तापसी पन्नू ने ‘थप्पड़’ में महिलाओं के न्याय के लिए अपना साहसी धर्मयुद्ध लड़ा

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तापसी पन्नू

– अली पीटर जॉन

 यह अजीब है कि कुछ मीटिंग्स कैसी होती हैं। मैं इस बेहद प्रतिभाशाली युवती से मिलना चाहता हूं, जिनके फिल्मों में आने के बाद मैं उतना ही एक्टिव हो गया हूं जितना कि मैं पहले कभी हुआ करता था, यह अभिनेत्री जो मुझे प्रभावित कर रही है और मुझे हर तरह की भूमिका के साथ आकर्षित कर रही है, जिसे वह पिछले कुछ वर्षों से निभा रही हैं, एक ऐसी अभिनेत्री जो मुझे लगातार यह उम्मीद दिलाती जा रही है कि अभी भी सब कुछ नहीं खोया है कि हिंदी फिल्मों में अच्छे दिन अभी भी आएंगे और अच्छी और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों का समय भी आएगा। मेरे लिए तापसी पन्नू, अनलिमिटेड और बाउंडलेस का दूसरा नाम है।

जब से मैंने “थप्पड़“ नाम की इस फिल्म के बारे में सुना है और ट्रेलर देखा, तब से मैंने उनसे मिलने के तरीकों के बारे में सोचा है और फिर पढ़ा कि कैसे कुछ प्रबुद्ध लोगों ने फिल्म और तापसी के प्रदर्शन को देखने के बाद इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। मुझे लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। मुझे केवल अपने मोबाइल को स्विच ऑन करना था और अपने मेल पर जाना था और उस पर जो पहला नाम मैंने देखा था, वह था तापसी पन्नू। वह मेरे नाम से मुझे बुला रही थी और मुझे उनका समर्थन करने के लिए कह रही थी जो उनके करीब और प्रिय हैं, तापसी मुझे घरेलू हिंसा के खिलाफ उनके साथ अपनी आवाज उठाने के लिए कह रही थी। उन्होंने उस एक थप्पड़ के बारे में बात की, जो आने वाले समय में सभी घरेलू हिंसा की शुरुआत हो सकती है। उन्होंने इस बारे में बात की कि कैसे शिक्षक एक छात्र को थप्पड़ मारता है, कैसे माता-पिता अपने बच्चों को थप्पड़ मारते हैं और कैसे ये थप्पड़ धीरे-धीरे एक लत की तरह बढ़ते चले जाते हैं और जीवन का एक तरीका बन जाता है।

उनके पास एक बहुत मजबूत मुद्दा था, जब उन्होंने कहा कि फिल्मों में दिखाए जाने वाले धूम्रपान शराब पीने के दृश्यों के साथ स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी भी दी जाती है, तो घरेलू हिंसा के दृश्यों पर चेतावनी वाली स्टेटमेंट क्यों नहीं हो सकती। फिर एक सोच और संवेदनशील इंसान के रूप में मैं कैसे उनके साथ सहमत नहीं हो सकता और उनके इस घरेलू हिंसा के खिलाफ अभियान में उनके साथ शामिल नहीं हो सकता हूं?

जब से उन्होंने तेलुगु और तमिल फिल्मों से शुरुआत की है, तब से ही मैं तापसी के करियर को फॉलो कर रहा हूँ, जिन्होंने भाषा के साथ समस्या होने पर भी बेहतरीन काम किया हैं। वह इतनी अच्छी थीं कि उन्हें हिंदी फिल्मों से भी पहचान मिली जब वह हिंदी फिल्मों में आईं, उन्होंने वहा से शुरुआत की जहाँ से उनके जैसे अन्य लोग सिर्फ पहुँचने का सपना ही देख सकते हैं, उन्होंने अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ “पिंक“ और “बदला“ जैसी फ़िल्मों में मुख्य भूमिकाएँ निभाईं और अपना मुकाम बनाया। उन्होंने अन्य फ़िल्में कीं जिनमें उन्होंने साबित किया कि वह एक बहुमुखी अभिनेत्री हैं, जो 70 साल की महिला की भूमिका भी निभा सकती है फिल्म “सांड की आंख“ जैसी फिल्म में जिससे वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए पुरस्कार प्राप्त कर सकती हैं। अन्य फिल्मों के बीच जो उनकी प्रतिभा द्वारा चिह्नित की गई वह मुल्क, बेबी और यहां तक कि ‘जुडवां 2’ और ‘मनमर्जियां’ थी। बहुमुखी प्रतिभा के नाम पर और क्या हो सकता है?

जब तक “थप्पड़“ है, मुझे यकीन है कि हिंदी सिनेमा या यहां तक कि भारतीय सिनेमा में भी प्रतिभा का एक चेहरा होगा, जो आपने तापसी पन्नू में पहले कभी नहीं देखा होगा, मुझे इस पर यकीन है चाहे तो आप मेरे शब्दों को मार्क कर लीजिए। और मुझे पता है कि वह इनदिनों भारतीय महिला विश्व कप की कप्तान मिताली राज की भूमिका में व्यस्त हैं और मुझे फिल्म का शीर्षक “शाबाश मित्थु“ बहुत पसंद है और तापसी के करियर के इस आधे रास्ते पर मुझे शाबाश तापसी कहती हुई चीख-पुकार सुनाई दे रही है।

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