सोनम कपूर की वजह से मैं मेनस्ट्रीम सिनेमा का हिस्सा हूं- स्वरा भास्कर

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सिनेमा में कमर्शियल फिल्मों की बनिस्बत मुद्दों पर आधारित फिल्मों में अभिनय कर निरंतर सफलता की ओर अग्रसर स्वरा भास्कर को लोगों ने ‘रांझणा’,‘‘तुन वेड्स मनु’,‘निल बटे सन्नाटा’और ‘अनारकली आफ आरा’में काफी पसंद किया। लेकिन जब भी उन्होने कमर्शियल फिल्में की,उन फिल्मों की सफलता का श्रेय दूसरे कलाकार ले उड़े पर अब स्वरा भास्कर,सोनम कपूर के साथ कमर्शियल फिल्म‘‘वीरे दी वेडिंग’’को लेकर अति उत्साहित हैं। उनका दावा है कि इस फिल्म के बाद सारे समीकरण बदल जाएंगे।

फिल्म ‘‘अनारकली आफ आरा’’को बाक्स आफिस पर सफलता नही मिली ?

मैं आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं वैसे फिल्मों के बॉक्स आफिस पर चलने की गणित बहुत अलग है.क्योंकि यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि फिल्म के पीछे कौन सा स्टूडियो है,फिल्म के कितने प्रिंट रिलीज हो रहे हैं? किस शहर के किस इलाके में किस समय रिलीज हो रही है.फिल्म की प्रतिस्पर्धा किस तरह की फिल्मों से है।

जहां तक फिल्म ‘अनारकली ऑफ आरा’ का सवाल है, तो यह एक हाई कंटेंट वाली फिल्म है। इसे एक बेहतरीन कल्ट फिल्म भी कह सकते हैं। ‘जाने भी दो यारों’ और ‘अंदाज अपना अपना’ को भी बॉक्स आफिस पर सफलता नहीं मिली थी,मगर यह कल्ट फिल्में हैं।

हमारी फिल्म ‘अनारकली आफ आरा’को अमॉजॉन व नेटफ्लिक्स पर काफी देखा जा रहा है। इसकी डीवीडी काफी बिक रही हैं। पर बॉक्स आफिस पर इसे सफलता नहीं मिलेगी। यह हमें पता था क्योंकि हमारे साथ कोई स्टूडियो नहीं था। फिल्म का विषय इतना बोल्ड है कि लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसी फिल्म आ सकती है। लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई, तो जिन लोगों ने भी फिल्म देखी, उन लोगों ने इसकी चर्चा की। पैसा कमाने के दृष्टिकोण से फिल्म असफल है। मगर फिल्म इस हिसाब से सफल है कि इसने लोगों की मानसिकता को बदला। एक बहस शुरू की। फिल्म ने दर्शकों की सोच और मानसिकता पर असर किया। इस फिल्म की वजह से सामूहिक बातचीत शुरू हुई। इंटरनेशनल फेस्टिवल में काफी सराहा गया।

इस फिल्म की असफलता से कलाकार के तौर पर आपको कितना नुकसान हुआ ?

बहुत तकलीफ हुई.दुःख हुआ.हमने बड़ी मेहनत की थी.इस फिल्म को लेकर मैंने अपना धाड़स बंधाया कि इस तरह की कंटेट वाली फिल्म के साथ ऐसा होता है। क्योंकि फिल्म को सफल बनाने वाला गणित हमारे साथ नहीं था। लेकिन मेरा मानना है कि कंटेट प्रधान फिल्में करने पर कलाकार के करियर पर बुरा असर नहीं पड़ता है। कंटेंट कलाकार को सफलता और असफलता से परे ले जाता है। ‘अनारकली आफ आरा’ में यही बात है इसलिए मेरे करियर पर बुरा असर नहीं पड़ा। इससे पहले मेरी सफल फिल्म ‘निल बटे सन्नाटा’ आयी थी, इसका भी कंटेंट बहुत अच्छा था मैं भविष्य में भी इसी तरह की कंटेंट प्रधान फिल्में करना चाहती हूं।

फिल्म ‘‘अनारकली ऑफ आरा’’को कई फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया. वहां लोगों से आपको किस तरह की प्रतिक्रिया मिली ?

