बेबी से प्रेमिका और अब मां तक – एक अजीब दास्तां है ये – अली पीटर जॉन

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6 साल की उम्र में श्रीदेवी ने लाखों लोगों के दिलों को जीता व श्री देवी भारतीय सिनेमा की क्वीन बन गईं। उन्होंने बोनी कपूर से शादी कर अपनी प्रसिद्धि, नाम को पीछे छोड़ दिया। इसके बाद श्रीदेवी ने 15 साल बाद फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ से बॉलीवुड में वापसी की। नई पीढ़ी जिन्होंने श्री देवी के बारे में सुना व टीवी पर देखा था, वह श्रीदेवी के काम का जादू देखना चाहते थे व इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उनकी वापसी से मुझे दुबारा उस समय को याद करने का अवसर मिला जिसका मैं चश्मदीद गवाह था।

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पहली बार मैंने श्रीदेवी को एक लोकप्रिय जगह चर्चगेट के टी सेंटर में देखा जहां एग्जीबिशन, मीटिंग्स, प्रेस शोज, प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ करता था। उस दिन फिल्म ‘सोलवां सावन’ की स्टारकास्ट के साथ प्रेस-मीटिंग थी। उस समय अमोल पालेकर फिल्म के मुख्य व्यक्ति थे। अमोल पालेकर को उस समय छोटी फिल्मों का सुपरस्टार कहा जाता था। अमोल पालेकर की हीरोइन एक नई अभिनेत्री थी। वह नई अभिनेत्री मंच तक जाने के लिए अनिच्छुक थी। साथ ही वह स्कूली छात्रा की तरह व्यवहार कर रही थी। उनसे जो भी करने को कहा जाता उसे वह बिल्कुल भी पसंद नहीं आता। आखिरकार, फिल्म के निर्देशक ने तेलुगु भाषा में उन्हें कुछ कहा तो वह अमोल के पास चली गई। अभिनेत्री ने कुछ समय के लिए बात करने के लिए मना कर दिया, डायरेक्टर ने फिर उनसे कुछ सवाल किये तो अभिनेत्री सिर्फ सिर हिलाकर हां या ना कर जवाब दे रही थी। साथ ही स्टेज पर बस उनके आंसू निकलने ही वाले थे कि वह स्टेज से जाने ही वाली थी कि डायरेक्टर ने उनका हाथ खींच व उन्हें सीट पर बैठाया। इसके बाद उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा, वो अभिनेत्री और कोई नहीं बल्कि श्रीदेवी थी। अमोल ने उनकी तारीफ की व उनका हौंसला बढ़ाया इस बात की प्रतिक्रिया उन्होंने किसी के सामने उजागर नहीं की।

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मुझे आज भी याद है उस समय अमोल पालेकर ने श्रीदेवी के बारे में कहा था कि ‘वह काफी प्रतिभाशाली हैं व नेचुरल अभिनेत्री हैं श्रीदेवी ने मेरी किसी फिल्म में काम नहीं किया। भले ही वो आपको डम्ब (बेवकूफ) लग सकती हैं। लेकिन जब उन्हें कैमरे के सामने मुश्किल से मुश्किल दृश्य को परफॉर्म करने को कहा जाता है वह उस दृश्य में जादू भर देती हैं। अगर उनकी शुरुआत इस तरह की है। तो मैं कह सकता हूं कि उनका भविष्य बहुत ही उज्जवल होगा और इसकी भी संभावना है कि वह भारत की बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक होंगी।‘

फिल्म रिलीज हुई व फिल्म को काफी सराहना मिली। इस नई अभिनेत्री श्रीदेवी को आलोचकों की तरफ से सराहना मिली, लेकिन फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई। इसके बाद श्रीदेवी ने तेलुगु फिल्मों मे वापसी की। जहां वह बेहतरीन अभिनेत्री बनी।

