मेरी नसों में जवानों का खून बहता है- संजय खान

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लिजेंडरी अभिनेता-निर्माता संजय खान,  हाल ही में जिनकी आत्मकथा ‘द बेस्ट मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ’ मुंबई में आयोजित एक भव्य आयोजन में  लॉन्च हुई है, अपने जीवन के उतार-चढ़ाव को याद करते हुए काफी भावुक हो गए. ‘द सोर्ड ऑफ टीपू सुल्तान’ के सेट पर आग लगने के बाद की घटनाओं पर उन्होंने बात की. वे इस शो को प्रोड्यूस भी कर रहे थे और उसमें अभिनय भी कर रहे थे. इस आग लगने की घटना में वे बुरी तरह घायल हो गए थे. उन्हें 112 सर्जरी से गुजरना पडा था. संजय ने उस समय की बात की जब उनके लिए सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों ने रक्त दान किया था।

संजय खान कहते हैं, “मुझे 73 से अधिक सर्जरी से गुजरना पड़ा और बहुत सारा ‘ओ’ पॉजिटिव ब्लड की आवश्यकता थी. उस समय, सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों ने मुझे सैकड़ों बोतल रक्त दान किया था. तो आज, जब मैं हर सुबह उठता हूं और खुद को दर्पण में देखता हूं, तो मैं उन सभी जवानों का शुक्रिया अदा करता हूं जिनका खून अब मेरी नसों में बहता हैं।”

‘द बेस्ट मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ’ नामक आत्मकथा अभिनेता संजय खान की बॉलीवुड में और इसके बाहर की यात्रा की कहानी है, जहां अभिनेता-लेखक ने स्पष्ट रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है. फिल्म से राजनीति तक, भयानक दुर्घटना और अपने जीवन के परिवर्तनकारी क्षणों, इस सब पर उन्होंने बहुत साफगोई से इस किताब में लिखा है. दिवाली से पहले पुस्तक का मुंबई में भव्य लॉन्च हुआ।

संजय खान ने 40 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है. उन्होंने ‘चांदी सोना’, ‘काला धंधा गोरे लोग’ और टेलीविजन क्लासिक ‘द सोर्ड ऑफ टीपू सुल्तान’  का निर्माण और निर्देशन किया है. उन्हें कई सम्मानों के अलावा, दो बार ‘नेशनल सिटिजन अवॉर्ड’, ‘राजीव गांधी अवॉर्ड फॉर एक्सेलेंस’ और ‘जेम ऑफ इंडिया अवॉर्ड फॉर एक्सेलेंस’ से नवाजा जा चुका है।

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