बनती बिगड़ती बॉलीवुड की नई पीढ़ियों की कहानी

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ये दुनिया, ये संसार, ये सारा ब्रह्माण्ड एक दूसरों की पीढ़ियों से चलता चला आ रहा है. क्या कहा? ये ज़्यादा हो गया? मैं कहता हूँ कतई नहीं! अगर गौर करें तो फलक पर चमकता चाँद भी तो पृथ्वी की ही संतान है, इसी से तो टुकड़ा निकला है और उसकी चमक उस सूरज से है. हज़ारों गानों और सैकड़ों त्योहारों / मान्यताओं / कैलेंडरों को चलाने वाला चाँद भला अपने ख़ुद के वजूद में क्या है? क्या उसके पूर्वजों के बिना उसकी कोई पहचान है?

बस यही हाल पूरी दुनिया का है और पूरी दुनिया को समेटने के लिए अकेली हमारी फिल्म इंडस्ट्री काफी है. यहाँ आप ब्रह्माण्ड भी देख सकते हैं. तो आइए इस बार हम आपको कुछ नायाब बॉलीवुड जनरेशन्स के बारे में बताते हैं, कुछ ऐसे हैं जिन्होंने अपने पिता के काम और नाम को और निखारा है, तो कुछ ऐसे हैं जिन्होंने अपने पिता की पहचान को न चाहते हुए भी धूमिल किया है तो कुछ ऐसे भी हैं, जो अपने माता-पिता के प्रोफेशन से हटकर कुछ करने में कामयाब हुए हैं.

अब जब बात पीढ़ियों की है तो सबसे पहले बॉलीवुड के सबसे पुराने खानदान से शुरु करना ही सही होगा.

पृथ्वीराज कपूर जब मुंबई आए थे तब सही मायने में फिल्म इंडस्ट्री घुटनों के बल चलने वाले एक बच्चे सरीखी थी. उस बच्चे में आवाज़ नहीं थी. पृथ्वीराज कपूर की हाज़िरी में ही वो पहली आवाज़ निकली थी. फिल्म आलम आरा से पृथ्वीराज कपूर फिल्म इंडस्ट्री के शुरुआती कलाकारों में से एक बन गये थे. उनके बाद उनके बेटे राज कपूर ने न सिर्फ एक्टिंग बल्कि डायरेक्शन, प्रोडक्शन और एडिटिंग में भी अपने पिता का नाम गर्व से ऊँचा किया. राज कपूर के साथ साथ उनके भाई शम्मी और शशि कपूर ने भी उस लेगेसी को, उस विरासत को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.


अब शम्मी और शशि भले ही किनारे रह गये लेकिन राज कपूर के बेटे ऋषि कपूर ने अपने दादा और पिता की विरासत को संभालते हुए, अमिताभ बच्चन के दौर में, एक्शन फिल्मों के दौर में भी अपना वर्चस्व बनाया और पहली ही फिल्म से सुपरस्टार बनकर इंडस्ट्री पर 40 साल तक टिके रहे.

अब ऋषि कपूर के बेटे रणबीर कपूर भी युवा दिलों की धड़कन हैं और दूसरी ओर, राज कपूर के बेटे रणधीर कपूर भले ही ख़ुद बहुत नाम न कर पायें हों, लेकिन उनकी बेटियां करिश्मा और करीना टॉप की एक्ट्रेस रह चुकी हैं. करीना तो आज भी मोस्ट डिमांडिंग एक्ट्रेस में से एक हैं.

कुछ इसी तरह सुरिंदर कपूर ने फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत भले ही गीता बाली के असिस्टेंट के रूप में की हो पर आगे चलकर वो एक जाने-माने फिल्म प्रोडूसर बने और उन्हीं के नक़्शेकदम फॉलो करते हुए उनके बेटे बोनी कपूर भी बेहतरीन प्रोडूसर बने. वहीं उनके दुसरे बेटे अनिल कपूर ने एक्टिंग की दुनिया में ऐसा नाम कमाया कि उनके पिता की पहचान अनिल कपूर के नाम से हो गयी. आखिर एक बाप को और क्या चाहिए होता है. यही कि बेटे की पहचान उसके नाम से शुरु हो लेकिन एक समय ऐसा आए जब उसकी पहचान बेटे के नाम से की जाए.

