फिल्म ‘अमर प्रेम’ में लता मंगेशकर का गाना “रैना बीती जाए” के पीछे की कहानी

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Lata Mangeshkar

जिस तरह से हम आम तौर पर चाय के साथ टोस्ट या ब्रेड या केक या बिस्कुट लेते हैं, बंगाल में हिंग कचौरी खाते हैं।

श्री विभूति भूषण बंदोपाध्याय की कहानी का भी यही शीर्षक था- “हींगेर कोचूरी”। यह एक प्रास्टिटूट कुसुम और उसके स्कूल जाने वाले दोस्त की कहानी थी। कहानी के रूप में लड़का अपनी भावनाओं को प्रकट करता है।

लेखक-निर्देशक अरविंद मुखर्जी की बंगाली फिल्म “निशी पद्मा” हींगेर कोचूरी” की कहानी पर आधारित थी

Amar Prem

इस बंगाली फिल्म की खूबसूरत कहानी एक प्रास्टिटूट पुष्पा की एक सम्मानजनक और अमीर अनंत बाबू के साथ रोमांस की कहानी है। फिल्म में बंगाली सुपरस्टार उत्तम कुमार और सबित्री चटर्जी मुख्य भूमिका में थे।

लेखक-निर्देशक अरविंद मुखर्जी ने अपने करीबी दोस्त निर्माता-निर्देशक शक्ति सामंत को अपनी बंगाली फिल्म की पटकथा का हिंदी में अनुवाद करने के लिए कहा।

सामंत ने फिल्म का नाम “अमर प्रेम” रखा और मुख्य नायक का नाम अनंत बाबू से बदलकर आनंद बाबू रख दिया गया।

राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की स्क्रीन जोड़ी को उनकी फिल्मों “आराधना” और “सफ़र” की सुपर-डुपर सफलता के बाद, मुख्य भूमिकाओं के लिए चुना गया था।

यह तब था जब राजेश खन्ना भारत में युवा महिलाओं का सबसे बड़े क्रश थे। बस उनकी एक झलक के लिए, लड़कियां घंटों उनके बंगले के बाहर इंतजार किया करतीं थी।

अगला सवाल था: संगीत निर्देशक कौन होगा? कुछ चर्चाओं के बाद, राहुल देव बर्मन का नाम तय किया गया

R.D Burman

आरडी “रैना बीती जाये, शाम ना आये” गीत को बहुत अलग तरीके से कंपोज़ करना चाहते थे। वह चाहते थे कि बड़े पैमाने पर अपील करते हुए इसे शास्त्रीय संगीत में शामिल किया जाए।

आरडी ने अक्सर अपने पिता सचिन देव बर्मन को एक बंगाली गीत “बेला बोये जाये” गेट सुना था और वह धुन उनके मन में बस गई थी। गीतकार आनंद बख्शी की कुछ मदद लेते हुए आरडी ने नोट्स की कम्पोजिंग शुरू की।

मुखड़ा में उन्होंने सुबह की राग “तोडी” को चुना और अंतरा में रात्रि राग “खमाज” को चुना था। परिणाम, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया की बांसुरी और कुछ गिटार, पंडित शिव कुमार शर्मा द्वारा संतूर से ओत-प्रोत इस गीत का अविस्मरणीय अनुभव था।

कहानी यह है कि एस डी बर्मन को पंचम का संगीत “रैना बीती जाए” इतना पसंद आया कि उन्होंने संगीतकार मदन मोहन को से कहा, ‘मदन, राहुल का यह गीत सुनो!’। और मदन मोहन इम्प्रेस्सेद थे और उन्होंने आरडी को बधाई दी।

और लता मंगेशकर का तो क्या ही कहना जिन्होंने इस गाने को अपनी करिश्माई आवाज़ दी थी।

तो यह थी “अमर प्रेम” और “रैना बीती जाए” की कहानी।

अनु- छवि शर्मा


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