मुझे उनका यह इग्नोरेंस बहुत प्यारा लगता है- सुचित्रा कृष्णमूर्ति

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चर्चित फिल्म ’रॉ’ (रोमियो अकबर वाल्टर)’ में खूबसूरत टैलेंटेड एक्ट्रेस सिंगर सुचित्रा कृष्णमूर्ति को देखकर उनके चाहने वालों को जरूर आनंद आ जाएगा जो अक्सर उनसे यह शिकायत करते रहते हैं कि वे कम फिल्में साइन करती है। सुचित्रा बहुत छोटी उम्र में, स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही अभिनय जगत से जुड़ी थी और टीवी सीरियल ’चुनौती’ में अपने अभिनय और टीनेज खूबसूरती का जादू जगाने के बाद 90 के दशक में चोटी की मॉडल बनने के साथ साथ शाहरुख खान के साथ अपनी पहली हिट फिल्म, ’कभी हां कभी ना’ में बॉलीवुड की फ्रेश नायिका के तौर पर उन्होंने काफी संभावनाएं जगाई। वे एक बेहद प्रतिभाशाली गायिका भी है और अपने कई पॉपुलर एल्बम जैसे ’डोले डोले’, ’दम तारा’, ’अहा’, ’जिंदगी’ से उन्होंने उन दिनों धमाल मचा दिया था। लेकिन बेहद कम उम्र में विवाह करने के कारण उनके कैरियर पर कुछ समय के लिए विराम सा लग गया। वापस अपने कर्मस्थल में लौटते ही वे फिर से अभिनय, लेखन, कविताओं, संगीत, में व्यस्त हो गयी। इन दिनों अपनी नवीनतम फ़िल्म ’रॉ’ को लेकर उनकी काफी चर्चा हो रही है जिस के सिलसिले में मेरी उनसे डिजिटल मिडिया के इस जमाने में काफी बातचीत हुई, ईमेल इंटरव्यू के ज़रिये।

 फ़िल्म ’रॉ (रोमियो अकबर वाल्टर) में आपकी भूमिका क्या है?

-’रॉ’ में मेरा  कैमियो रोल है, मैं रेहाना की भूमिका प्ले कर रही हूँ जो इंडिया के एक लीडिंग अखबार की सम्पादिका है। वो हमेशा शिफॉन और पर्ल्स में अप टू डेट रहती है लेकिन उसका दिल स्टील की तरह मजबूत है। लौह पुरुष की तरह आप उसे लेडी विथ अ माइंड ऑफ़ स्टील कह सकते हैं।

आप काफी समय से बॉलीवुड में सक्रिय हैं, लेकिन जब भी आपकी कोई नई फ़िल्म रिलीज़ होती है तो लोग उसे आपकी कम बैक फ़िल्म कहतें हैं, इससे आपको कोफ़्त नहीं होती ?

– नहीं, मैं बिल्कुल इरिटेटेड फील नहीं करती, बल्कि मुझे तो उनका यह इग्नोरेंस बहुत प्यारा लगता है। वे सब चाहते हैं कि मैं उन्हें बड़े पर्दे पर ज्यादा नजर आऊँ, तभी ऐसा कहते हैं। यही दर्शाता है कि सब लोग मुझे बड़े पर्दे पर कितना मिस कर रहे थे।

 ’रॉ’ के टीम के साथ काम करने का अनुभव आपका कैसा रहा?

– ’रॉ’ टीम बेहद वंडरफुली प्रोफेशनल थे और सब कुछ क्लॉकवर्क की तरह सटीक रहा। यह फिल्म एक हाईली कम्प्लिकेटेड फिल्म है जिसे सेंसटिव लोकेशन में, स्पेशल प्रोटेक्शन वगैरह के तहत शूट किया गया और इसमें यह टीम एकदम एफिशिएंट और सफल रही। इस टीम में से कई सदस्यों को मैं अपने एडवरटाइजिंग के दिनों से जानती पहचानती थी, इसलिए भी मुझे काफी कंफर्टेबल लगा और सब ने मेरा पूरा ख्याल रखा। उन्हीं दिनों, जब शूटिंग चल रही थी तो मेरी बहन का निधन हो गया था। उनकी अंतिम क्रिया होने के अगले दिन मेरी शूटिंग थी। मैं तन मन से पूरी तरह टूटी और थकी हुई थी लेकिन पूरी यूनिट ने बेहद सेन्सिटिव तरीके से स्थिति को हैंडल किया और इस बात का पूरा ख्याल रखा कि मुझे शूटिंग के दौरान कंफर्ट में रखा जाए साथ ही मेरे दृश्यों की शूटिंग भी जल्द खत्म की गई और हां, मेरे ज्यादातर दृश्य जैकी श्रॉफ के साथ होने से मुझे वैसे भी कोई तकलीफ नहीं हुई क्योंकि यह सभी जानते हैं कि जैकी श्रॉफ फिल्म जगत के फाइनेस्ट जेंटलमैन हैं।

 इस फिल्म के डायरेक्टर रॉबी के बारे में आप क्या कहेंगी?

