खास साक्षात्कार – ‘‘एक चेहरा यह भी महानायक अमिताभ बच्चन का’’

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Actors Leonardo DiCaprio and Amitabh Bachchan, cast members of the film 'The Great Gatsby', attend the opening ceremony of the 66th Cannes Film Festival in Cannes

सभी जानते हैं कि आज अमिताभ बच्चन उन सारे अलंकारों से नवाजे जा चुके हैं जो उनके लिये बनाये गये । लिहाजा उनके बारे में ये बताना मूर्खता ही है कि वे कितने बड़े अभिनेता है । अमित जी से साक्षात्कार करने से पहले हर बार यही कन्फयूजन बना रहता है कि आखिर कौन सा सवाल रह गया है जो उनसे अभी तक नहीं पूछा गया या उनसे जुड़ी कौन सी ऐसी बातें हैं जो दर्शकों को नहीं पहुंच पायी । लेकिन इस बार फिल्म ‘शमिताभ’ के अलावा कुछ ऐसा जानने का संकल्प ले उनसे मिलना हुआ एक पंचतारा होटल में । वहां  ‘शमिताभ’ से संबधित कुछ सवालों के बाद अपने असली मकसद पर आते हुये उनसे कहा सर आज आप के साथ आपसे उन पहलूओं पर चर्चा करना चाहता हूं जो अभी तक बाहर नहीं आ पायी या आप उसे बाहर आने नहीं देना चाहते । जैसे सोशल वर्क । उनकी सहमति बन जाने के बाद सवाल और जवाबों का जो दौर शुरू हुआ जो बिलकुल नया था।
सभी को पता है कि आप बरसों से पोलियो नामक बीमारी को दूर करने के लिये प्रयत्नशील हैं । आपका प्रयास कहां तक पहुंच पाया ?
हमारे लिये वाकई सबसे बड़ा कार्य पोलियो का था जिस पर हम और एक पूरी टीम आठ साल तक काम करती रही ।  लेकिन आज हम कह सकते है हमने शहर ही नहीं बल्कि अपने देश से पोलियो को नेस्तनाबूद कर दिया ।
ऐसा किस बिना पर कहा जा सकता हैं ?
ऐसा सिस्टम हैं कि तीन साल तक अगर पोलियो का कोई मरीज नहीं मिलता तो देश को पोलियो रहित घोषित कर दिया जाता है । हालांकि हम अभी तीन साल पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं  लेकिन  इस कार्य से मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं । इसका श्रेय हमें नहीं जाता, इसका श्रेय जाता है उन कार्यकर्ताओं को जिन्होंने गांव गांव कस्बों और न जाने कितनेे नदी नाले पहाडों को़ लांघ कर पोलियोग्रस्त बच्चों को दो बूंद जिन्दगी की दी ।

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क्या इसके अलावा भी कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा ?
बिलकुल ।यह काम करते हुये कितनी कार्यकर्ताओं को अनपढ़ लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ा । कुछ लोगों ने कहा ये बीमारी हमारे धर्म से जुड़ी है अगर हम कुछ करेंगेे तो हमारा आराध्य नाराज हो जायेगा । कुछ ने कहा यह तो जहर है । तो कुछ ने परपंराओं के तहत इसे गलत करार दिया।  जब आप पोलियो पर बनी डाकूमेंट्री देखेंगे तो आपको इन अंजान लोगों का सेवा भाव लिये कार्य देखने को मिलेगा । बाद में इन  कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत और सम्मानित किया गया जिन्होने इस असंभव से कार्य को पूरा करके ही दम लिया ।
आपने अपने सहयोग के बारे में नहीं बताया ?
हमारा सहयोग तो बस  इतना है कि हम सिर्फ प्रचार कर सकते हैं अपनी आवाज या पहचान के जरिये लोगों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं लेकिन उन सभी लोगों तक पहुंचने वाले यह लोग है इसलिये हम सारा श्रेय इन्हीं को देते हैं ।क्योंकि इस बीमारी से देश को मुक्त करने में इन्हीं का हाथ है ।
बेशक हम पोलियो मुक्त हो चुके है लेकिन आगे न होने के लिये क्या उपाय हो सकते हैं ?
खतरा तो हमेशा बना रहता है ।दरअसल हमारे पड़ोसीे देश जैसे पाकिस्तान, बांगला देश, नेपाल तथा श्रीलंका, ये सभी देश पोलियो से संघर्ष कर रहे हैं । इसलिये वहां से पोलियो के वायरस आज भी आ सकते हैं इसलिये आगे भी सावधानी जरूरी है।

