बॉलीवुड के ‘राम’ और ‘रावण’ से सबक लें लोग

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फिर एक बार रावण दहन की चर्चा है। रामलीला के द्वारा पूरा देश राम चर्चा से लबरेज है। दुर्गोत्सव व कालीपूजा के साथ ही राम रावण युद्ध सुर्खियों में होता है। पर क्या कभी आपने सोचा है कि बॉलीवुड में राम और रावण के कितने रूप होते हैं? पर्दे का नायक ‘राम’, खलनायक ‘रावण’ की भूमिका में आना चाहता है। अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार भी ‘रावण’ की भूमिका करने का मोह मन में संजोए रहे हैं। गब्बर सिंह (‘शोले’) की भूमिका करना उनके इसी मोह का प्रतिरूप है।

पर्दे के राम-लक्ष्मण

पर्दे के राम (अरूण गोविल) और लक्ष्मण (सुनील लाहिरी) भले ही दर्शकों के लिए आदर्श हों, निजी जिन्दगी में वह बिल्डरों द्वारा ठगे गये। अपने खरीदे गये फ्लैट के लिए वह ‘पजेशन’ पाने के लिए पुलिस स्टेशनों के चक्कर लगाते देखे गए। यानी पर्दे से कटु यथार्थ है आम जिंदगी का। जहां समाज को सही राह पर चलने का संदेश देने वाले भी दुखी हैं। पर्दे के राम और रावण में बड़ी एक-रूपता है। ‘राम’ चाहता है ‘रावण’ बनना और ‘रावण’ चाहता है ‘राम’ बनना। शत्रुघ्न सिन्हा और विनोद खन्ना का सेल्युलाइड जीवन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। वे पर्दे पर खलनायक से नायक बने फिर संसद सदस्य बनकर जन नायक बन गये। शाहरुख खान ने ‘डर’, ‘बाजीगर’, ‘अंजाम’ जैसी फिल्मों में निगेटिव रोल किए और फिर पॉजीटिव-हीरो बन गये। गोविन्दा ने भी फिल्म ‘शिकारी’ में निगेटिव रोल किया था। संजय दत्त ने भी ‘खलनायक’, ‘वास्तव’, ‘अग्निपथ’ में निगेटिव रोल (यानी रावणगिरी) की थी फिर भी वे नायक ही रहे। अमिताभ ने ‘परवाना’ सैफ अली ने ‘ओमकारा’, मनोज वाजपेयी ने ‘गैंग ऑफ वासेपुर 1’, अक्षय कुमार ने ‘अजनबी’, ‘आंखें’, ‘खिलाड़ी 420’ और जॉन अब्राहम ने ‘जिन्दा’, ‘शूट आउट एट वडाला’ में रावण-गिरी की थी फिर भी वे पर्दे के राम (नायक) बने। दर्शक किसी को उसके तत्कालिक काम से पहचानता है। तमाम डाकुओं का आत्म-समर्पण रियल लाइफ में भी मौजूद है। तात्पर्य यह कि जिस तरह रील लाइफ का ‘रावण’ ‘राम’ बन सकता है वैसा ही रीयल लाइफ में भी ऐसा हो सकता है बशर्ते चाह लिया जाए।

संपादक

 


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Mayapuri

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