– रॉबी एडवरटाइजिंग बैकग्राउंड से होने के कारण बेहद डिटेल्ड तथा फोकस्ड है। उन्हें पता है कि उन्हें क्या चाहिए, वे अपनी फिल्म की कहानी और उसके किरदारों को अंदर बाहर से समझते जानते हैं। इस वजह से कलाकारों को बहुत आसानी हो जाती है। उनके डायरेक्शन में काम करते हुए मुझे बहुत आनंद आया।

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 आपके अनुसार फ़िल्म ’रॉ’ की हाईलाइट क्या है?

– निसंदेह फिल्म की कहानी इसकी हाईलाइट है। यह एक सच्ची कहानी है जो कि सत्य घटनाओं पर आधारित है, जो वाकई आप सबको आश्चर्य में डाल देगा। मैं शुरू से ही जॉन का, उनकी फिल्मों के विषय वस्तु के चुनाव को ऐडमायर करती रही हूँ। यह फिल्म शायद उनका सबसे बेस्ट फिल्म होगी।

 सुचित्रा आप एक बेहतरीन एक्ट्रेस है, क्या कभी आपको ऐसा लगा कि बॉलीवुड में आपको आपका हक नहीं मिला?

– बेहतरीन एक्ट्रेस कहने के लिए धन्यवाद। मुझे एक्टिंग से प्यार तो है लेकिन मुझे कभी भी इस क्षेत्र में सबसे अव्वल होने या सबसे सफल बनने की उच्च आकांक्षा नहीं रही। इस हिसाब से मैं सही मायने में दिल से एक कलाकार हूँ। मैं वही करना पसंद करती हूं जो मैं एंजॉय करती हूं। दरअसल क्रिएशन तथा परफॉर्मेंस का जो प्रोसेस है, मुझे वही ज्यादा आकर्षित करती है और मैं उसे ही ज्यादा इंजॉय करती हूं। चकाचौंध से दूर ही रहना मुझे अच्छा लगता है। इसके अलावा मैंने अपनी बेटी कावेरी की परवरिश करते हुए जो आनंद पाया उसे मैं दुनिया की किसी भी चीज या किसी भी सफलता, किसी भी आनंद से बढ़कर मानती हूं। अब जल्दी ही कावेरी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के लिए अमेरिका जा रही है। इतने वर्षों की व्यस्तता के बाद अचानक जैसे मेरे हाथों में काफी फुर्सत के क्षण आने वाले हैं, इसलिए मैं फिर से अभिनय और सिंगिंग को पूरा वक्त देना चाहती हूँ।

आप एक राइटर भी हैं, पेंटर भी हैं और गायिका भी हैं, इन पर काम करते हुए आपको कैसा लगता है?

– मुझे इन सब पर काम करना बहुत अच्छा लगता है। ये सब मेरे वज़ूद के अभिन्न अंग है, ये मेरे शरीर के हिस्से हैं जैसे मेरे हाथ, मेरे पाँव, मेरे गर्दन। मैं इन्हें एक दूसरे से अलग ही नहीं कर सकती। सच कहूँ तो मेरी रगों में ये सारे एक दूसरे से घुले मिले हैं।

 आपको अपनी ज़िन्दगी से कोई शिकायत है?

– है, कुछ शिकायतें अपने आपसे है। मैंने कई बार क्रोध में आकर कई अपनों से उल्टी सीधी बातें कही जिन्हें मैं प्यार करती हूँ। सॉरी कह देने भर से भरपाई नहीं होती। और किसी बात का मलाल नहीं है।

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 ’रॉ’ के अलावा आपकी अन्य आने वाली फिल्में ?

– मैंने जैकी श्रॉफ के साथ एक बहुत ही खूबसूरत शॉर्ट फिल्म, ’काश’ की है, वह भी जल्द ही रिलीज होने वाली है।

 अपनी कैंडल लाइट कम्पनी के बारे में कुछ बताईये?

– ओह, मैंने अपनी जिंदगी के तीन वर्ष इस पर लगाएं क्योंकि यह मेरा पैशन था, लेकिन बिजनेस के मामले में मैं बिल्कुल अनाड़ी हूं इसलिए मुझे जबर्दस्त नुकसान हुआ। अब मैं अपने प्रोडक्ट्स को अमेज़ॉन में सेल करती हूं।

 क्या आप मायापुरी पढ़ती है?

– जी हां, बिल्कुल। मैंने मायापुरी बहुत बार पढ़ी है। वाकई  यह एक बहुत ही वंडरफुल, पॉपुलर और सबसे पुरानी सफल हिंदी फिल्म पत्रिका है।

 मायापुरी के पाठकों को आप कुछ कहना चाहती हैं?

– हां , मैं मायापुरी के पाठकों के जरिए सबको यह कहना चाहती हूं कि आप सब लोग, फिल्म ’रॉ’ को जरूर देखें। आपको सचमुच बहुत आनंद आएगा साथ ही, मुझे इतने सालों से अपना भरपूर प्यार देने के लिये आप सबको तहे दिल से शुक्रिया कहती हूँ।

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