थोड़ा आगे बढ़ें तो धर्मेंद्र के दोनों बेटों, सनी देओल और बॉबी देओल ने अपने पिता के नाम को इस कद्र आगे बढ़ाया है कि कोई कह नहीं सकता कि धर्मेंद्र के बिना इनकी कोई पहचान नहीं. ख़ासकर सनी देओल के लिए तो पूरा पंजाब, पूरा कैनडा आज भी दीवाना रहता है.

इसी तरह उस समय के पॉवरफुल एक्टर सुनील दत्त ने जहाँ मदर इंडिया के बाद से ही दर्शकों के दिलों में एक ख़ास जगह बनाई, वहीं उनके बेटे संजय दत्त ने भी एक से बढ़कर एक फिल्में देकर अपने पिता की विरासत को कायम रखा. हालाँकि इज्ज़त कमाने के मामले में संजू ज़रा चूक गये, कई विवादों और केस में उनका नाम लिप्त हुआ और उन्हें जेल भी जाना पड़ा, जिसके चलते उनके पिता की इज्ज़त आर काफी चोट पहुँची, पर आज संजय दत्त बिल्कुल सीधे रास्ते पर हैं और अब भी वो किसी फिल्म में नज़र आ जाएँ तो उनकी एक्टिंग की तारीफ ज़रूर होती है.

जैसे हमने पृथ्वीराज कपूर फैमिली देखी थी, कुछ वैसा ही हाल भट्ट फैमिली का भी है. नानाभाई भट्ट ब्लैकएंड वाइट फिल्मों के एक जाने माने फिल्ममेकर थे. वहीँ उनके बेटे मुकेश और महेश भट्ट भी फिल्ममेकिंग में यूनीकनेस और बोल्डनेस वाले अपने दौर के इकलौते फिल्ममेकर्स रह चुके हैं. हालाँकि महेश भट्ट की अगली पीढ़ी, उनकी बेटियां पूजा भट्ट और आलिया भट्ट फिल्ममेकिंग में न जाकर एक्टिंग में एक्टिव हुईं और आज आलिया भट्ट ने भी अपना प्रोडक्शन हाउस खोल लिया है.

कुछ ऐसा ही कमाल विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना ने भी किया, उनको भी फिल्मों में भले ही कम काम मिला लेकिन उनकी ऐक्टिंग और उनकी पॉपुलरिटी विनोद खन्ना के नाम की मोहताज नहीं है।

साथ ही अगली पीढ़ी, यानी 80 के दशक के स्टार्स के बच्चों में जैकी श्रॉफ के बेटे टाइगर श्रॉफ ही इकलौते ऐसे स्टार हैं जो अपने पिता की लेगेसी आगे बढ़ा रहे हैं। बाकी सनी देओल का लड़का अभी इंडस्ट्री में नया है और सुनील शेट्टी की लड़की दो एक फिल्मों में कुछ खास कमाल न दिखा सकी है।

नायिकाओं की बात करें तो ऐक्ट्रिस तनुजा तो सुपरहिट थीं हीं, उनकी काजोल भी 90s में टॉप की हिरोइन रह चुकी हैं और आज भी उनकी ऐक्टिंग की दुनिया कायल है।

उन्हीं की बहन और अवॉर्ड विनिंग ऐक्ट्रिस नूतन के बेटे मोहनीश बहल भले ही माँ की तरह लीड ऐक्टर न बन सकें पर कैरिक्टर रोल में उनका कोई जवाब नहीं है।

ऐसे पीढ़ी दर पीढ़ी जहाँ एक्टर्स अपने बच्चों को भी प्रोमोट करते थे, वैसे संगीतकारों ने या तो कोशिश न की, या संगीत पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ न सका. लेकिन फिर भी कुछ गिने चुने उदाहरण हैं जो अपवाद की सूरत ले सकते हैं.

दीनानाथ मंगेश्कर क्लासिकल संगीत और थिएटर एक्टिंग में जाना माना नाम थे, उनके पास दो सौ लोगों का स्टाफ हुआ करता था. लेकिन उनके जाने के बाद उनकी बेटियों लता, उषा और आशा मंगेश्कर ने उनके नाम को बुलंदियों पर पहुँचा दिया. ख़ासकर लता और आशा ने तो बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री पर बाकायदा राज किया था.

