मूवी रिव्यू: अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते सलमान फिल्म ‘सुल्तान’ में

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रेटिंग****

बॉलीवुड में सलमान खान को रीयल स्टार इसीलिये कहा जाता है क्योंकि उनके प्रशंसक उन्हें हर रूप में पसंद करते हैं। लिहाजा इस बार भी वे एक पहलवान और प्रेमी के तौर पर अपने फैंस को खुश करने में पूरी तरह कामयाब हैं। इसीलिये अली अब्बास जफर द्धारा लिखित व निर्देशित फिल्म ‘सुल्तान’ हर तरह से दर्शकों का मनोरजंन करने में पूरी तरह से कामयाब है।

कहानी

हरियाणा के रिवाड़ी जिले के बरोली गांव में सुल्तान अली खान नामक एक अलमस्त बेफिक्र ऐसा बंदा है जो मस्ती करने और पतंग लूटने में अपना वक्त बिताता है। अचानक उसकी मुलाकात उसी गांव में अखाड़ा चलाने वाले की रैसलर पढ़ी लिखी बेटी आरफा से होती है जिसे देखते ही वो उसे अपना दिल दे बैठता है लेकिन आरफा उस जैसे गंवार को भाव नहीं देती और एक दिन ऐसा भी आता हैं जब वो उसके दोस्तों के सामने उसकी बेइज्जती करते हुये कहती है कि ऐसे बनो जिससे वह उसकी इज्ज्त करने लगे। बस यंहा से सुल्तान पूरी तरह बदल जाता है। पहले वह स्टेट लेबल पर विजेता पहलवान बन कर उभरता है उसके बाद एशिया और फिर विश्व चैम्पियन तक सफर पूरा करता है। इस बीच आरफा उससे निकाह कर लेती है लेकिन अब उसे सुल्तान में गुरूर का एहसास होने लगता है। बाद में अपनी महत्वाकांक्षा के चलते सुल्तान को ऐसा कुछ गंवाना पड़ जाता है जिसके बाद वो पहलवानी छोड़ देता है। इसके बाद जिन्दगी उसे एक और मौका देती है जो उसे वो सब कुछ वापस दिलवा देती हैं जो उससे छिन गया था।

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निर्देशन

अली अब्बास जफर ने ‘सुल्तान’ के रूप में एक ऐसी फिल्म बनाई है जिसमें स्पोर्ट के साथ एक लव स्टोरी भी चलती रहती है जिनमें अंत तक कोई विरोधाभास नहीं हो पाता। बस बड़ी बात ये रही कि अली इस बार सलमान को उसकी इमेज से बाहर लाने में सफल साबित हुये हैं। अपनी उम्र के विपरीत सलमान से ऐसी भूमिका करवाने के लिये वे बधाई के पात्र हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि फिल्म के हीरो हीरोइन मुस्लिम हैं बावजूद इसके ये फीलिंग कहीं भी नहीं आ पाती, लिहाजा कहानी में मजहब आड़े नहीं आता। हरियाणा के माहौल, बोल चाल पर विषेश ध्यान दिया गया है लेकिन आरफा जैसी पढ़ी लिखी रेसलर लड़की गोबर के उपले बनाती अजीब लगती है। सलमान हरियाणवी भाषा पर थोड़ा और जोर दे सकते थे। मिट्टी, मैट तथा बाद में असली रैसलर्स के साथ फिस्टाइल कुश्ती दर्शकों में रोमांच पैदा करती है साथ ही सुल्तान और आरफा की लव स्टोरी से भी निर्देशक अंत तक दर्शक को जोड़े रखने में पूरी तरह कामयाब रहा है। शायद ये अच्छी स्क्रिप्टस का ही कमाल हैं जो पचास पार कर चुके स्टार्स नौजवान स्टार्स को पीछे छोड़ते हुये बॉक्स ऑफिस पर छाये हुये हैं शायद इसीलिये पोने तीन घंटे से भी ज्यादा लंबी फिल्म में दर्शक कहीं भी बोर नहीं हो पाता। दूसरे सलमान जैसा स्टार इस बार भी अपनी ही पिछली फिल्म का रिकॉर्ड तोड़ते हुये नया रिकॉर्ड बनाता है ।

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अभिनय

इस बार सलमान ने अपनी उम्र से आधी भूमिका को बड़ी शाईस्तगी से निभाया है। एक पहलवान के तौर पर उनकी फुर्ती और चपलता तथा दृड़ता देखते बनती है। वहीं वे एक प्रेमी के तौर पर भी असरदार हैं । अनुष्का एक रेसलर तथा सुल्तान की प्रेमिका के तौर पर असरदार अभिनय कर गई। लेकिन इस बार हर बार की तरह सलमान को पूरी फिल्म का क्रेडिट नहीं दिया जा सकता क्योंकि इस बार उनके अलावा उनकी दादी( पीपली लाईव फेम) और उनके दोस्त के तौर पर अनंत शर्मा तथा अमित साध भी प्रभावित करते हैं ।

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संगीत

क्योंकि फिल्म में स्पोर्ट के साथ एक लव स्टोरी भी चलती है इसलिये फिल्म में म्यूजिक का स्कोप भी बराबर बना रहता है। जैसे बेबी को बेस पसंद हैं तथा जग घुमया जैसे गीत अच्छे लगते हैं। लेकिन कुछ गीत व्याधान पैदा करते हैं ।

क्यों देखें

सलमान के प्रशंसक इस बार भी उन्हें मस्तमौला लवर और रेसलर जैसे नये रूप पर पूरी तरह से लट्टू हैं।


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Mayapuri

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