#NovemberStoryReview: सिर्फ दो लोग 24 घंटे किसी को मारने के बारे में सोचते है पहला खूनी दूसरा राइटर

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November Story

हाल ही में मैंने डिजनी हॉट स्टार पर रिलीज हुई वेब सीरीज November Story देखी।  सीरीज तामिल भाषा के साथ साथ हिंदी में भी रीलिज की गई है। मुख्य किरदार में तमन्ना भाटिया, पसुप्ति, विवेक परसाना और जीएम कुमार नजर आए।

November Story

बात करते है कहानी की तो इस साइको थ्रिलर की कहानी काफी दिलचस्प है। दो कहानी एक साथ चल रही होती है जिसे अंत में एक दूसरे से जोड़ दिया जाता है। शुरूआत के हर एपिसोड के पाँच-छह मिनट ब्लैक एंड वाइट में फ्लैस-बैक स्टोरी दिखाई जाती है। इसके बाद दूसरी कहानी शुरू होती है अनुराधा(तमन्ना भाटिया) और उनके पिता गणेशन(जीएम कुमार) की। अनुराधा अपने पिता का सालों पुराना घर बेचना चाहती है जो कि Alzheimer के मरीज हैं साथ ही एक क्राइम नॉवेलिस्ट भी हैं।

सिर्फ दो लोग 24 घंटे किसी दूसरे को मारने के बारे में सोचते है पहला खूनी और दूसरा राइटर। गणेशन कुछ भूल न जाए इसलिए वो अपनी आखरी कहानी पूरी करना चाहता हैं। गणेशन की दिमागी हालत ठीक न होने के कारण वो अपने कमरे की दीवारों पर लिखाना शुरू कर देता है और एक कुर्सी से बात करता है।

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गणेशन अपनी बेटी को घर बेचने नहीं देता है क्योंकि उस घर में वो अपनी पत्नि के साथ रहता था। इस वजह से अनुराधा काफी परेशान रहती है। अचानक उस घर में एक मर्डर हो जाता है जब अनुराधा वहां पहूंचती है तो गणेशन एक औरत ही डेड बॉडी के पास बैठे होता हैं।

इस केस को पुलिस ऑफिसर सुदलाई(Aruldoss) इन्वेस्टिगेट करता है जो गणनेश का फैन भी है। वो ये मानने को तैयार नहीं होता कि मर्डर गणेशन ने किया है क्योंकि उसके पास कोई मोटिव नहीं है। वो इस केस को अपने तरिके से इन्वेस्टिगेट करता है।

कहानी का सबसे अहम किरदार डॉ येशू(पसुप्ति) की एंट्री के साथ ही कई चीजों से पर्दा उठना शुरू हो जाता है। वो पुलिस ऑफिसर को यकीन दिलाता है कि मर्डर एक ऐसे व्यक्ति ने किया है जिसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। इधर अनुराधा अपने पिता को बचाने के लिए पूरी कोशिश करती है।

सीरीज का नाम नवंबर स्टोरी क्यों है? गणेशन किससे अपने कमरे में बात करता है? जिसका मर्डर हुआ है वो कौन है? क्या गणेशन अपनी कहानी पूरी करने के लिए असल में मर्डर करता हैं? ये सभी सवाल आपको सीरीज देखने वक्त सताने वाले हैं लेकिन अंत में आपको सारे सवालों का जवाब मिल जाएगे।

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सीरीज की कहानी बीच में स्लो हो जाती है। शुरूआत के कुछ एपिसोड में कहानी पूरी बिखरी हुई लगती है लेकिन अंत के दो एपिसोड में सभी को बेहतरीन तरीके से जोड़कर दिखाया गया है। हर एपिसोड का अंत आपको नेक्सट एपिसोड देखने पर मजबूर करता है। सात एपिसोड की ये सीरीज आपको शुरू से अंत तक बांधकर रखती है।

एक्टिंग की बात करें तो तमन्ना ने एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया जो अपने पिता की हालत ही वजह से काफी परेशान रहती है। उनके इलाज के लिए घर बेचना चाहती है। जब उसे मर्डर का पता चलता है तो वो गणेशन को बचाने के लिए जी जान एक कर देती है। तमन्ना ने अपना किरदार बखूबी निभाया है। वहीं जीएम कुमार की एक्टिंग देख ऐसा लगा कि वो सच में Alzheimer का मरीज हैं। वो अपने किरदार में छा गए। बाकी कलाकारों ने अपने रोल को बेहतरीन तरीके से निभाया।

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सीरीज को साउथ के डायरेक्टर इंद्रा सुब्रमानियुम ने डायरेक्ट किया है। साथ ही सीरीज के राइटर भी वहीं हैं। लीड रोल में भले की तमन्ना नजर आई हो लेकिन सभी मुख्य कलाकार को स्क्रीन पर अच्छा स्पेस मिला है। डायरेक्टर ने दो स्टोरी को एक साथ चलाकर काफी चालाकी से कनेक्ट किया है।

सीरीज का म्यूजिक काफी इंटेंस हैं जो सस्पेंस के साथ साथ हॉरर फीलिंग्स दे रहा था। सीरीज स्लो होने के बावजूद भी म्यूजिक की वजह से कनेक्शन बना रहा।

  • कहानी बहतरीन है जिसके लिए राइटर को अलग से रेटिंग मिलनी चाहिए।
  • सभी किरदारों की एक्टिंग अच्छी रही।
  • म्यूजिक काफी इंटेंस है।
  • बीच में कहानी स्लो होती है लेकिन सीरीज के अंत होते होते ये नाराजगी भी दूर हो जाएगी।

Rating: 4/5

किसी भी फिल्म और सीरीज का दिल उसकी कहानी है। हम हर तरह की फिल्म देखते हैं लेकिन जिस फिल्म की कहानी सोचने पर मजबूर करती है। अंत तक ऑडियंस को पकड़ कर रखती है। कहानी से बांधे रखने की ताकत रखती है। असल में मेरे लिए वहीं फिल्म और वेब सीरीज देखने लायक है।

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Pragati Raj