वक्त वक्त की बात है – सुलक्षणा पंडित

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045-11 Sulakshana Pandit

 

मायापुरी अंक 45,1975

नई हीरोइनों में सुलक्षणा पंडित आज की व्यस्त हीरोइन हैं। पिछले एक सप्ताह से मेरे और सुलक्षणा के बीच टेलीफोन पर इंटरव्यू के लिए वक्त तय करने का सिलसिला चल रहा था। कभी सुलक्षणा को फोन किया जाता तो मालूम होता कि वह घर पर नहीं हैं। पूछा जाता, कहां हैं? जवाब मिलता शूटिंग कर रही हैं।

“किस फिल्म की?

“पता नही” कब लौटेंगी?

“पता नही”

इस पता नहीं! पता नहीं! की रट ने मुझे सुलक्षणा से घृणा करने पर मजबूर कर दिया। और तंग आकर फोन करने बंद कर दिये। ऐसे में एक दिन रूप तारा स्टूडियो पहुंचने पर मालूम हुआ कि सुलक्षणा ‘संकोच’ फिल्म की शूटिंग कर रही हैं। और मैं न चाहते हुए भी उनके मैकअप रूम की ओर खिंची चली गई।

मेरे सामने गोरे बदन पर काले रंग का सुंदर लिबास और सफेद मोतियों की माला पहने सुलक्षणा बैठीं थी। औपचारिक बातचीत हुई शिकायतें और क्षमा याचना का दौर चला।

अगर फुर्सत हो तो इंटरव्यू शुरू करूं? मैंने पिछली कड़वाहट को दूर करते हुए कहा।

आप कैसी बातें करती हैं। पूछिये ना ! यह तो हमारी खुशनसीबी है। सुलक्षणा ने नम्रता का प्रदर्शन करते हुए कहा।

आपके बारेमें सुनते हैं कि आपकी महत्वकांक्षा तो प्लेबैक सिंगर बनने की थी, हीरोइन कैसे बन गईं?

हमारी फिल्म इंडस्ट्री बड़ी अजीबो-गरीब है। यहां आदमी बनने कुछ आता है और उसे फिल्मकार कुछ का कुछ बना देते हैं। सुर, संगीत गायन मेरा शौक नहीं, जिंदगी है। दूसरे शब्दों में तपस्या या पूजा कह लीजिए इसीलिए मैंने क्लासिकल संगीत और गायन में ‘विशारद’ किया है। दरअसल मुझे गाने का शौक बचपन से था। पिताजी (प्रताप नारायण पंडित) रेडियो स्टेशन पर डायरेक्टर थे। उन्हीं से मुझे प्रोतसाहन मिला और इस कला का विकास हुआ। किंतु किस्मत में हीरोइन बनना लिखा था सो प्लेबैक सिंगर (पार्श्व गायिका) न बन सकी। यह अकेले मेरे साथ ही नहीं बहुतों के साथ हुआ है। संगीतकार मदन मोहन जी हीरो बनने आये थे संगीतकार बन गए। राज खोसला जो सिंगर बनने आए थे निर्देशक बन गए। संगीतकार रवि जी सिंगर बनने आए थे संगीतकार बन गए। दरअसल आदमी सबसे जीत सकता है किंतु किस्मत से नहीं। आशावादी सुलक्षणा ने बताया।

बतौर हीरोइन के आपने कौन –सी फिल्में साइन की थी? और कौन-सी फिल्म पहले रिलीज होंगी?

हीरोइन के तौर से सबसे पहले हेमंत कुमार जी की फिल्म साइन की थी जिसमें राजेश खन्ना हीरो थे। किंतु वह बन ना सकी उसके बाद ‘सांझ के बाद सवेरा’साइन की वह भी किन्ही कारणों से पूरी नहीं हो सकी। नये सिरे से हीरोइन बनाने वाले शम्मी कपूर हैं। जिन्होंने ‘बंडल बाज’ में राजेश खन्ना के साथ ब्रेक दिया है। वही फिल्म सबसे पहले रिलीज़ होगी। क्योंकि यह बात हमारे अनुबंध में शामिल है। सुलक्षणा ने बताया।

हीरोइन बनने से पूर्व आपके ‘संकल्प’ और ‘दूर का राही’ के गीत काफी लोकप्रिय हुए थे। फिर क्या कारण है कि आपको गायिका के रूप में सफलता नही मिल सकी?

यह एक लम्बी कहानी है। डरती हूं कि वह कहानी सुनाने बैठ गई तो मुंह से कहीं कड़वी बात न निकल जाए। दरअसल यहां के लोग बड़े स्वार्थी हैं। जब वह अपनी जगह बना लेते हैं तो किसी दूसरे को घुसने का अवसर नही देते। वे लोग ग्रुपबन्दी के कारण अपनी हर जायज़ और नाजायज़ बात मनवाने की जिद करते हैं। सुलक्षणा ने साकोश कहा।

बतौर सिंगर आपने किन फिल्मों में गाने दिये हैं?

