INTERVIEW!! ‘‘मेरा अभी तक का फिल्मी सफर बहुत मुश्किल रहा है’’ – स्वरा भास्कर

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लिसन माया, मछली जल की रानी है तथा माधोलाल कीप वॉकिंग जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाओं से अपना फिल्मी सफर शुरू करने वाली अभिनेत्री स्वरा भास्कर को पहचान दी तनु वेड्स मनु और तनु वेड्स मनु रिटर्न्स तथा रांझना जैसी फिल्मों ने। वह अपनी इस सप्ताह रिलीज होने वाली फिल्म ‘निल बटे सन्नाटा’ को लेकर बहुत उत्साहित हैं। फिल्म को लेकर उनका कहना है कि…… ।

महत्वपूर्ण फिल्म

यह फिल्म मेरे लिये इसलिये महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार एक ऐसी फिल्म जिसमें मैने लीड रोल किया है और वह बहुत ही अच्छे तरीके से रिलीज होने जा रही है। पहली बार मेरी किसी फिल्म को बहुत बड़ी बैंकिंग मिल रही है  जिसके पीछे आनंद राय तथा इरोस जैसा कार्पोरेट हैं। जब कि इससे पहले मैं लिसन माया, मछली जल की रानी है या माधोलाल… जैसी फिल्में कर चुकी हूं जिनमें मेरा मेन किरदार था लेकिन उन्हें सही रिलीज नहीं मिल पाई थी।

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कहानी

ये चंदा नामक एक ऐसी विधवा औरत की कहानी है जो आगरा जैसे शहर में खाना बनाने का काम करती है वहां उन्हें मिसरानी भी कहा जाता है। इसके अलावा वह मसाला कूटने का काम भी करती है। चंदा की एक बेटी अप्पू है जिसका मन पढ़ाई में जरा भी नहीं है वह एक तरह से महाढीट लड़की है जबकि चंदा की तमन्ना है कि अप्पू पढ़ लिख कर एक अच्छी जिन्दगी गुजारने लायक हो जाये लेकिन अप्पू को शाहरूख खान, अमिताभ बच्चन, रितिक रोशन और रणबीर कपूर में दिलचस्पी है। दूसरे उसका मानना है कि जैसे डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है, वकील की बेटी वकील और इंजीनियर की बेटी इंजीनियर बनती है इसी प्रकार मिसरानी की बेटी भी मिसरानी ही बनेगी। इस तरह अप्पू अपनी मां की असली औकात बताने की कोशिश करती है। चंदा को इस बात का बहुत बड़ा धक्का लगता है क्योंकि उसकी भरकस कोशिश यही रही है कि उसकी बेटी अपनी मां जैसी जिन्दगी न जीये।

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महिला निर्देशक के साथ काम

इस फिल्म की निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी चौदह साल तक एडवर्टाइजिंग से जुड़ी रही है तथा वे निर्देशक नितीश तिवारी की पत्नि हैं। फिल्म को लेकर उनकी तैयारी कमाल की रही। इस बात का मुझे उस वक्त पता चला जब अश्विनी मेरे पास बाउंड स्क्रिप्ट के साथ आई थी। शूटिंग के दौरान उन्हें जहां एक आर्टिस्ट के तौर पर मुझे छूट देनी थी वो मुझे दी और जहां नहीं देनी थी तो उन्होंने मुझे जरा भी हिलने नहीं दिया। अगर महिला डायरेक्टर की बात की जाये मुझे कहीं ऐसा कुछ नहीं लगा कि मैं किसी महिला निर्देशक के साथ काम कर रही हूं। हां ये जरूर है पुरुष निर्देशक के साथ मानसिक तौर पर एक हल्का सा डायनामिक जरूर होता है। क्योंकि हमेशी ये शक  होता है कि कहीं वह मेरे किसी इशारे को गलत को न समझ बैठे। बेशक मैंने अभी तक अच्छे लोगों के साथ काम किया है फिर भी महिला होने के नाते कहीं न कहीं थोड़ा सा केयरफुल तो रहना ही पड़ता है कि किसी को ऐसा न लगे कि कोई अपने औरत होने का फायदा तो उठाने की कोशिश नहीं कर रही है। इस फिल्म के दौरान हमारी इतनी अच्छी दोस्ती हो गई थी कि आज अश्विनी मेरे बहुत अच्छे दोस्तों में से एक हैं।

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फिल्म करियर

मैं यहां जब आई थी तो किसी को नहीं जानती थी, मेरा कोई यहां अंकल या ब्वायफ्रेंड नहीं था सिवाय एक एडी के, जो खुद भी अच्छी स्थिति में नहीं था। मैं खुद अपने आप कदम दर कदम आगे बढ़ी हूं। मैंने बेतहाशा ऑडिशंस  दिये उनके सहारे एक एक कदम आगे बढ़ी हूं। इस बात के लिये मैं अपने आपको किस्मत वाली मानती हूं कि मुझे हमेशा अच्छे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। आप कह सकते हैं कि खरगोश और कछुए वाली कहानी में, मैं अपने आपको वो कछूआ मानती हूं जो धीरे धीरे अपनी मंजिल तय करता है। आप कह सकते हैं मैं इरफान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राज कुमार राव या रिचा चड्डा सरीके अदाकारों के साथ वाली जमीन से हूं जो हम सबने स्वयं बनाई है। छोटे छोटे रोल निभाते हुये हमने कैमरे को अपनी तरफ मुड़ने के लिये मजबूर किया है। वैसे मेरा अभी तक का फिल्मी सफर काफी मुश्किल रहा।

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अन्य फिल्म

मेरी अगली फिल्म का नाम है ‘अनारकली आरा वाली’। यह बिहार के आरा शहर की एक गायिका की कहानी है जो शादी ब्याहों में अश्लील गाने गाती है लेकिन उसे नहीं लगता कि वह भोजपुरी के अश्लील गीत गाने वाली गायिका है।

 


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Mayapuri

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