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इसके बाद 80 के दशक की बात है, साउथ के बहुत से फिल्ममेकर हिन्दी में फिल्में बनाने लगे। के.राघावेन्द्रा राव जिन्हें ‘साउथ का मनमोहन देसाई कहा जाता है’। उनका निर्माताओं के साथ एक कॉन्ट्रेक्ट था जिसमें यह साफ तौर पर था कि उनकी डिग्री बी.एससी की है तो उनके नाम के साथ उनकी डिग्री को भी सम्बोधित किया जाए। उन्होंने अपनी पहली हिन्दी फिल्म ‘हिम्मतवाला’ बनाई फिल्म के एक्टर थे जितेन्द्र, के.राघावेन्द्रा राव बी.एससी ने श्रीदेवी के साथ बहुत सी तेलुगु फिल्में बनाई। फिल्म की शूटिंग हैदराबाद में शुरू हुई। फिल्म के निर्माताओं ने श्रीदेवी को मिलवाने व शूटिंग को कवर करने के लिए मुम्बई से प्रेस के लोगों को बुलाया। मुम्बई से जर्नलिस्ट्स का एक समूह हैदराबाद के बंजारा होटल पहुंचा जहां हमारी काफी खातिरदारी की गई। उसी दिन हमें फिल्म के लोकेशन पर ले जाया गया। जहां श्रीदेवी स्वीमिंग कॉस्टयूम में दिखी, लेकिन जैसे ही उन्होंने हमें देखा वह वहां से अपने रूम में चली गई। दरअसल उन्हें इस बात का पता नहीं थी कि हम वहां आने वाले हैं। जब तक हम आसपास थे उन्होंने शूट करने से इन्कार कर दिया। निर्देशक एक बहुत शक्तिशाली व्यक्ति थे, उन्होंने वहा कुछ बड़े सितारों को भी बुलाया था। के.राघावेन्द्रा राव बी.एससी श्रीदेवी को रूम से बाहर लाने में सफल रहे व उन्होंने सभी जर्नलिस्ट्स से श्रीदेवी को मिलवाया।

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इसके बाद एक फोटोग्राफर ने स्वीमिंग कॉस्ट्यूम में श्रीदेवी की कुछ फोटोज क्लिक करने के लिए निर्देशक को कहा व उन्होंने फोटोज क्लिक की लेकिन श्रीदेवी ने साफ तौर पर इस बात से मना कर दिया कि उनकी ये फोटोज किसी भी मैगजीन व अखबार के लिए ना जाए। तब फोटोग्राफर ने खुद को हारा हुआ महसूस किया। उसी दिन डायरेक्टर एंड पब्लिसिस्ट ने एक इंटरव्यू का आयोजन किया। जर्नलिस्ट्स की उनके बारे मे प्रतिक्रियाएं यह थी कि ‘श्रीदेवी सभी जर्नलिस्ट्स के सवालों का जवाब हां व ना में दे रही थी व किसी गंभीर सवालों पर वह चुप हो जा रही थी।‘ तभी के.राघावेन्द्रा राव बी.एससी ने कहा कि वह हमें अंदर ले जाएंगे व मेरे सारे सवाल अनुवाद करके श्रीदेवी को बताएंगे व उनके जवाब मुझे बताएंगे। पहली बार सभी जर्नलिस्ट ने इस बात को मान लिया। सभी जर्नलिस्ट्स ने मुझे अंदर जाकर श्रीदेवी का इंटरव्यू लेने को कहा।

फिल्म ‘हिम्मतवाला’ रिलीज हुई व बड़ी हिट साबित हुई यहां तक कि फिल्म के एक्टर तक ने श्रीदेवी को इसका क्रेडिट दिया। इसके बाद मुझे दूसरी बार हैदराबाद जाने का मौका मिला तब भी मुझे वही श्रीदेवी देखने को मिली जो किसी से बात नहीं करती यहां तक कि प्रेस के लोगों से भी नहीं। फिल्म की शूटिंग के दौरान एक अलग सा दृश्य हुआ। श्रीदेवी राजमुंदरी में एक स्थान में शूटिंग कर रही थ। कि वहां यह देखने को मिला कि हजारों लोग जिनमें पुरूष, महिलाएं व बच्चे थे श्रीदेवी की एक झलक पाने के लिए रोड़ पर खड़े थे जहा से वह गुजरने वाली थी। श्रीदेवी गाड़ी से बाहर निकली व सभी लोंगो की तरफ हंसते हुए सबको ‘नमस्कार’ किया। उनके फैंस उनके लिए पागल हो गए। यह बात मुझे दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता व फिल्म के निर्माता डॉ. रामानायडू ने बतायी थी।

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श्रीदेवी ने मुंबई में छोटी फिल्में बनाना शुरू की जो कि बहुत कम निर्देशकों शेखर कपूर, सुभाष घई और यश चोपड़ा द्वारा नोटिस किया जाता था। स्वर्गीय यश चोपड़ा उन्हें बेहतरीन अभिनेत्री मानते थे व श्रीदेवी के बारे में उन्होंने यह भी कहा था कि वह एक तरह से स्विच ऑन व स्विच ऑफ वाली अभिनेत्री हैं, अगर आप उन्हें कुछ करने को कहते हैं तो वह कोई भी प्रतिक्रिया नहीं देती लेकिन कैमरे के सामने वह उस किरदार में आ जाती हैं। जिसके लिए आपने उन्हें बोला होता है, मैंने बहुत सी बेहतरीन अभिनेत्रियों के साथ काम किया है लेकिन श्रीदेवी जैसी कोई भी नहीं है।“

के.राघावेन्द्रा राव बी.एससी ने श्रीदेवी के साथ फिल्म ‘अप्सरा’ बनाई जो कि फ्लॉप साबित हुई। यही पर उनकी तेलुगु फिल्मों मे उनके करियर का अंत हो गया।

