राजेश खन्ना की आखिरी दिनों की दास्ता इसके साथ ही उनकी तीसरी पुण्यतिथि पर उनकी कुछ यादें

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फिल्म शक्ति के लिए यह एक नई सुबह थी क्योंकि फिल्म का लाॅन्च जुहू, मुम्बई के पांच सितारा होटल में शुरू किया जा रहा था। फिल्म में दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, राखी, स्मिता पाटिल जैसे महान कलाकार रहे। राजेश खन्ना एक शासक के रूप में बाॅलीवुड पर राज करते थे भले ही अमिताभ बच्चन अपनी अदायगी से बाॅलीवुड में अपनी जगह बना चुके हो। राजेश खन्ना एक ऐसे कलाकार है जिसे कोई नहीं हरा सकता व राजेश खन्ना जैसा स्टार न कभी आया है और न कभी आएगा। जिस तरह से उन्होंने अपने अद्भुत करियर की शुरूआत की थी उसमें वह बिल्कुल भी बदलाव नहीं चाहते थे। फिल्म शक्ति के आयोजन स्थल पर अमिताभ बच्चन समय से पहुंच चुके थे और फिल्म निर्माताओं व फैंस से घिरे हुए थे। तो वही राजेश खन्ना जो आयोजन के चीफ गेस्ट थे एक घंटा लेट पहुंचे जो कि बाॅलीवुड में उनका एक स्टाइल माना जाता था। राजेश खन्ना के आयोजन में पहुंचने पर जो लोग अमिताभ बच्चन के पास थे वह राजेश खन्ना को देख कर भी उनके पास नहीं गए और यह सब देख राजेश खन्ना का चेहरा उतर गया। राजेश खन्ना के प्रशंसक जो उनके पास आॅटोग्राफ लेने के लिए खड़े थे उनसे पास से आॅटोग्राफ बुक छीन कर अमिताभ बच्चन के पास चले गए।

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राजेश खन्ना भले ही करियर के क्षेत्र में नीचे की ओर गिरते जा रहे थे पर उन्हें कभी भी किसी ने अमिताभ बच्चन की तरह बदकिस्मत नहीं कहा। उस दिन राजेश खन्ना इतने दुखी थे कि आयोजन स्थल को छोड़ आशीर्वाद (बंगले) चले गए। वहां पहुंच वह शाम से आधी रात तक ड्रिंक करते रहे और अपने बंगले की टेरेस पर पहुंच आसमान की तरफ देख आखों में आंसू लिए कहने लगे हे भगवान मैं ही क्यों? राजेश खन्ना को नाकामयाबी बिलकुल भी मंजूर नहीं थी आखिरकार उन्होंने 25 साल तक बाॅलीवुड पर राज किया था। अमिताभ बच्चन हर तरह से ऊपर उठने की लगातार कोशिश कर रहे थे वही राजेश खन्ना बहुत सी कोशिशों के बाद भी करियर की उन ऊंचाईयों को नहीं छुपा रहे थे। राजेश खन्ना वो बाॅलीवुड स्टार रहे जो सिल्वर जुबली व गोल्डन जुबली मना रहे थे पर अब उनकी सारी फिल्मों को फ्लाॅप फिल्मों में गिना जा रहा था। राजेश खन्ना ने मल्टी-स्टार्स फिल्म में काम करने से इंकार कर दिया और फिल्म ‘धरम कांटा’ जिसमें राज कुमार, जितेंद्र, अमजद खान, रीना राॅय, सुलक्षणा पंडित, जैसे कलाकार रहे इस फिल्म में काम करने को मंजूर किया। इसके साथ ही साउथ इंडियन फिल्म ‘मकसद’ जिसमें श्री देवी, जितेंद्र, जयाप्रदा जैसे महान कलाकार रहे और बाॅलीवुड के लगभग सभी विलेन थे ऐसी फिल्म में राजेश खन्ना नें काम करना मंजूर किया। इसके बाद राजेश खन्ना नें फिल्म ‘अवतार’ (जिसमें वह बूढ़ें पिता के रूप में नजर आए जो अपने बच्चों के द्वारा तिरस्कार के अपमान में जलता हैं) में काम करना मंजूर किया।

