सफल फिल्म “कैकवाँक” की हिट जोड़ी ने की फिल्म “एक दुआ” से वापसी-  ईशा देओल तख्तानी

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फिल्म समीक्षकों और अन्तराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रशंसित सफल फिल्म “केकवॉक” के बाद फिल्म निर्माता व निर्देषक राम कमल मुखर्जी ने बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा देओल तख्तानी के साथ नई फिल्म “एक दुआ” लेकर आए हैं, जिसका प्रीमियर ‘वूट सिलेक्ट’ पर ‘वूट फिल्म फेस्टिवल’ के तहत किया गया।एक सप्ताह तक चले ‘वूट फिल्म फेस्टिवल’ में भारत भर के विभिन्न निर्माताओं की पुरस्कृत “अनफिल्टर्ड” फिल्में दिखायी गयीं।

यह महज संयोग है कि फिल्म “एक दुआ” में आबिदा की मुख्य भूमिका निभाने के साथ ही इसका निर्माण कर ईशा देओल तख्तानी ने अपनी प्रोडक्षन कंपनी “भारत ईशा फिल्मस” की भी षुरूआत की हैं।

इस संदर्भ में अभिनेत्री व निर्माता ईशा देओल तख्तानी कहती हैं- “जब राम कमल मुखर्जी इस कहानी के साथ मुझसे मिले और मुझे कहानी सुनायी, तो मैं भावनात्मक रूप से इस विषय से प्रभावित हो गई। मुझे न केवल पटकथा पसंद आई, बल्कि इस कहानी ने मेरे दिल पर इस कदर असर किया कि मैने इसमें अभिनय करने के साथ ही इसे बनाने का भी निर्णय लिया। क्योंकि मुझे इस विषय पर और राम कमल मुखर्जी की निर्देषकीय प्रतिभा पर पूरा विश्वास था। इस फिल्म में मेरे साथ राजवीर अंकुर सिंह, बार्बी शर्मा और निक शाह भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।”

जबकि फिल्म के निर्देषक राम कमल मुखर्जी कहते हैं- “फिल्म ‘केकवॉक’ को मिली सफलता के बाद हम ईशा देओल के साथ कुछ अनोखा करने की योजना बना रहे थे। इसी बीच मेरी मुलाकात लेखक अविनाश मुखर्जी से हुई। अविनाष मुखर्जी ने मुझे यह कहानी सुनाई। कहानी सुनकर मैं उत्साहित हुआ और मैंने इस कहानी पर बनने वाली फिल्म ‘एक दुआ’ में अभिनय करने के लिए तुरंत ईशा से संपर्क किया।मेरा मन कह रहा था कि फिल्म की बेहतरीन विषयवस्तु के चलते उन्हें कहानी पसंद आएगी। जब मैं ईशा को कहानी सुना रहा था, तब मैं उसकी आँखों में आँसू देख रहा था। कहानी सुनते हुए वह बहुत भावुक हो गई। लेकिन सच कहूँ तो मुझे उम्मीद नहीं थी कि वह मेरे लिए फिल्म बनाने की पेशकश करेगी।”

फिल्म “एक दुआ” की कहानी मुंबई के दिल में स्थित है। यह कहानी दो खूबसूरत बच्चों दुआ और फैज की मां आबिदा के जीवन से संबंधित है। आबिदा के पति सुलेमान एक टैक्सी ड्राइवर हैं जो उधारदाताओं से पैसे उधार लेकर किसी तरह घर चलाते हैं। ईद से एक दिन पहले परिवार जश्न मनाने की तैयारी करता है। सुलेमान ने एक कर्जदार से कुछ रकम भी उधार ले ली है। लेकिन कुछ गड़बड़ है। ऐसा लगता है कि दोनों बच्चों के बीच कुछ भेदभाव है, क्योंकि आबिदा की सास रिहाना अपने पोते फैज व बेटे सुलेमान के प्रति अपनी आत्मीयता रखती हैं, जबकि छोटी दुआ अपनी दादी व पिता के प्यार के लिए तरसती रहती है। आबिदा को छोड़कर घर में किसी को दुआ की परवाह नहीं है। जैसे ही फिल्म सामने आती है हम बच्चों के बीच भेदभाव के कारण का खुलासा करते हैं।

निर्देशक राम कमल मुखर्जी कहते हैं- “फिल्म का नुकीला चरमोत्कर्ष आपको फिल्म के आखिरी फ्रेम तक बांधे रखेगा।” फिल्म वेंकीज और मिश्रित मोशन पिक्चर्स द्वारा सह-निर्मित है, जबकि संगीत शैलेंद्र कुमार और धुरबो पॉल द्वारा रचित है। फिल्म को मोधुरा पालित ने शूट किया है और बोधादित्य बनर्जी द्वारा संपादित किया गया है।

उधर ईशा देओल आगे कहती हैं- ‘‘राम कमल हार्ड हिटिंग फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी फिल्मों में महिला किरदार काफी सषक्त होते हैं। उनकी पिछली फिल्म ‘सीजंस ग्रीटिंग्स’ और ‘रिक्शावाला’ को जबरदस्त षोहरत मिली। अब “एक दुआ” के साथ दर्शकों को उनकी कहानी कहने की शैली पसंद आएगी। निर्देशक के तौर पर वह बेहद रचनात्मक है और एक कलाकार को अपनी अभिनय क्षमता को निखारने के लिए पूरी छूट देते है। वह कैमरे के सामने कलाकार को प्रतिबंधित नहीं करते हैं। जब एक कलाकार कैमरे के सामने किसी दृश्य को अपने अभिनय से संवार रहा होता है,उस वक्त उसे अपने अभिनय के साथ खेलने की पूरी स्वतंत्रता की आवश्यकता होती है।”

फिल्म की आधिकारिक तौर पर अभिषेक बच्चन ने अपने सोशल मीडिया हैं डल पर घोषणा की और बाद में पूरी इंडस्ट्री ने ईशा और राम कमल को उनके उद्यम के लिए शुभकामनाएं दीं। राम कमल ने कहा- “जब दोस्त और बिरादरी आपको शुभकामनाएं देते हैं तो अच्छा लगता है। मैं ईशा के लिए खुश हूं क्योंकि वह और उनके पति भरत एक निर्माता बन गए हैं। उम्मीद है कि वह सभी माध्यमों के लिए अधिक उत्कृष्ट सामग्री बनाएंगे।”

फिल्म को फिल्म क्रिटिक्स से मिल रहे अच्छे रिव्यू से राम कमल का अपनी कहानी पर विष्वास बढ़ गया है। वह कहते हैं- “बेशक! जब कोई आपकी फिल्म के बारे में सकारात्मक बात करता है, रोता है, आपको गले लगाता है या स्क्रीनिंग के बाद मजबूती से आपका हाथ पकड़ता है, तो यह दर्शाता है कि फिल्म ने उन्हें कितनी गहराई से छुआ है। सिनेमा का छात्र होने के नाते, मैं हमेशा घबराता हूं और समीक्षाओं की चिंता करता हूं । क्योंकि यह मेरे लिए एक रिपोर्ट कार्ड की तरह है। मैं विनम्रतापूर्वक गुलदस्ते और ईंट-पत्थर स्वीकार करता हूं!”


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