बहुत अच्छा रिस्पांस मिला हर फिल्म फेस्टिवल में लोगों ने तालियां बजाकर हमारा स्वागत किया। हर किसी ने फिल्म के अंतिम हिस्से में जब अनारकली लंबा चलती है, दृश्य की तारीफ की। मजेदार बात यह है कि यह दृश्य फिल्म की पटकथा में नहीं था। पर मैंने इसे जुड़वाया था। कैमरामैन से झगड़ना भी पड़ा था। क्योंकि वह लाइटिंग व समय के अभाव की बात कर रहा था। वह फिल्म की शूटिंग का आखिरी दिन और आखिरी सीन था। पूरे रोड पर लाइटिंग करवानी पड़ी। पर मैंने करवाया.जब लोगों ने इस सीन की प्रशंसा की,तो मुझे लगा कि मेरा विश्वास सही था।

मैं नेपाल के काठमांडू शहर में आयोजित एक सेमिनार में गयी हुई थी,जहां पर महाराष्ट् की एक सेक्स वर्कर/वेश्या भी पहुंची थी,जो कि सेक्स वर्करों की भलाई के लिए एनजीओ भी चलाती हैं, इस वक्त मुझे उनका नाम याद नहीं आ रहा। उसने बहुत बड़ी बात कही थी.उसने कहा कि फिल्म में अनारकली बार बार कहती है कि वह रंडी नहीं है,पर जब वह अंत में कहती है कि चाहे वह रंडी हो या पत्नी,पूछ कर हाथ लगाइगा.तब उसे यह अच्छा लगा कि हमने उसे यानी कि वेष्या को औरतां की जमात से अलग नहीं किया.पर उसने समीक्षा के तौर पर जो कहा, उसने मेरे दिलों दिमाग को हिला दिया। उसने कहा कि, ‘आपने फिल्म में जैसा दिखाया है, असलियत में वैसा नहीं होता है। असलियत में इससे भी अधिक शोषण और अत्याचार होता है।’ उसकी बात सुनकर तो मेरी समझ में आया कि जिस इंसान पर बीती है,वही जानता है कि सच्चाई कितनी काली है. उसने यह भी कहा कि फिल्म में बहुत सारी चीजें आसानी से दिखा दी गयी है,जबकि निजी जीवन में यह सब इतनी आसानी से नही होता है.मेरी समझ में आया कि अनारकली से भी कठिन जिंदगी औरतों को जीनी पड़ रही है।

आप कह रही हैं कि आप कंटेट प्रधान सिनेमा करती रहेंगी पर इन दिनों आप एक कमर्शियल फिल्म ‘‘वीरे दी वेडिंग’’ कर रही हैं ?

बिलकुल सही कहा.मैं कमर्शियल फिल्म जरूर कर रही हूं,पर इसका किरदार भी बहुत अलग है। अब तक मैंने इस तरह का कोई किरदार नही निभाया.अब तक मैंने फिल्मों में निचले या मध्यमवर्गीय किरदार या मजदूर वर्ग की महिला के किरदार निभाए हैं। लेकिन फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ में मैंने एक अमीर वर्ग की महिला का किरदार निभाया है.अति महंगे कपड़े व ज्वेलरी आदि पहनकर अपने आपको अति अमीर महिला के रूप में पेश करना मेरे लिए अलग व अच्छा अनुभव रहा। कलाकार के तौर पर हमें हर तरह के किरदार निभाने चाहिए.मेरे लिए कमर्शियल फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ करना काफी मुश्किल रहा। यह मानना कि कमर्शियल फिल्में करना आसान होता है,गलत है। सच कहूं तो इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मैंने महसूस किया कि जिस तरह की मेहनत सोनम कपूर व करीना कपूर अपने किरदार के साथ साथ अपनी बॉडी को लेकर करती हैं या जिस तरह से वह अपने लुक पर ध्यान देती हैं,जिस डिसिप्लिन के साथ वह अपनी डाईट मेनटेन करती हैं, उसके सामने मैं बहुत कमतर हूं। मैं तो इतना कुछ भी नहीं करती। करीना कपूर का अपना बच्चा है,फिर भी वह 14-14 घंटे शूटिंग कर रही थी। उसके बाद भी वह अपने लिए एक्रसाइज व वर्कआउट के लिए समय निकाल लेती थी यह सब देखकर मैंने अपने आपको बहुत छोटा महसूस किया मुझे लगा कि कमर्शियल फिल्मों की हीरोइनें बहुत ज्यादा मेहनत करती हैं। यह गलत है कि वह परदे पर सिर्फ सुंदर दिखने के लिए आ जाती हैं।