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2009 तक उन्हें एक बतौर अभिनेता के रूप में काम नहीं मिला व राजेश खन्ना इतने परेशान हो चुके थे कि ज्यादातर समय अपने आॅफिस में बिताते थे और देर रात ड्रिंक किया करते थे। राजेश खन्ना का शायद ही कोई साथी रहा होगा उन निर्माताओं को छोड़ जिनके पास कोई काम न था। वह बहुत ही मुसीबत भरे दिन गुजार रहे थे व अपने बंगले में सिर्फ और सिर्फ सोने ही आते थे। तभी उन्हें नए चैनल कलर्स के रिप्रेजेंटेटिव द्वारा कलर्स के शो बिग बाॅस को होस्ट करने का प्रस्ताव दिया गया तो राजेश खन्ना नें बिना सोचे-समझे यह कहा कि आप जो कहेंगे मैं वो करूंगा पर जितने रुपये अमिताभ बच्चन ले रहे हैं केबीसी होस्ट करने के मुझे उससे ज्यादा रुपये चाहिए। जो व्यक्ति कलर्स चैनल की तरफ से आए थे उस व्यक्ति के यह सुन रंग उड़ गए और वह राजेश खन्ना के बंगले से यह कह कर चले गए कि अगले दिन आएंगे पर वो व्यक्ति कभी दुबारा राजेश खन्ना के बंगले में नहीं गए। एक बार की बात है महिलाओं के एक समूह ने राजेश खन्ना को कोलकाता के आयोजन में आने को आमंत्रित किया। राजेश खन्ना नें खुशी-खुशी उनका आमंत्रण स्वीकार किया। कोलकत्ता के ग्राउंड के 20 हजार से भी अधिक महिलाएं राजेश खन्ना की एक छलक पाने के लिए एकत्रित हुई थी। उस रात राजेश खन्ना बेहद रोमांचित थे साथ ही उन्हें एक आस थी कि आज उनका जादू लोगों पर जरूर दिखेगा पर ऐसा कुछ नहीं हुआ था। एक समय था जब राजेश खन्ना का जन्मदिन जो कि 29 दिसम्बर को होता था वह एक नेशनल त्यौहार के रूप में मनाया जाता था।

 

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उनके बंगले के बाहर भारी भीड़ जमा होती थी और फिल्म इंडस्ट्री के वो लोग जो घंटों भर से राजेश खन्ना का उनके बंगले के बाहर इंतजार करते थे। उन्हें जन्मदिन की मुबारक बाद देने के लिए दौड़ते थे। उनकी जिन्दगीं में ऐसा भी समय आया जब वह अपने जन्मदिन पर अकेले थे। बात 2010 की है राजेश खन्ना के जन्मदिन के दिन वह बिल्कुल अकेले थे और उनका सिर्फ एक ऐसा साथी था जो उस दिन उनके अकेलेपन का साथी रहा और वो थे एक्टर शशि किरण जो उनके साथ ड्रिंक कर रहे थे। रात के 12 बजे शशि किरण ने मुझे फोन किया और कहा कि राजेश खन्ना बहुत ज्यादा ड्रिंक कर चुके हैं और फूट-फूट कर रो रहे हैं और उन्हें आॅफिस छोड़ आने को कह रहे हैं पर मैं नहीं गया। अगले दिन राजेश खन्ना ने मुझे बुलाया और कहां कि अली तुम इतने कठोर कैसे हो सकते हो। उनके इस सवाल का मेरे पास कोई जवाब नहीं था। आखिरी बार मैं उनके साथ आशीर्वाद में था। जिसमें उन्होंने अपना एक छोटा सा आॅफिस बना रखा था। मेरा और राजेश खन्ना के अलावा वहां कोई न था। उन्होंने मुझे अपनी फिल्म ‘वफा’ के बारे में कहा कि वह फिल्म साइन कर चुके हैं और उन्हें इसी तरह की फिल्म में काम करने का इंतजार था।

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वास्तव में राजेश खन्ना नई पीढ़ी की सोच रखते थे तभी लोग उनके बारे में कहा करते थे ऊपर आका, नीचे काका। उनके आॅफिस के कोने में सिर्फ एक ट्राफी देखते हुए बोले ‘मालूम है ये आईफा का लाइफ टाइम अवाॅर्ड मुझे किसने दिया, अमिताभ बच्चन ने।’ ये विश्वास करना मुश्किल था कि ये शब्द वो उस व्यक्ति के है जो अमिताभ बच्चन को देखना भी पसंद नहीं करते थे। राकेश खन्ना के उनके आखिरी शब्द यह थे ‘बहुत से ऐसे पत्रकार व लेखक है जो सुपरस्टार के बारे में किताब लिखना चाहते हैं लेकिन अभी सुपरस्टार कि कहानी खत्म कहां हुई है?’

 


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Mayapuri

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