली की एक घटना जिसमें दामिनी (मीनाक्षी शेषाद्री) की नौकरानी के साथ हादसा होते हुए दिखाया गया इससे फिल्म की कहानी को एक अलग ही मोड़ दिया गया।

निर्देशक विजय आनंद ने ‘गाइड’ फिल्म में क्लासिक गीत ‘पिया तो से नैना लागे रे’ के पहले स्ट्रेंजा में ‘आई होली आई’ से यादगार होली सीक्वंस प्रस्तुत किया। भव्य सेट, रंगो से भरी पिचकारियों व हीरोइन वहीदा रहमान का रंगों को हर जगह उड़ाना एक अलग ही भव्य दृश्य दर्शाता है। इस गाने से खुशी और उमंग को इन रंगों के साथ परोसने की कोशिश काफी अच्छी दिखी।

फिल्म ‘कटी पतंग’ में राजेश खन्ना उत्साह से ‘आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली खेलेंगे हम होली..’ गाने में आशा पारेख को छेड़ते हुए नज़र आए तो वही रोते दिल से आशा पारेख ने भी उनको जवाब दिया ‘अपनी अपनी किस्मत देखो, कोई हंसे कोई रोए।’

सन् 1975 में बनी फिल्म ‘शोले’ जिसमें धर्मेंद्र और हेमामालिनी होली के सीन में खूब मस्ती करते हैं (फिल्म की जोड़ी आगे जाकर रियल लाइफ जोड़ी बन गई) इसके ठीक बाद गांव पर डाकुओं का हमला होता है।

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सन् 1981 में यश चोपड़ा की फिल्म ‘सिलसिला’ में अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज में ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली…’ गाना गाया व फिल्म में उनके व रेखा के रोमांस को दिखाया गया है। साथ ही इस गीत में रेखा के पति बने संजीव कुमार का अभिनय भी देखने लायक है और जया भी इस गाने में अमिताभ बच्चन की सारी हरकतों को देख रही थी।

यश चोपड़ा की फ़िल्म ‘सिलसिला’ में बिग बी ने जब रंगों में भीग कर अपनी आवाज में ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली… ‘गाया था, तो उस समय किसी ने यह सोचा भी नहीं था कि हर होली पर बिग बी का यह गाना मस्ती के इस त्योहार में और मस्ती घोल देगा।

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फिल्म ‘मोहब्बतें’ में सभी छात्र अपनी प्रेमिकाओं के साथ गुरूकुल से बाहर जाकर होली मनाने में सफल होते हैं। राजेश खन्ना और स्मिता पाटिल की फिल्म ‘आखिर क्यों’ में होली का एक ऐसा दृश्य फिल्माया गया जो रिश्तों के बीच एक नई उलझन खड़ी कर देता है।

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‘बागबान’, ‘दीवाना’, ‘मंगल पांडे’, ‘वक्त’, ‘आखिर क्यों’, ‘फागुन’, ‘जख्मी’, ‘मदर इंडिया’, ‘मशाल’, ‘कटी पतंग’, ‘दिल्ली हाईट्स’ जैसी अनेको ऐसी फिल्मी रही जिसमें होली के दृश्यों ने इतिहास में अपनी ही यादगार कहानी को स्थापित किया।
लेकिन पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि बॉलीवुड फिल्मों में होली के सभी रंग लगभग नदारद होने लगे हैं। जिस तरह से धीरे-धीरे लोगों की रूचि और समाज में बदलाव आता चला गया उस तरह से फिल्मों में रंगो की होली के दृश्यों को कम ही फिल्माया जाता है व दूर-दूर तक निर्देशक भी होली के रंगों को परदे पर उतारने में रूचि नहीं ले रहे।


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Mayapuri

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