फिल्म के किरदार को लेकर क्या कहेंगी ?

किरदार यही है अमीर है महंगे कपड़े पहनती हैं.देखिए,फिल्म की कहानी चार सहेलियों की है.इन चार सहेलियों में मैं, करीना कपूर,सोनम कपूर व शिखा तलसानिया हैं। यह चारों सहेलियॉं एक शादी में जाती हैं,तो किस तरह वह इंज्वॉय करती हैं,यह एक कॉमेडी फिल्म है। तो हम सभी कुछ स्तर पर कॉमेडी करते हुए भी नजर आने वाली हैं।

मैं बता दूं कि इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें हम सभी चारों के किरदार एक समान है, किसी का किरदार छोटा या बड़ा नहीं है। पहली बार मुझे इस फिल्म में सबसे ज्यादा अभिनय करना पड़ा। इसके अलावा सोनम कपूर के साथ यह मेरी तीसरी फिल्म है। मैंने सोनम कपूर के साथ सबसे पहले आनंद एल राय की फिल्म‘‘रांझणा’’,फिर ‘‘प्रेम रतन धन पायो’’ की थी अब ‘‘वीरे दी वेडिंग’’की है।

आप सोनम कपूर की बहुत तारीफ करती हैं ?

सोनम कपूर मुझे बहुत पसंद हैं वह अच्छी अदाकारा और बड़ी स्टार होने से कहीं ज्यादा अच्छी लड़की हैं। एक अच्छी इंसान हैं। सच्चे मन वाली लड़की हैं। बॉलीवुड के संदर्भ में कहूं तो सोनम कपूर ने मेरे लिए बहुत सकारात्मक रूख अपनाया है। सोनम कपूर की ही वजह से मैं अपने आपको मेनस्ट्रीम सिनेमा का हिस्सा मानती हूं। उसने मेरा आत्मविश्वास बढा़या। मेरा कॉफीडेंस बढ़ाया उसने मुझसे हमेशा यही कहा कि मुझे खुद को कमर्शियल फिल्मों में सिर्फ सपोर्टिंग कलाकार के रूप में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि उससे इतर सोचना चाहिए। सोनम कपूर का मानना है कि मेरे अंदर कमर्षियल फिल्मों में हीरोईन के तौर पर बहुत आगे जाने की क्षमता है। सोनम ने खुद बताया कि उसने कई ऐसी पटकथाएं सुनी,  और उसने फिल्म निर्देशकों से कहा कि स्वरा को इतने छोटे किरदार के लिए नहीं कहा जाना चाहिए। बॉलवुड में हीरोईनो के बीच प्रतिस्पर्धा व जलन आदि की बाते की जाती हैं,मगर सोनम कपूर तो नकारात्मक सोच से काफी गुणा उपर हैं। सोनम जिस तरह का व्यवहार अपने सह कलाकार के साथ करती हैं, उसे देखकर मैं बहुत कुछ सीखती हूं। अवॉर्ड लेते समय दूसरी अभिनेत्रियों का नाम लेने वाली एक मात्र अभिनेत्री सोनम कपूर हैं। उसके अंदर काम को लेकर दिलदार पना है.उसके अंदर असुरक्षा की भावना नहीं है।

 

बॉलीवुड में माना जाता है कि आपने जो भी कमर्शियल फिल्में की हैं,उनकी सफलता का श्रेय दूसरे कलाकार ले गए ?

