INTERVIEW!! ‘‘मुझे कहानी पहले मिल जाती तो शायद इतना इंतजार नहीं करना पड़ता’’ – सनी देओल

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ऐसा बॉलीवुड में पहली बार हुआ है कि किसी फिल्म का सीक्वल पूरे पच्चीस साल बाद बना हो और वो भी उतना ही हिट जितना कि उसका पहला वर्जन था। सनी देओल ने अपने द्वारा लिखित निर्देशित और अभिनीत फिल्म ‘घायल वन्स अगेन’ में ये कारनामा कर दिखाया है। फिल्म हर वर्ग के दर्शक को पंसद आ रही है। हाल ही में उनसे इस फिल्म को लेकर हुई एक मुलाकात।

‘घायल वन्स अगेन’ अपने पहले भाग से पच्चीस साल पीछे है ?

मैं तो घायल के बाद ही इसका सीक्वल बनाना चाहता था अगर मुझे पहले कहानी मिल जाती तो शायद इतना इंतजार नहीं करना पड़ता। लेकिन एक तो उन दिनों सीरीज बनाने का चलन नहीं था, लेकिन जब सीक्वल बनने लगे तो हमारे पास कहानी नहीं थी। इसीलिये फिल्म बनने में इतनी देर लग गई।

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दो साल पहले जब इस फिल्म का ऐलान किया गया तो फिल्म के डायरेक्टर के लिये राहुल रवैल और अश्विनी चौधरी का नाम एनांउस हुआ था ?

मुझे नहीं लगता कि हमें बीती बातों को दोबारा ताजा करना चाहिये। दूसरे मैं फिल्म से पूरी तरह संतुष्ट  हूं इसलिये इसके बारे में पॉजिटिव बातें करना पसंद करूंगा। वैसे भी फिल्म रिलीज हो रही है और मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है।

चेंज ऑफ जनरेशन को देखते हुये आपने कहानी में काफी कुछ बदला होगा ?

बदलाव तो सृष्टि का नियम है परंतु आजकल बदलाव काफी तेजी से हो रहे हैं। इसलिये अब हम फिल्म को बनाने में साल दो साल नही लगा सकते, वरना पता चलता है जब उसकी रिलीज का वक्त आया, तब तक वह पुरानी हो गई है। इन सारी बातों को देखते और समझते हुये मैंने इस फिल्म पर काम किया।

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पच्चीस साल पहले हीरो जवान था। अब….?

मैं आपको इस बारे में बताते हुये कहना चाहूंगा कि जब मैंने घायल बनाई थी तो उसका हीरो अजय पच्चीस से तीस साल का रहा होगा लिहाजा दो हजार पंद्रह तक वह भी तो अधेड़ हो चुका होगा। इसलिये मैंने उसे चालीस प्लस दिखाते हुये यह भी सोचा कि वह अब कहां होगा और इन दिनों क्या कर रहा होगा। उसे ढूंढकर एक मकसद देते हुये मैंने उसे आज के यूथ से रिलेट करवा दिया।

आज के यूथ को आपने किस तरह दिखाया है ?

मेरा मानना है आज सोलह या सतरह साल के बच्चे राइट या रांग होते हैं। उन्हें एडेप्टेशन नहीं आती, इसीलिये उनका हर कदम या एक्शन पहले से कहीं ज्यादा हैरानी भरा होता है।

आपके बेटे भी आज की जनरेशन में आते हैं ?

मैं मानता हूं कि आज की जनरेशन एक हद तक अन क्ल्चरल हैं लेकिन यह एक दम से नहीं बल्कि धीरे धीरे ही हुआ है। आज बहुत सारी फैमलीज़ जरूरत से ज्यादा मॉडर्न हो गई हैं लेकिन ऐसा भी नहीं कि सब लोग ऐसे हो गये हैं। आज भी मिडिल क्लास या उससे ऊपर के परिवारों में कल्चर, सभ्यता और शिष्टाचार उसी तरह से हैं जैसे पहले होता था। मैं अपने परिवार की बात करना चाहूंगा। मुझे आज भी पापा को कुछ कहना होता हैं तो मैं अपनी मां को बीच में लाते हुये अपनी बात कहता हूं, बिलकुल इसी तरह मेरे बेटे भी मुझसे कहने वाली बात अपनी मम्मी के द्वारा कहते हैं।

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Sunny Deol, karan Deol

लगभग सारी स्टारकास्ट नई। क्यों ?

ये सब सोच समझने के बाद ही किया गया है। मैं जो पहले करता था आज भी मैंने वही किया है। नये लोगों को लेने का निर्णय कहानी को देखते हुये ही लिया क्योंकि जो फिल्म में मैं कहना चाहता था, वह नये लोगों के द्वारा ही अच्छी तरह से कह सकता था।

इससे पहले भी आप निर्देशन कर चुके हैं ?

वक्त के साथ आपकी मैच्योरिटी भी बढ़ती है इसी तरह मैंने जो अपनी पहली फिल्म दिल्लगी के डायरेक्शन में किया था वो आज नहीं है आज वक्त के साथ मैं भी उन सारी चीजों का इस्तेमाल कर रहा हूं जो फिल्म को आज की फिल्म बनाती है। इसलिये फिल्म को लिखने में दो साल लग गये क्योंकि मैं जो चाहता था वह मुझे नहीं मिल रहा था इसलिये मैंने खुद लिखना शुरू किया और जब लिख लिया तो लालच आ गया कि क्यों न इसे डायरेक्ट भी मैं ही करूं।


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Mayapuri

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