मूवी रिव्यु: फिल्म‘ तेवर’ में है हिट होने के सारे मसाले

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बेशक संजय कपूर बतौर एक्टर वैसे तेवर नहीं दिखा पाये जैसे उन्होंने बतौर प्रोडूसर अपनी पहली फिल्म ‘ तेवर’ में दिखाये हैं। अमित शर्मा द्धारा निर्देशित ये फिल्म पूरी तरह से ऐसी शुद्ध कमर्शियल या मसाला फिल्म है जिसका किसी लाॅजिक से कोई लेना देना नहीं। यानि फिल्म बनाते वक्त बस यही ध्यान रखा गया कि फिल्म मे मनोरंजन भर भर के होना चाहिये।

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घनश्याम उर्फ पिंटू (अर्जुन कपूर) एक ऐसा अलमस्त बंदा है जो अपनी ही दुनिया में मस्त रहता है। वो और उसके दोस्त दिन भर मस्ती करते है कालेज में भी और बाहर भी। उसके पिता आगरा के एस पी आॅफ पुलिस शुक्ला जी (राज बब्बर) जहाँ उसकी मस्तीयों से परेशान रहते हैं वहीं एन्जाॅय भी करते हैं। मथुरा का बाहुबली गजेन्द्र सिंह (मनोज बाजपेयी) अपने होम मिनिस्टर भाई मेहन्दर सिंह (राजेश शर्मा) के लिये सारे गलत धंधे करता है। एक दिन वो राधिका (सोनाक्षी सिन्हा) को एक प्रौग्राम में नाचते देखता है तो उसे प्यार करने लगता है अब उसका एक ही मकसद है राधिका से शादी करना। लेकिन राधिका उसके शादी के प्रस्ताव को सख्ती से ठुकरा देती है। बाद में जब उसके और उसके होम मिनिस्टर भाई के आड़े राधिका का पत्रकार भाई आने की कोशिश करता है तो गजेन्द्र उसका खुलआम कत्ल कर देता है और फिर राधिका के पीछे पड़ जाता है। उससे बचने के लिये राधिका यूएस अपने चाचा के पास भाग जाना चाहती है लेकिन इसी बीच गजेन्द्र उसे पकड़ लेता है। मथुरा एक शादी में आया पिंटू जब जोगेन्दर को राधिका को धसीटते ले जाते देखता है तो वो राधिका को बचा कर गजेन्द्र की गाड़ी ले उड़ता है। उसके बाद गजेन्द्र और पिंटू के बीच लुका छुपी का जो खेल शुरू होता है वो गजेन्द्र की मौत पर ही जाकर खत्म होता है। लेकिन उसे पिन्टू नहीं बल्कि उसी का सिपहसालार काकड़ी उसके होम मिनिस्टर भाई के कहने पर गोली मार देता है। और खुद बाहुबली बन जाता है। पिंटू को राधिका मिल जाती है।

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जैसा कि शुरू में ही बताया गया है कि तेवर पूरी तरह से कमर्शियल फिल्म है जिसमें सारे मसाले मौजूद हैं जैसे रोमांस, एक्शन, इमोशन तथा मनोरजंन। हालांकि फिल्म में राजेश शर्मा, दीप्ती नवल तथा सुब्रत दत्ता जैसे आर्टिस्टिक फिल्मों के कलाकार मौंजूद है लेकिन उनसे भी वहीं सब करवाया है जो ऐसी फिल्मों में कलाकार करते दिखाई देते हैं। अगर राजेश शर्मा बाहुबली के होम मिनिस्टर भाई बने हैं जो उससे सारे गलत धंधे करवाते हैं। वहीं सुब्रत दत्ता ने मनोज बाजपेयी के राइटहैंड काकड़ी जैसे खतरनाक किरदार को निभाया है। राजेश शर्मा तो फिर भी इस तरह के रोल पहले निभा चुके हैं लेकिन सुब्रत ने काकड़ी जैसे कॅरेक्टर को इतनी कुशलता से निभाया है कि कई बार वे मनोज के बराबर खड़े दिखाई देते हैं और अंत में गजेन्द्र को हीरो के नहीं बल्कि काकड़ी के हाथों मरवाया जाता है।

इसमें कोई शक नहीं है कि सुब्रत एक आम से रोल को अपनी अदाकारी से खास बना जाते हैं। लेकिन दीप्ती नवल सिर्फ एक आम मां बन कर रह जाती हैं। अर्जुन कपूर की बहन की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री अपनी चुहलभरी अदाकारी से आकर्शित करती है। राज बब्बर तो है ही बेहतरीन कलाकार। उनके हिस्से में जितना भी काम आया उन्होंने उसे बेखूबी निभाया। अर्जुन कपूर इस फिल्म के बाद पूरी तरह उन नायकों में शामिल हो चुके हैं जो एज सोलो हीरो पूरी फिल्म अपने कंधो पर लेकर चल सकते हैं। उसने पिन्टू जैसे अलमस्त किरदार को पूरी मस्ती से निभाया है। सोनाक्षी फिल्म में सिर्फ शो पीस ही नहीं है बल्कि राधिका के तौर पर उसे काफी कुछ करने के लिये मिला है जो उसने खूबसूरती से निभाया है। मध्यातंर तक फिल्म खूब तेज भागती है लेकिन उसके बाद कुछ सीन काफी लंबे हो जाते हैं। लेकिन फिल्म का एक्शन अच्छा है। दूसरे क्लाइमेक्स से कुछ पहले फिल्म एक बार फिर पटरी पर आ जाती है। इसलिये दर्शक फिर संभल कर बैठ जाता है। फिल्म का म्यूजिक पहले ही हिट हो चुका है। मथुरा और आगरा की लोकेशनस अच्छी हैं। जंहा तक तेवर के बिजनिस की बात की जाये तो लगता नहीं कि ये सो करोड़ का आंकड़ा पार कर सकती है लेकिन होने को क्या नहीं हो सकता।

-श्याम शर्मा


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