सबसे पहले ‘तकदीर’ में लता मंगेशकर के साथ ‘पप्पा जल्दी आ जाना’ गाना गाया। फिर बचपन में मुहम्मद रफ़ी के साथ ‘आया रे खिलौने वाला आया’ गाना गाया। ‘संकल्प’ के गीत ‘तू ही किनारा के लिए सुर सिंगर संसद का मियां तान सेन’ अवार्ड मिला है जिससे मेरी गायकी को प्रोत्साहन मिला है। अब तक नूतन, मौसमी चटर्जी आदि के लिए प्लेबैक दे चुकी हूं। और आशा है शीघ्र औरों को भी अपनी आवाज़ दूंगी क्योंकि गाना हीं मेरी पहली तमन्ना है और अभिनय, वो तो लादा गया है। सुलक्षणा ने कहा।

पिछले छ: सात वर्षो में जो नये चेहरे हिंदी जगत में आये, उनमें अधिकतर लोग आया राम गयाराम से अधिक कुछ प्रदर्शन न दिखा सके। इसका क्या कारण है?

पुराने कलाकारों के आजतक लोकप्रिय रहने और अपनी इमेज बनाए रखने का मात्र कारण यह है कि वह अपने काम के प्रति ईमानदार रहे हैं। इसीलिए उनकी फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद भी उनके क्रेज पर कोई असर नही पड़ता। और नये लोग पैसा कमाने आते हैं आर्ट, की सेवा करने नहीं इसीलिए वह अधिक समय तक टिक नहीं पाते और फिल्मों के पिटते ही फ्लॉप हो जाते हैं सुलक्षणा ने दो टूक जवाब देते हुए कहा।

अभी आपने कहा कि आप लोग पैसे कमाने के लालच में फिल्मों में आते हैं। यही कारण है कि एक फिल्म के हिट होते ही वह लाखों रुपये मांगने लगते हैं। क्या आपको दौलत और शोहरत का लालच फिल्मों में लाया है?

शोहरत और दौलत का लालच स्वाभाविक है किंतु मैं सच कहती हूं कि मुझे बेहिसाब दौलत का लालच फिल्मों में नहीं लाया। मैं तो शुरू से गाने के लिए पागल थी और आज भी हूं सुलक्षणा ने कहा।

क्या आपने किसी फिल्म में अपने गाने आपने खुद भी गाये हैं?

शशिकपूर के साथ मेरी फिल्म ‘सलाखें’ हैं। उसका एक गाना मैंने गाया है। वह मुझ पर ही पिक्चराइज़ किया गया है। बस वक्त वक्त की बात है। कल हमारी आवाज़ नहीं चलती थी, अभिनय के साथ आवाज भी चल निकली है। सुलक्षणा ने बताया।

जब आप कोई फिल्म बतौर हीरोइन साइन करती हैं तो उसमें अपने गाने स्वयं गाने की शर्त क्यों नहीं डाल दिया करती?

फिल्म ‘राजा’ के अनुबंध में यह शर्त थी कि अगर निर्देशक राजी हुआ तो मैं अपने आप गा सकूंगी। लेकिन इसके बावजूद एक दिन मुझे पता चला कि दो दिन बाद ‘राजा’ का गाना लता जी की आवाज़ में रिकॉर्ड हो रहा है। मैं लता जी से जाकर मिली। उन्होंने कहा कि वह मेरे करियर के बीच नहीं आएंगी इसके बाद संगीतकार और निर्देशक से मिली किंतु सबने एक दूसरे पर बात टाल दी कि अगर फलां राजी हो जायें तो ही गाने का अवसर दिया जा सकता है। और इस तरह ‘राजा’ का चांस निकल गया जिसकी वजह से ‘बंडल बाज’ में भी गाना नहीं मिला। क्योंकि शम्मी जी ने कहा था कि यदि ‘राजा’ में गाना गया तो मैं ‘बंडलबाज’ में भी गाने का चांस दूंगा जिस दिन ‘राजा’ के लिए लता जी का गाना रिकॉर्ड हुआ तो मैं समंदर के किनारे खड़ी होकर खूब रोईं। गाने के लिए ही मैंने अपनी पढ़ाई भेंट चढ़ा दी। मुझे लगा कि इससे तो मैं आत्महत्या कर लूं तो अच्छा है। मेरी मां आज भी मुझे हीरोइन से अधिक प्लेबैक सिंगर के रूप में ही देखना चाहती है सुलक्षणा ने निराशा भरे स्वर में कहा।

इसके लिए आप अपने नायकों से सहायता क्यों नहीं लेती

यह मुझसे भूल हो गई। चिंटू को जब पता चला तो उन्होंने कहा कि इतने सारे आदमियों के पास जाने की बजाए सीधे मेरे पास आना था।

सुलक्षणा ने बताया।

उन्हें आपके गाने पर आपत्ति क्यों है?

वह लोग कहते हैं कि मैं हीरोइन हूं इसलिए केवल अभिनय पर ही ध्यान दूं लेकिन मुझे कोई बताये कि मैं डांसर नहीं हूं तो मुझे डांस करने को क्यों कहा जाता है?‘सलाखें’ में डांसर की भूमिका कर रही हूं उसके लिए उन्हें हेमा पद्मा, आदि को साइन करना चाहिए था। लेकिन मैं इस पर भी निराश नहीं हूं। मैं ‘बंडलबाज’ के प्रदर्शन का इंतज़ार कर रही हूं। उसके हिट होने के बाद मैं अपनी शर्त मनवाकर ही दम लूंगी।

सुलक्षणा ने कहा।

उस वक्त तक सैट से दो बार बुलावा आ चुका था। हमारा काम भी पूरा हो गया था। इसलिए मैंने सुलक्षणा से आज्ञा ली और अगली मंजिल की ओर कदम बढ़ा दिये।


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Mayapuri

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