पहली बात तो मैं ऐसा नहीं मानती. लेकिन यदि लोगों को ऐसा लग रहा है,तो ‘वीरे दी वेडिंग’ की रिलीज के बाद लोग यह सब भूल जाएंगे। मैंने कमर्शियल फिल्मों में छोटे किरदार निभाया है,लेकिन मुझे प्रशंसा उससे कहीं ज्यादा मिली है। अब फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ को ही लीजिए। मेरा किरदार बहुत छोटा था,पर मेरे किरदार की चर्चा बहुत ज्यादा हुई। मैं जब बाहर निकलती हूं, तो लोग मुझे ‘प्रेम रतन धन पायो’ की वजह से ही याद करते हैं। इसी तरह ‘रांझणा’ में मेरा किरदार सबसे ज्यादा पसंद किया गया। खैर, सब कुछ ‘वीरे दी वेडिंग’के साथ बदल जाएगा।‘वीरे दी वेंडिंग’बहुत ही ज्यादा कमर्शियल फिल्म हैं हम 4 लड़कियों के किरदार एक समान हैं।

इसके अलावा क्या कर रही हैं ?

एक प्रेम कहानी प्रधान फिल्म की पटकथा लिख रही हूं.अब तक इसके 8 ड्राफ्ट तैयार कर चुकी हूं। इसके अलावा एक दूसरी अलग तरह की कहानी लिख रही हूं। मैं एक लघु फिल्म की कहानी भी लिख रही हूं। इस फिल्म की पटकथा पूरी होने के बाद मैं खुद इसका निर्माण करने वाली हूं। एक वेब सीरीज में भी अभिनय करने वाली हूं।

आपने पिछले साल ‘वूट’ पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘इट्स नॉट मी’ की थी ?

जी हां! इसे बहुत ज्यादा सफलता मिली। इसमें एक ऐसी गृहिणी की कहानी है,जिसका वैवाहिक जीवन बहुत बुरी स्थिति में है। इसी के चलते उसका पर पुरुष से अफेयर हो जाता है। इस वेब सीरीज में विवाहेत्तर संबंधों को एक औरत के नजरिए से चित्रित किया गया है। आप यकीन नहीं करेंगे,मगर इस वेबसीरीज को छोटे शहरों जबलपुर, रायपुर, भोपाल, इंदौर, कानपुर में ज्यादा देखा गया। छोटे शहरों में औरतों ने तो अपनी किटी पार्टी में इसका प्रदर्शन किया। यह सब मुझे ‘वूट’ चैनल ने ही  बताया.अब हम उसका दूसरा सीजन कर रहे हैं।

वेब सीरिज को लेकर आप क्या सोचती हैं ?

यह भविष्य है। वेब सीरीज का प्रचलन तेजी से बढ़ना तय है। जितनी संख्या में स्मार्ट फोन बढ़ेगे, उतनी ही तेजी से वेबसीरीज के दर्षक बढेगे। नेटफिलिक्स और अमैजॉन ने तो बॉलीवुड का नक्शा बदल दिया हैं।

आप जेएनयू से हैं इसकी वजह से बॉलीवुड में किस तरह की समस्या आती है ?

बॉलीवुड को इस बात से कोई लेना देना नही हैं कि मैं जेएनयू या दिल्ली युनिवर्सिटी से हूं। लेकिन इसकी वजह से मुझे ट्वीटर पर बहुत कुछ झेलना पड़ता है। मैंने बीए दिल्ली यूनिवसिर्टी से किया है। एम ए जेएनयू से किया है। ट्वीटर पर मुझे बहुत गालियां मिलती है मेरी वजह से मेरे मां बाप को भी घसीटा जाता है यह सब दुःख की बात है। मैं हमेशा कहती हूं कि जिनके पास तर्क नही हैं, वही गाली बकते हैं। इसके अलावा यदि आपके पास तर्क नही हैं, तो आपको अपना विश्वास कमजोर है।


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