किडनी डायलेसिस का ऐसा अस्पताल जहां बिल पेमेंट करने के लिए काउंटर ही नही है

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फ्री हॉस्पिटल
हमारे देश मे किडनी यानी गुर्दा- रोग एक बहुत बड़ी मुशीबत का रूप ले चुका है। किडनी- डायलेसिस के मरीजों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे जानकर रोंगटे खड़े हो सकते हैं। जिस किसी को इस रोग का ग्रहण लग जाता है, पूरी ज़िंदगी उसे इलाज से गुजरना पड़ सकता है।
एक आंकड़े के मुताबिक प्रति वर्ष देश मे 2 लाख मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है और करीब 3 से साढ़े 3 करोड़ लोग किडनी-डायलेसिस की प्रक्रिया से गुजरते हुए अस्पतालों के चक्कर काट रहे होते हैं। यह तो हुई बीमारी की बात, इलाज की बात भी सुन लीजिए। मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता ,
चेन्नई जैसे  बड़े महानगरों के बड़े अस्पतालों में एक मरीज को अगर सप्ताह में तीन बार डायलेसिस दिया जाता है तो इलाज का खर्च 50-60 हज़ार रुपये महीने तक जाता है। छोटे शहरों में यह इलाज खर्च कम हो सकता है मगर मरीज वहां न जाना ही बेहतर समझता है। इसी समस्या और समाधान की पहल को ध्यान में रखकर दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने किडनी और डायलेसिस के लिए एक सुपर मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाया है जो एकसाथ 100 मरीजों को उपचार दे सकता है। जहां दुनिया के बेस्ट हॉस्पिटल वाला ट्रीटमेंट मिलेगा। जहां एक भी पैसा पेमेंट नहीं देना होगा। जहां बिल पेमेंट करने के लिए काउंटर ही नहीं बनाया गया है।
*अस्पताल जहां बिलिंग-काउंटर नहीं है।
*किडनी अस्पताल की तरह क्या देश मे शिक्षण-संस्थान भी बनाए जा सकते हैं?
* गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने वो किया है जो सरकारें नहीं कर पाई।
                 जीहां, सुनने में आश्चर्य ज़रूर लग रहा होगा किन्तु यह कल्पना नहीं हकीकत है। दिल्ली के सिद्धार्थ नगर इलाके में गुरु हरिकिशन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर के नाम से  इस अत्यंत सुविधा युक्त अस्पताल का निर्माण गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने किया है। 100 बेड्स और 100 डायलेसिस-चेयर्स, जिनके साथ जर्मनी से आयी हुई डायलेसिस की मशीनों का पूरा सेट जुड़ा है; बनकर तैयार हो चुका है।डायलेसिस प्रक्रिया के दौरान संक्रमण बढ़ाने वाले मरीज (कोविड, एचआइवी,हेपेटाइटिस) को अलग रखकर ट्रीटमेंट करने के लिए सेपरेट फुल इक्वीपाइड कमरे भी हैं। 100 बेड्स के तैयार वार्ड्स को बाबा हरदेवसिंह जी के नाम पर रखा गया है। अकाली दल नेता, विधायक और गुरुद्वारा कमेटी के मनजिंदर सिंह सिरसा इस अभूतपूर्व अस्पताल के सूत्रधार हैं। जिनका कहना है कि इस अस्पताल का निर्माण 2019 में आरंभ हुआ था और 2020 में जब कोरोना के कारण सब बन्द था उनके लोगों ने – सिख, सरदार सेवादार, डॉक्टर्स और गुरुद्वारा को सहयोग देनेवालों लोगों ने किया है। इस अस्पताल में डॉक्टरों की पूरी एक समर्पित टीम है। श्री मनजिंदर सिंह सिरसा का कहना है कि इस अस्पताल को 1000 बेड्स तक का विस्तार दिए जाने पर काम चल रहा है। बताने वाली बात यह है कि भारत मे अबतक किडनी- डायलेसिस के लिए सबसे बड़ा 45 बेड्स तक का ही अस्पताल हैं जो बंगलुरु में है। अमेरिका में 1000 बेड्स तक का हॉस्पिटल है। अगर सब कुछ यथावत रहा तो बिना एक भी पैसा चार्ज किये इलाज देने वाला भारत का यह  पहला अस्पताल होगा।
                वैसे, सरकार की तरफ से भी इस तरह का अस्पताल बनाए जाने की योजनाएं तैयार हुई हैं ताकि डायलेसिस के मंहगे उपचार से लोगों को बचाया जा सके। 2016 में प्रधानमंत्री योजना के तहत और 2018 में दिल्ली सरकार ने इलाज के लिए रूपरेखा बनाई थी। दिल्ली सरकार की योजना में था कि सरकार 1274 रुपये डायलेसिस के उपचार के लिए देगी बाशर्ते मरीज की इनकम 3 लाख से कम हो और वह 3 साल से दिल्ली में रह रहा हो। गुरुद्वारा प्रबंधन के अस्पताल में ऐसी कोई शर्त नहीं है। मरीज कहीं का हो, कितने समय से हो, इनकम चाहे जो हो, उसकाआधार कार्ड, पैन कार्ड आदि कुछ नहीं पूछा जाएगा क्योंकि उससे कोई पेमेंट ही नही लिया जाना है। बल्कि लंगर खाने-पीने की सुविधा भी मिलेगी। यहां के डॉक्टर्स, मेडिकल स्टाफ, सेवादार सभी गुरुद्वारे वाले  निःस्वार्थ भाव से ही सेवा देंगे। अगली कड़ी में कमेटी बंगला साहब में वर्ड लेबल का डायगोनिस्टिक सेंटर बनाने जा रही है जहां MRI जैसा टेस्ट सिर्फ 50 रुपये में होगा जो अमूमन 8000 रुपये में हुआ करता है।किडनी अस्पताल

* करोड़ो कमाने वाले सितारे क्या ऐसा करने की सोच सकेंगे?

सचमुच किडनी पैशन्ट के लिए इस तरह के अस्पताल का बनाया जाना एक उपलब्धि है। जिसतरह गुरुद्वारा कमेटी ने इस परिकल्पना को अंजाम दिया है, देश के दूसरे लोगों के लिए एक उदाहरण है। देश मे बहुत से धनाढ्य हैं, करोड़ो कमाने वाले फिल्मी- सितारे हैं, अच्छा होता वे सभी ऐसा कार्य करने की दिशा में सोच पाते। मेडिकल के क्षेत्र की तरह ही हमारे देश मे शिक्षा- व्यवस्था में बहुत कुछ किए जाने की ज़रूरत है। महंगी पढ़ाई, महंगे स्कूल के चलते बच्चे पढ़ नही पाते। गरीब का मेधावी बच्चा महंगी पढ़ाई के चलते अच्छे स्कूल से मरहूम रह जाता है। डायलेसिस- अस्पताल का बनाया जाना एक उदाहरण है, एक ऐसी सोच है जो सबके मन को छू रही है। ऐसी ही सोच को लेकर काश कुछ और संस्थाएं तथा लोग आगे आएं। शिक्षा संस्थाओं पर भी काम  शुरू हो.. काश!

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Mayapuri

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