सुलेना मजुमदार

1 min


मेरे पिता श्री एच. पी मजुमदार, कानपुर के हिन्दुस्तान एअटोनॉटिक्स लिमिटेड (एच ए एल) में बतौर ट्रेनिंग ऑफिसर कार्यरत थे और मेरा जन्म कानपुर में ही हुआ। वहीं के कॉन्वेन्ट स्कूल में मैं एस.एस.सी. पूरी होते ही पन्द्रह वर्ष की उम्र में, पापा के जॉब ट्रान्सफर होने की वजह से पूरे परिवार के साथ मुंबई शिफ्त हो गयी। मुंबई में मेरे पिता जी के मित्र श्री पन्नालाल व्यास जी (अब स्व.) रहते थे जो कि मायापुरी पत्रिका के बेहद प्रिय सीनियर लेखक तथा मेरे लेखन गुरु भी थे। उनके तथा मेरे पिता माता के प्रोत्साहन से मैंने आठ वर्ष की उम्र से ही बाल कवितायें, बाल कहानियां, लेख, निबंध लिखना शुरू किया जो उन दिनों अक्सर सुप्रसिद्ध बाल पत्रिकायें जैसे लोटपोट, पराग नंदन में छपने लगी थी। 1987 से मैं मायापुरी में खुद, स्वतन्त्र रुप से लिखने लगी और साथ ही एस.एन.डी.टी यूनिवर्सिटी (मुंबई सान्ताकुज) में आगे की पढ़ायी जारी रखी। वर्ष 1992 में साहित्य लेकर ग्रैजएट हो गये जाने के बाद तो मैं पूरी तरह तरह फुल फ्लेज्ड पत्रकारिता में रम गयी और तब से आजतक निरंतर मायापुरी में लिख रही हूं मायापुरी में मेरे लेख फिल्म सितारों से जुड़े होते है। और भविष्य में भी मेरा सहयोग मायापुरी के साथ बना रहेगा।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये