ग्यारह हज़ार एक सौ ग्यारह (11,111) कहानियों के टाइटल लिखने का विश्व रिकाॅर्ड बनाने वाले लेखक हैं सुरेश गर्ग

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* मेरे साथ मां का आशीर्वाद है।
* ‘आश्रम 3’ से मेल खाती फिल्मी- ‘आश्रम’ की परिकल्पना मेरे पास पहले से है। – सुरेश गर्ग

एक आदमी जो लगातार बॉलीवुड की नगरी मुम्बई में नही रह पाता, लेकिन वह फिल्मों से बहुत गहराई से जुड़ा है। उनके एक काम को कुछ समय पहले ही विश्व- रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। वह 11,111 फिल्मी कहानियों के टाइटल लिखकर एक कीर्तिमान बनाए हैं। वह फिल्मों के वितरक रहे हैं, फाइनेंसर रहे हैं और कई फिल्मों की राइटिंग किए हैं। यह शख्सियत हैं लेखक सुरेश गर्ग! हाल ही में सुरेश गर्ग से मुम्बई में मुलाकात होती है, वह एक अवार्ड लेने आए होते हैं- शरद राय

 “आपकी किताब- ’टाइटल फिट तो पिक्चर हिट’ के बारे में बताइए?’’

Suresh Garg Appreciation letter “मैं फ़िल्म इंडस्ट्री में सन 1975 से हूं । इंदौर में रहता हूं। लेकिन बॉलीवुड से लगातार संपर्क में होता हूं। तब से अब तक मैंने बहुत सारी कहानियां लिखी हैं, टाइटल रजिस्टर कराता गया हूं। अपनी उसी कोशिश को मैंने एक किताब का रूप दिया है जिसका नाम है – “टाइटल फिट तो पिक्चर हिट।” ऐसी कई और किताबें मेरी आनी है। “वह बताते हैं।’’ मेरी इस किताब में उन्ही फिल्मी कहानियों के टाइटल का समावेश है। मेरे द्वारा लिखित ग्यारह हज़ार एक सौ ग्यारह (11,111) टाइटल को  ‘पुस्तक’  में शामिल किया गया है। इसका प्रमाण पत्र व प्रसस्ति पत्र भी हमें प्राप्त है।”

“फिल्मों के नाम (टाइटल्स) पर काम करने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?”

Suresh“सच कहूं तो सारे काम करने की प्रेरणा मुझे मेरी माँ से मिलती है। बॉलीवुड में एक हादसा हुआ था मेरे साथ। आज मुझे कहने में संकोच नहीं की फ़िल्म “अधूरा प्यार“ (1975) मैंने लिखी थी, जब फ़िल्म रिलीज हुई तो मुझे क्रेडिट भी नहीं मिला। बॉलीवुड  को यह मेरी गुरु दक्षिणा थी शायद और शायद ऐसा किस्सा बहुत होता है यहां। मैं तब बहुत व्यथित था। मेरी मां ने कहा -ऐसे निराश होओगे तो कैसे चलेगा। यह जीवन है यहां काम करते जाना होता है। मां की बात ने मुझ पर असर डाला। मैंने लेखन जारी रखा, साथ ही दूसरे काम भी करने में हाथ डाला। कई और फिल्मों के लिए काम किया। कुछ बनी, कुछ रिलीज नहीं हुई…।”

Suresh Garg Appreciation letterसुरेश गर्ग ने एक हिंदी फिल्म पत्रिका ’फ़िल्म वर्षा’ का प्रकाशन शुरू किया। पत्रिका के वह सम्पादक-प्रकाशक थे। फिर वह फिल्मों के वितरक के रूप में काम शुरू किए। ’90 से ’ 95 के बीच कई छोटी बड़ी फिल्मों का डिस्ट्रिब्यूशन किए। फिर वह फिल्मों के फाइनेंसर बन गए। यहां भी कई छोटी बड़ी फिल्मों में फाइनेंस किया। वह बताते हैं- “2010 – 12 तक मैं इन कामों में लगा रहा। यह समय था जब बॉलीवुड अनिश्चय की ओर बढ़ता जा रहा था। मैंने अपने अंदर के लेखक को सुनना शुरू किया। लिखना शुरू किया। आज मेरे पास 14 कहानियां तैयार हैं। जिन पर कई निर्माता काम करना चाहते हैं। ‘कोरोना महामारी’ ने सब कुछ उलटफेर कर दिया है वर्ना मेरी लिखी चार फिल्में फ्लोर पर आ चुकी होती।”

कोरोना काल का एक हादसा गर्ग बताते हैं- “ एक फ़िल्म साई बाबा पर लिखने के लिए शिरडी में था। टाइटल था ’ओम साई राम’। वहां चार महीने लॉकडाऊन के चलते फंसे रह गए। अब सब नार्मल होने पर फ़िल्म फ्लोर पर जाने वाली है।”

 “इन दिनों वेब सीरीज का दौर चल रहा है। आपने भी कुछ लिखा है?”

Suresh Garg“मैंने कहा न कि मेरे पास 14 फिल्मों की तैयार कहानी है। मैं लव स्टोरी, सस्पेंस, थ्रिलर, कॉमेडी, माइथोलॉजी-इन सभी विषयों पर ’बॉलीवुड स्टोरी हाउस ’ बना कर रखा हुआ है।“ वह आगे कहते हैं- “जहां तक वेब सीरीज की बात है.. मेरे पास ’आश्रम-3’  से मेल खाती कहानी “फिल्मी आश्रम’’ पहले से है। जो बाबा राम रहीम के फिल्मी शौक से प्रेरित है। यहां एक सुपर स्टार का बनाया हुआ फिल्मी आश्रम है जो  संघर्षशील लड़कियों को रहने, खाने, पीने  की मुफ्त सुविधा देता है। उनको करियर बनाने, सपने पूरे करने, और आगे बढ़ने की ट्रैनिंग दी जाती है… इस तरह से और भी सब्जेक्ट हैं। समय वेब सीरीज का है तो कहानी भी उसी हिसाब से होनी चाहिए।”
Email: bollywoodstoryhouse@gmail.com
Web site: www.titlefittohpicturehit.com


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Mayapuri

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