अब वो मौत के सौदागर तबस्सुम को मारने निकले थे!

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कुछ लोगों के दिमागों को आजमाने और समझने में मुझे घंटों का समय लगा है, जो मशहूर हस्तियों की मृत्यु के बारे में कहानियां फैलाने में बहुत आनंद लेते हैं, विशेष रूप से फिल्म उद्योग के जाने-माने नाम। इस तरह कुछ राक्षसी और भयावह करके वे क्या हासिल करते हैं? क्या वे कभी सोचते हैं या कल्पना करते हैं कि इस तरह की व्यथित कहानियां परिवारों और उन लोगों के साथ क्या खेल खेलती हैं जो वे, बिना किसी विवेक या अपराध के इंसान को ‘मार’ देते हैं? क्या वे इस बारे में सोचते हैं कि अगर वे अपने ही परिवार के लोगों के बारे में ऐसी भयानक कहानियां और अफवाहें फैलाते हैं तो वे कैसे प्रतिक्रिया देंगे? बीमार दिमाग वाले लोग ऐसी गतिविधियों में लिप्त क्यों होते हैं जिन्हें मैं हत्या से ज्यादा जघन्य मानता हूं और उन्हें सजा दी जानी चाहिए, जैसे कि हत्यारों को सजा दी जाती है? अली पीटर जॉन

कल सुबह तबस्सुम के साथ जो हुआ, वह कुछ नया नहीं था। ये हत्यारे पूर्व में भी उग्र प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने नूतन की ‘हत्या’ की है, उन्होंने एक से अधिक बार देव आनंद का ‘गला’ घोंट दिया है, वे उन सभी दिग्गजों और किंवदंतियों को निशाना बना रहे हैं, जो असहाय अवस्था में घर पर पड़े हैं। पिछली बार जब उन्होंने किसी को अच्छा और महान ‘मारने’ की कोशिश की थी, तो वह था, कवि व्यक्तित्व, अमीन सयानी, जो थोडे बूढे और कमजोर पाए गए, लेकिन फिर भी सक्रिय थे!

यह सच है कि, यह मौत के मौसम की तरह है, लेकिन इन ‘हत्यारों’ को मौसम को और अधिक अंधेरा, हताश और उजाड़ क्यों करना पड़ता है, जो उनके खतरनाक दिमागों में होना चाहिए, विश्वास किया जाना चाहिए कि यह मजेदार था और इसे ‘सिर्फ इसके लिए किया गया था’

सच है, तबस्सुम अब अपने 80 के दशक में है, लेकिन जहां तक मुझे पता है, उसके पास कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या नहीं है और ये ‘हत्यारों’ को एक जवाब दे सकते हैं जिस तरह से वह सबसे अच्छा जानती है।

कायर ‘हत्यारों’ में सच्चाई का सामना करने की हिम्मत कहाँ है?

यह गंदी और नृशंस खेल बहुत दूर चला गया है और कानून के हाथ और अन्य जो मानवता की देखभाल करते हैं, उन्हें इसे रोकने के लिए कुछ कठोर कदम उठाने चाहिए, क्योंकि अगर इसे अभी रोका नहीं गया है, तो यह किसी अन्य प्रकार की महामारी में बढ़ सकता है जिसने पहले से ही उस तरह का भय पैदा कर दिया है जो आने वाले वर्षों के लिए हमें शांति से नहीं रहने देगा!

इन भयानक, ‘हत्यारों’ का अगला शिकार कौन होगा? समय भी नहीं बता सकता क्योंकि यह जानना अभी भी बहुत कठिन है कि ‘कोई जीए या मरे, हम को क्या करना’ की परवाह किए बिना कैसे नीरस काम करते हैं?

इस संगीन जुर्म को रोकना ही पड़ेगा, नहीं तो ये ऐसे ही हमारे भारत के हीरे मोती बेवजह मरते रहेंगे और वह हंसते भी रहेंगे, बंद करो ये बर्बादी का खेल इससे पहले कि ये खेल एक बददुआ बन जाए।

अनु-छवि शर्मा

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