स्टार प्लस और अमिताभ बच्चन ने एक उचित सवाल उठाया है, आख़िर ये क़ुसूर किसका है ?

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भारत महिलाओं  के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न जैसे घृणित अपराधों पर बातचीत करने के लिए आख़िरकार जाग रहा है. स्टार प्लस के ‘विक्टिम  शेमिंगपर नवीनतम अभियान में श्री अमिताभ बच्चन जी सभी परिवारों,अधिकारियों और नागरिकों से यौन उत्पीड़न के पीड़ितों के प्रति अपने व्यवहार और सहिष्णुता को एक नई दिशा देने का आग्रह करते हैं। हम सब ने यौन उत्पीड़न के अपराधी की बजाय पीड़ित पर ही उंगली उठाकर उन्हें ही दोषी ठहराकर और सम्मानविहीन कर उन्हें निराश किया है। स्टार प्लस द्वारा लोकसेवा जागरूकता की पहल में, श्री अमिताभ बच्चन जी पीड़ितों की चरित्रहत्या करने वाले इन दोषी व्यक्तियों से यही सवाल करते हैं, किआख़िर ये क़ुसूर किसका है ?”

 इस अभियान ने इस विषय पर छाई चुप्पी को तोड़ते हुए हमें  यह विचार करने पर मजबूर किया है कि क्या हम वास्तव में पीड़िता के लिए एक सशक्त आधारस्तम्भ हैं या फिर इस घटना के पश्चात भी पीड़िता को चोट पहुँचाने वाले अपराध के सहभागी हैं? ये अभियान इस बात की हिमायत करता है कि हमें पीड़ितों को शर्मिंदा करने की बजाय अपराधबोध को उसकी सही जगह अर्थात अपराधी के सिर मढ़कर अपराधी को सज़ा देनी चाहिए।  

श्री बच्चन जी कहते हैं, “‘यदि कोई महिला यौनउत्पीड़न का शिकार होती है, तो वह अपनी प्रतिष्ठा खो बैठती है…’,

यह विचार  हमारी संस्कृतिसंबंधी मानसिकता पर बहुत गहराई तक अंकित है। पीड़िता की बजाय शर्मिंदगी को इस जुर्म के अपराधियों पर ठहराना चाहिए। आवश्यकता है कि हम पीड़ितों के लिए एक ऐसे सुरक्षित माहौल को प्रोत्साहन दें, जहाँ पीड़ित बेझिझक आश्रय की उम्मीद कर सकें, विशेषकर उन लोगों से जिनसे उन्हें सुरक्षा मिलने की आशा है, जैसे कि अधिकारी वर्ग, परिवार और समाज। यह अत्यंत आवश्यक है कि हम इस दिशा में क़दम बढाएँ और कहानियों के माध्यम से इस विषय पर चर्चा करें, ताकि लोगों की मानसिकता में इस परिवर्तन कि शुरुवात हो सकेऔरक्या क़ुसूर है अमला काइसी दिशा में स्टार प्लस का एक प्रयास है।

एक दीपस्तम्भ समान ब्रांड स्टार प्लस का हमेशा से ही ऐसी कहानियाँ सुनाने का प्रयास रहा है, जो परिवर्तन को प्रेरित करती हैं और ऐसी प्रत्येक पहल महिलाओं की उन्नति को ध्यान में रखते हुए भी की जाती है। इस विशेष पहल के विषय में बात करते हुए श्री नारायण सुन्दररमन कहते हैं,

 क्या क़ुसूर है अमला का?” कहानी है तमाम बाधाओं के विरुद्ध एक औरत की न्याय की खोज में अदम्य साहस, हिम्मत और अकल्पनीय शक्ति की  । यह कहानी सिर्फ़ अमला की नहीं बल्कि हर उस औरत  का प्रतिनिधित्व है, जो कि डर में जीती हैवह ख़ुद को सुरक्षित रखने के लिए अपने हर क़दम को प्रतिबंधित करती है और इस प्रकार अपराधी को अधिकार सौंपती है कि अपराधी उसके जीवन को अपनी शर्तों पर नियंत्रित कर सके। समाज के इन नरपिशाचों को पराजित करने का अमला का यह कठिन संघर्ष और सभी बाधाओं के बावजूद उसका पीछे न हटना दर्शकों को ठहर कर यह चिंतन और विचार करने पर विवश करेगा किक्या क़ुसूर है अमला का?”

 स्टार प्लस दोपहर पर इस कहानी के माध्यम से हम दर्शकों और समस्त समाज  को पीड़िता के ज़ख्म के प्रति संवेदनशील बनाना चाहते हैं। टेलीविज़न मेंअर्थपूर्ण बदलाव को प्रोत्साहित करने की शक्ति है और बतौर एक चैनल हम चाहते हैं कि अमला की प्रेरणादायक कहानी हमारे मंच के ज़रिये ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचे।

 हमने एक NGO – ‘जन साहस सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी‘- के साथ सहयोग किया है, जो सन 2000 से  यौनउत्पीड़न का शिकार हुई  महिलाओं को सहायता प्रदान करने वाली एक संस्था है। पीड़ित महिलाऐं इनसे सहायता हेतु टोल फ़्री हेल्पलाइन  180030002852 पर संपर्क कर सकती हैं.

 टेलीविज़न पर पहली बार, स्टार प्लस यह साहसी कथा  ‘क्या क़ुसूर है अमला का?’ दोपहर के कार्यक्रमों के अंतर्गत 12.30 बजे प्रसारित कर रहा है। ये शो प्रशंसनीय अंतर्राष्ट्रीय तुर्की श्रृंखला फ़ातमागुल का आधिकारिक रूपांतरण है जिसका भारतीय सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर पुनर्निर्माण किया गया है। ये  शो अमला को एक सारयुक्त महिला और न्याय के लिए लड़ने की आस्था रखने वाली    उत्तरजीविता के रूप में चित्रित करता हैजो लोगों के मन के दानवों को पराजित करती है और उसकी कहानी के माध्यम से इस बात को सुदृढ़ बनाती है कि शर्म का  सही स्थान बलात्कार करने वाले पर होना चाहिए न कि यौन उत्पीड़न की पीड़िता पर। ‘


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Mayapuri

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