ऐसे ही, सचिन देव बर्मन भी संगीत दुनिया में दशहरी आम की हैसियत रखते थे, उनके बेटे राहुल देव बर्मन ने भी अपने पिता के जितना तो नहीं, पर उनसे अलग हटकर, अलग श्रेणी के संगीत में अपना बहुत नाम किया और कुछ नगमें तो उनके नाम ऐसे हैं जिन्हें दोबारा ख़ुद आरडी बर्मन भी नहीं बना सकते हैं.

ऐसे ही संगीत की दुनिया के रोशन चिराग कहलाये जाने वाले संगीतकार रोशन के छोटे बेटे राजेश रोशन ने भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए संगीत में ही नाम कमाया. हालाँकि उनका बेस्ट काम उनके भाई और ग्रेट फिल्ममेकर राकेश रोशन की फिल्मों में ही देखने को मिला. पर संगीत की दुनिया में राजेश रोशन कोई छोटा नाम नहीं है.

संगीतकारों में जिस बेटे ने अपने बाप का सबसे ज़्यादा नाम रौशन किया, वो और कोई नहीं सरदार मलिक के बेटे अनु मलिक हैं। सरदार मलिक भी नामी संगीतकार थे लेकिन 90 के दशक में अनु मलिक ने तो फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया है। आज भी वो जज बने या किसी शो में गेस्ट बनकर आयें, उनका जलवा कामयाब रहता है।

फिल्ममेकर्स में यश चोपड़ा और यश जोहर जहाँ बुलंदियों पर रहा करते थे, उनके बेटे आदित्य चोपड़ा और करण जौहर भी आज इंडस्ट्री में टॉप मोस्ट फिल्ममेकर्स में काउंट होते हैं. इनके पिता दोस्त थे इसलिए ये दोस्ती बच्चों में भी ट्रांसफर हुई और शायद आप न जानते हों कि करण और आदित्य में ये पैक है कि जब एक फिल्म बना रहा होता है तब दूसरा सिर्फ प्रोडक्शन पर ध्यान देता है, डायरेक्शन नहीं करता, ऐसे ही जब दूसरा डायरेक्टर चेयर पर विराजमान होता है तो पहला सिर्फ उसे सपोर्ट करता है.

यूं ही राइटर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, लीरिसिस्ट गुलज़ार और ऐक्ट्रिस राखी की बेटी मेघना भी पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए आज जानी मानी फिल्ममेकर है।

कामयाबी की बात बहुत हुईं, अब कुछ ऐसे बाप भी हैं जिनके बच्चों ने नाम बढ़ाना तो दूर, बाकायदा डुबाया है और इनमें भी यश चोपड़ा ही सबसे आगे हैं. उनके छोटे बेटे उदय चोपड़ा ने लाख कोशिशें कीं पर चाहकर भी अच्छे एक्टर न बन सके और आज ख़ुद को इंडस्ट्री से आउट घोषित कर चुके हैं.

दूसरा नाम शहंशाह कहलाये जाने वाले अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन का है. अभिषेक हालाँकि फ्लॉप नहीं हैं पर आज भी उनकी ज़िन्दगी में फिल्म इंडस्ट्री की ओर से स्टेबिलिटी नहीं है. उनकी एक फिल्म चलती है तो तीन फ्लॉप होती हैं और अगली फिल्म का पता नहीं होता है. यही हाल मशहूर अदाकार फिरोज़ खान के बेटे का भी हुआ, फिरोज़ ने जहाँ इंडस्ट्री पर एक समय अपना पूरा जलवा कायम रखा वहीं उनके बेटे फरदीन खान काफी कोशिशों के बाद भी, कुछ एक फिल्में हिट देने के बाद भी कुछ खास नहीं कर पाए।

इसी तरह हेमा मालिनी और धर्मेन्द्र की लड़की ईशा देओल भी काफी जद्दोजहद के बाद इंडस्ट्री से आउट हो गईं।

कुछ यूँ ही बलराज साहनी जहाँ टॉप के एक्टर्स में गिने जाते थे पर उनके बेटे परीक्षित साहनी काफी स्ट्रगल के बाद सिनेमा से हटकर टीवी इंडस्ट्री में ज़रूर अपना नाम बनाने में कामयाब हुए। लेकिन बलराज साहब जैसा उनकी पीढ़ी में दूसरा कोई न हो सका।

अब कुछ ऐसे स्टार्स का भी जिक्र जरूरी है जो खुद कुछ करते थे, बच्चों ने कुछ और किया पर आज बाप से ज़्यादा लोग बच्चों को पहचानते हैं।