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श्रीदेवी की निजी जिंदगी में समस्याओं की शुरूआत हो गई। उसकी बहन श्रीलथा जो पूरी तरह श्रीदेवी पर निर्भर थी वह किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ भाग गई बिना उन्हें बताए। इसके बाद उनके पिता की मृत्यु हो गई व उनकी माता एक ऐसी बिमारी से लड़ रही थी जिसका इलाज भारत के डॉक्टरों के पास नहीं था। फिर बोनी कपूर ने श्रीदेवी का साथ दिया वह श्रीदेवी व उनकी माता को अमेरिका ले गए व किराए का मकान लिया जहां छः महीने तक श्रीदेवी की मां का इलाज हुआ। श्रीदेवी की माता की स्थिति खराब हुई व एक इमरजेंसी ऑपरेशन किया गया जिसमें श्रीदेवी की ओर से हॉस्पिटल के कागजात पर बोनी ने साइन किये। लेकिन ऑपरेशन सफल नहीं हो पाया। इस वजह से बोनी कपूर कोर्ट गए जहां वह केस जीत गए व उन्हें इसके लिए काफी बड़ी राशि मिली। लम्बे अरसे तक बोनी कपूर वहां रहे व श्रीदेवी से प्यार हो गया। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी मोना से तलाक लिया व श्रीदेवी से शादी कर ली। बोनी ने मोना व बच्चों को रहने के लिए अपना बंग्लो दे दिया व खुद बंग्लो के पास वाले अपार्टमेंट में रहने लगे। इस बारे में श्रीदेवी ने कहा कि ‘मैंने अपने अतीत को भुला दिया है क्योंकि मेरे पास श्रीमती बोनी कपूर की बच्चों की मां की भूमिका निभाने के अलावा किसी भी चीज का समय नहीं है।’ अर्जुन कपूर (मोना का बेटा) के बारे में श्रीदेवी कहती हैं कि ‘मैं बहुत खुश हूं अर्जुन के लिए आखिरकार वह मेरा बेटा है।‘ उनका यह बयान उन लोगों के बयान की तुलना में अधिक शक्तिशाली है जो लोग उन पर आरोप लगाया करते थे।

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फिल्म ‘इंग्लिश-विंग्लिश’ से श्रीदेवी ने बॉलीवुड में वापसी की इस फिल्म से उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह केवल खूबसूरत ही नहीं बल्कि वह एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री के रुप में और अधिक परिपक्व हुई। एक और ब्रेक के बाद, अब वह फिल्म ‘मां’ से एक बार फिर आसमान के सितारों की तरह चमकने को तैयार है। इस फिल्म में वह एक सौतेली मां का किरदार निभा रही हैं। इस फिल्म में उनके साथ बॉलीवुड के बेहतरीन एक्टर्स नवाजुद्दीन सिद्दीकी और अक्षय खन्ना भी नजर आएंगे। फिल्म के निर्माता बोनी कपूर हैं जो श्रीदेवी की दूसरी वापसी को पहली वापसी की तुलना में बेहतर बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

‘कौन मनोज कुमार’?

सन् 2000 में श्रीदेवी भारतीय अभिनेत्रियों में शुमार तब वह बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक मानी जाती थी। वह मुंबई की बड़ी अभिनेत्रियों से भी ज्यादा प्रसिद्ध हुई उस समय मुंबई व हैदराबाद के फिल्म निर्माताओं के बीच एक संघर्ष था। लेकिन श्रीदेवी ने हिन्दी फिल्मों में काम करना सही समझा क्योंकि भारतीय स्तर पर इसमें पैसे लोकप्रियता उच्च स्तर पर थी। मुम्बई के बहुत से फिल्ममेकर्स श्रीदेवी के साथ काम करना चाहते थे, मनोज कुमार भी श्रीदेवी के साथ काम करना चाहते थे लेकिन उन्हें अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए कोई जरिया नहीं मिल रहा था। मनोज कुमार को एक व्यक्ति मिले जिन्होंने बतौर पीआरओ उनकी मदद की और वो व्यक्ति थे स्वर्गीय गोपाल पांडे। श्रीदेवी महबूब स्टूडियो में फिल्म ‘चांदनी’ की शूटिंग कर रही थी। तभी उनके पास गोपाल पांडे गए व उन्होंने श्रीदेवी से कहा कि मनोज कुमार की इच्छा है कि वह आपके साथ काम करें। श्रीदेवी ने गोपाल पांडे की तरफ देख कर कहा कि ‘कौन मनोज कुमार’ उस समय श्रीदेवी यश चोपड़ा, शेखर कपूर और बोनी कपूर जैसे कुछ ही फिल्म मेकर्स को जानती थी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध फिल्मेकर मनोज कुमार उस समय श्रीदेवी के लिए बिल्कुल भी मायने नहीं रखते थे।


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Mayapuri

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