देवानंद और सुरैया की अमर पर अधूरी प्रेम कहानी 

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अली पीटर जॉन

सच्चा प्यार कोई बंदिश,कोई कानून,ऊंच-नीच,जाति, धर्म और यहाँ तक की भगवान को भी नहीं मानता। सच्चा प्यार बस हो जाता है और एक बार यह हो जाए तो फिर दुनिया की कोई ताकत  इसके रास्ते में नहीं आ सकती और यदि आपका सच्चा प्यार कुछ समय का अफेयर है तो फिर यह सच्चा प्यार नहीं है और यही कारण है कि आज हमारे पास कुछ ही सच्चे प्यार की कहानियां है जो अनंतकालीन है जैसे रोमियो जूलियट, शिरीन फरहाद,लैला मजनू,हीर रांझा की प्रेम कहानी और देव और सुरैया की प्रेम कहानी।

सुरैया 1950 के दशक की प्रमुख महिला गायिका और अभिनेत्री थी और देवानंद उस वक्त स्ट्रगलर थे जो ‘हम एक हैं’ और ‘ज़िद्दी’ जैसी फिल्में करने के बाद इस इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के प्रयास में थे। उस जमाने में सभी अभिनेता,निर्देशक और निर्माता सुरैया के प्यार में थे और सुरैया से शादी करना चाहते थे।

पर सुरैया युवा और हैंडसम देवानंद के प्यार में दीवानी हो गई। यह प्यार दोनों तरफ से था और समय के साथ और  भी गहरा होता चला गया। इस प्यार को और परवान चढ़ाने में उनकी साथ में की गई रोमांटिक फिल्में जीत, नीली आदि ने मदद कर दी।
देव लगातार तरक्की करने लगे और वो बहुत बड़े स्टार बन गए। देव को लगा कि यही सही समय है सुरैया को प्रपोज करने का। उन्होंने सुरैया को प्रपोज किया पर सुरैया थोड़ी घबराई। देव थोड़े शर्मीले इंसान थे पर उन्होंने सोच लिया था कि वह सुरैया को खोएंगे नहीं। अपने प्यार को दर्शाने के लिए देव ने सुरैया को एक डायमंड की अंगूठी दी  जिसकी कीमत उस समय में ₹3000 थी। पर यही अंगूठी आगे चलके उनके प्यार के अंत का प्रतीक बन गई।

देव ने सुरैया को एक और बार प्रपोज किया और वो सुरैया के मना करने के कारण से खुद बहुत अचंभित हो गए क्योंकि सुरैया भी उनसे बहुत प्यार करती थी। कारण यह था कि सुरैया की नानी बादशाह बेगम और उनकी मां इस रिश्ते के बिलकुल खिलाफ थी सिर्फ इसलिए क्योंकि देव हिंदू थे और सुरैया इसी वजह से लगातार देव के प्रपोजल को मना करती रही। ऐसा कहा जाता है कि देव ने उस समय की इतनी बड़ी स्टार को एक थप्पड़ लगा दिया था यह कहते हुए कि वो एक डरपोक प्रेमिका है।  उनकी प्रेम कहानी तब खत्म हुई जब उनके प्यार के दुश्मन सुरैया की नानी ने सुरैया के उंगली से जबरदस्ती डायमंड की अंगूठी निकाल दी जो देव ने सुरैया को दिया था और उसे अपने घर गोविंद महल के बाहर समुद्र में फेंक दिया। और यही इस महान प्रेम कहानी का अंत था  जो प्रेम कहानी शायद बाकि महान  प्रेम कहानियों की तरह पूरी हो सकती थी। यह सच है कि देवानंद और सुरैया की प्रेम कहानी शादी में नहीं बदल पाई पर उनकी प्रेम कहानी तब तक याद रखी जाएगी जब तक इस दुनिया में प्यार है। देव आनंद ने अपनी को-स्टार कल्पना कार्तिक से से शादी कर ली जब वो दोनों महबूब स्टूडियो में शूटिंग कर रहे थे। सुरैया ने आजीवन शादी नहीं की और उन्होंने यह साबित कर दिया कि वो एक सच्ची प्रेमिका थी। देव ने शादी कर ली पर उन्होंने हर अवसर पर सुरैया  के प्रति अपने प्यार के बारे में बातें की और कभी-कभी तो देव बात करते-करते रोने भी लग जाते थे। वो एकमात्र महिला थी जिनके लिए देवानंद रोए थे।

देवनी ने बहुत ही नाजुक और  कठिन परिस्थिति देखी अपने जीवन में जब सुरैया जिसे भारत की सबसे अमीर औरत भी कहा जाता था उनकी अचानक से उनके घर गोविंद महल में मृत्यु हो गई।

देवानंद

अगली सुबह देवानंद अपने ऑफिस ‘आनंद’ बहुत जल्दी पहुंच गये। और उन्होंने अपने स्टाफ से कहा कि ‘आनंद’ के छत पर वो एक छोटा सा टेंट लगा दे और टेंट में देवानंद एक लैंडलाइन फोन और कुछ स्क्रिप्ट के साथ चले गए। इस फोन का नंबर देवानंद ने किसी को नहीं दिया था, पता था कि सुरैया की मृत्यु के बाद मीडिया के लोगों के लगातार फोन आएंगे उनके पास।

मुझे नहीं पता क्यों पर मैं एकमात्र इंसान था जिसे देवानंद ने बुलाया और अपने साथ टेंट में समय बिताने को कहा। देवानंद अपनी पूरी कोशिश कर रहे थे कि वो अपनी  भावनाओं को छुपा  पायें पर आखिरकार उनकी आंखों से आंसू निकल ही आया और वो मेरे कंधे पर सर रखकर रोने लग गये।  मैं  आधी रात तक उनके साथ था और वो लगातार सुरैया के बारे में बात करने से खुद को रोक रहे थे और जितना वो खुद को रोक रहे थे उतना ही सुरैया उनकी हर बातों में आ रही थी।वो बार-बार अपने आंसुओं को रोकना चाह रहे थे श,अपनी आंखों को ढक रहे थे पर एक सच्चे प्रेमी के आंसू रुक ही नहीं रहे थे।

देवानंद
देव ने बताया कि सुरैया को ना सिर्फ उनसे शादी करने के लिए मना किया गया था बल्कि उनको देवानंद के साथ फिल्म करने की भी अनुमति नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि सुरैया की नानी और मां इतनी ज्यादा क्रूर हो गई थी देवानंद को लेकर कि उन्होंने आदमियों को देवानंद को मारने के लिए बोला था जब सुरैया और देवानंद का प्यार परवान पर था। सुरैया को अपनी नानी और मां के इस बुरे काम के बारे में पता था इसलिए देवानंद की जिंदगी को बचाने के लिए उन्होंने शादी करने से मना कर दिया था।
मैं देवानंद और सुरैया की प्रेम कहानी के बारे में बहुत कुछ लिख सकता हूं पर मैं उनकी पूरी कहानी नहीं लिखूंगा क्योंकि मैंने देवानंद से यह वादा किया है। और मैं उस इंसान से किया हुआ अपना वादा नहीं  तोडूंगा जिस इंसान को मैं भगवान की तरह मानता हूं।

देवानंद

आजकल फिल्मेकर्स लोगों की बायोग्राफी बना रहे हैं और अच्छे विषय की खोज में है, वो क्यों नहीं  देवीना नाम से फिल्म बनाते हैं, वो नाम जो  सुरैया ने देव को दिया था जब दोनों प्यार में थे और देव ने आगे चलकर अपने बेटी का नाम भी देवीना रखा।

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