इनमें मेरी टॉप फेवरेट अख्तर फैमिली है। जां निसार अख्तर से शुरु करें तो वह एक सूफियाना शायर थे। उनके बेटे जावेद अख्तर पटकथा लेखक और फिर गीतकार हुए, उनके बेटे फरहान अख्तर टॉप के फिल्ममेकर और अब ऐक्टर भी हैं, साथ ही उनकी बहन और जावेद की बेटी ज़ोया अख्तर राइटर और फिल्ममेकर हैं। एक अरसे से पूरा परिवार तरह तरह की कलाओं से बॉलीवुड में की इमारत बुलंद कर, पिछले नाम से ऊँची मंज़िल उठा रहा है।

यही हाल मशहूर राइटर सलीम खान के लिए भी कह सकते हैं कि उनके बेटे सलमान ने लेखन की बजाए ऐक्टिंग करिअर चुना, हालांकि वो लिखना चाहते थे, वहीं सलीम खान इंडस्ट्री में ऐक्टर बनने आए थे, लेकिन दोनों बाप बेटों ने अपने मन के विपरीत जाकर अपनी अपनी फील्ड में शीर्ष स्थान स्थापित किया है।

इन्हीं की तरह कमाल के डायरेक्टर प्रडूसर राकेश रोशन के बेटे हृतिक रोशन ने ऐक्टिंग की दुनिया में अपना परचम बुलंद किया है।

अब दो ऐसे नाम भी मैं लिखना चाहूँगा, जो खुद पर्दे से कहीं पीछे, एक्शन से जुड़े थे पर उनके बेटे आज इंडस्ट्री का बहुत बड़ा नाम हैं।

इनमें सबसे पहले तो एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन के बेटे अजय देवगन हैं, भोले बाबा सी आँखें लिए अजय अपने पिता से चार हाथ आगे निकलकर बॉलीवुड के सुपरस्टार बने हैं और उनका वर्चस्व आज भी कायम है। दूसरे फाइट मास्टर और अमिताभ बच्चन के दोस्त शेट्टी के बेटे रोहित शेट्टी हैं।  रोहित आज की डेट में एनर्टैन्मन्ट देने वाले बेस्ट डायरेक्टर्स में से एक हैं। उनकी फिल्में, उनकी पर्सनैलिटी सब दर्शकों को बहुत लुभाती हैं।

इसी कड़ी में तीसरा नाम एक्शन डायरेक्टर श्याम कौशल के बेटे विकी कौशल का है। विकी इन दिनों तेज़ी से उभरते सितारे हैं। ब्लॉकबस्टर उरी द सर्जिकल स्ट्राइक हो या आने वाली वॉर ड्रामा ‘मानेकशॉ’ विकी कौशल की पॉपुलरिटी दिनों दीं सेंसेक्स की तरह बढ़ती ही जा रही है।

ऐसे कालाकारों की लिस्ट बिलाशक लंबी ही जायेगी, लेकिन हम यहाँ बात को इस सिरे पर छोड़कर आपके पाले में डालते हैं कि जो नई पीढ़ी होशियार है उनका तो चलता है, पर क्या हर माँ-बाप के लिए ये कम्पल्सरी हो गया है कि वह अपनी संतान को बॉलीवुड में कम से कम दो तीन बार ट्राई करने के लिए लाए ही लाए? क्या इसके बिना करिअर ऑप्शन अवैलबल ही नहीं हैं?

इस सवाल के दो मुमकिन जवाब मौजूद हैं कि हर माँ-बाप की तरह बॉलीवुड के माँ-बाप भी अपना बीता कल अपने बच्चों में देखते हैं तो इसमें हर्ज़ क्या है, और दूसरा जवाब है कि पैसे के अंबार से ढकी हमारी बॉलीवुड इंडस्ट्री, भला कोई कैसे न इसका मोह पाले। शायद यही कारण है कि आने वाले दिनों में सुनील शेट्टी की लड़की, आथिया, उनका लड़का अहान, डिम्पल कपाड़िया की बहन, सिम्पल कपाड़िया का लड़का करन, जावेद जाफरी का बेटा मीज़ान, चंकी  पांडे की बेटी अनन्या और श्रीदेवी की बेटियाँ जाह्नवी और खुशी, आए दिन फिल्मों में देखने को मिलेंगी।

  • सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’
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