सुना है आप मैडिकल से जुड़ी अन्य चीजों से भी जुड़े हुये हैं ?
जी हां हम टीबी के खिलाफ काम कर रहे हैं। इसके अलावा हिपोटाइटिस पर काम कर रहे है। डाइब्टीज पर भी काम हो रहा है। आपने  कीथ वाज का नाम सुना होगा जो ब्रिटिश पार्लियामेंट में एम पी हैं। उन्होंने डाइब्टीज के लिये लंदन में दो चैरिटी वैन चलायी जिनका उद्घाटन हमसे करवाया गया और उनमें से एक वैन का नाम अमिताभ रखा गया । इसके बाद यहां भी हमने इसी तरह की वैन गोवा और मुबंई में शुरू की । इसके बाद दिल्ली में भी शुरू करने का प्रोग्राम है ।

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टीबी और हिपाटाइटस के बारे में क्या बताना चाहेगें ?
हिपोटाइटस और टीबी मुझसे जुड़ी हुइ बीमारिया हैं इसीलिये  मैं इसकी तरफ आकर्षित हुआ। क्योंकि मैं भी टीबी से पीड़ित रहा हूं ।दस बारह साल पहले मुझे टीबी हो गई थी।  ये सब मैं इसलिये भी बता रहा हूं ,क्योंकि मुझे टीबी हो सकती है तो किसी को भी हो सकती है । हमें तो ईश्वर की दया से बहुत सारी सुविधायें भी हैं लेकिन जिन्हें ऐसी सुविधा नहीं है उन्हें टीबी होने का डर हमेशा रहता है। दूसरे मैं हिपोटाइटस ग्रस्त भी हूं । यह बीमारी मुझे उस वक्त लगी जब  फिल्म कुली के दौरान मुझे चोट लगी थी । उस दौरान मुझे अस्सी से लेकर सो बोतल तक खून चढ़ाया गया था उन्हीं में किसी ऐसे शक्श का खून भी शामिल था जिसे हिपोटाइटस था । उस वक्त इस बीमारी का पता लगाने का कोई जरिया नहीं था । इसलिये इस बीमारी का पता हमें दस साल पहले चला कि हमें हिपोटाइटस है जो तीस सालों के दौरान मेरे लीवर को करीब पिच्चहतर प्रतिशत खा चुका था । और अब मुझे सिर्फ पच्चीस प्रतिशत लीवर के साथ ही सर्वाइव करना है । ये सब बताने का हमारा तात्पर्य यही है कि अगर सही समय पर बीमारी का पता लगा लिया जाये तो आप आगे भी जिन्दा रह सकते हैं उसका सबसे बड़ा अदाहरण मैं हूं ।
सुना है फिल्म ‘इन्कलाब’दौरान भी आपका एक्सिडेन्ट हुआ था ?
इन्कलाब नहीं कोई और फिल्म थी । उस फिल्म के एक एॅक्शन सीन के दौरान बारूद से मेरा दांया हाथ उड़ गया था ।आप यकीन करें की मेरी कलाई के ऊपर बस एक मांस का लोथड़ा टिका हुआ था। जिसमें हथेली और उंगलियों तक का पता नहीं था। बाद में मुझे शर्ट  पेंट पहनने ओर टॉयलेट जाने तक किसी की सहायता की जरूरत होती थी । बाद में डॉक्टर धीरे धीरे मेरे शरीर के अन्य भागों से  मांस और खाल के टुकड़े मेरे हाथ पर जोड़ने लगे । और एक दिन दौबारा से मुझे मेरी कलाई  पर मेरा हाथ दिखाई देने लगा । ये सब बताने को मेरा एक मतलब ये भी है कि जब तक कोई चीज हमारे पासे होती है तो हमें उसकी जरा भी परवाह नहीं होती लेकिन जब वो आपसे छिन जाती है तो आपको  पता चलता है कि वह चीज आपके लिये कितनी महत्वपूर्ण थी । हमें तो हमारा हाथ दौबारा मिल गया लेकिन जिन्हें उनसे छिन चुका अंग नहीं मिल पाता तो उन पर क्या गुजरती होगी हमें उसका भली भांती एहसास है ।


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Mayapuri

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