‘इस बार होली पर दोस्तों के साथ कुछ बदमाशियां करने का इरादा है’’ – शरिब हाशमी-

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शारिब हाशमी मुबंई के होने के नाते हर त्यौहार में बढ़चढर कर हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें होली भी उनका पसंदीदा त्यौहार रहा है । स्कूल कालेज के वक्त तक वे सारे त्यौहारों को मनाते रहे हैं । लेकिन अब फिल्मों में व्यस्त होने के बाद त्यौहारों के लिये उनका क्या कहना है , खासकर होली को लेकर वे क्या कहते हैं ।

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मुझे पता है कि स्कूल के दिनों मैं अपने हम उम्र दोस्तों के साथ टोली बनाकर होली खेला करता था । ये सब दसवी क्लास तक चलता रहा । लेकिन उसके बाद व्यस्तता के चलते तकरीबन सारे त्यौहार पीछे छूटते चले गये । रह गई बस उनकी यादें । लेकिन अब एक बार फिर वे दिन याद आ रहे हैं ।
दरअसल मुझे होली का मकसद बहुत पसंद है ।होली आते ही मेरे जेहन में फिल्म शोले के होली गीत की पंक्तीयां ताजा हो जाती है कि ‘होली संग दिल मिल जाते है रंगों में रंग घुल जाते हैं ’ और याद आ जाते हैं सदाबहार गीतकार आनंद बक्षी ।
वाकई वक्त के साथ होली के मायने भी बदल गये हैं । पहले होली जैसे पर्व मिलने मिलाने का बहाना हुआ करते थे । इस दिन सारे गिले षिकवे भूलाकर दुश्मन भी गले मिलते देखे गये हैं । दो दोस्त एक दूसरे के लिये दुआयें  मांगते देखे गये हैं । लेकिन सब कुछ बदल गया । क्योंकि अब ये सारी चीजें एसएमएस, वाॅट्सअप सा ट्वीट्र जैसी आधुनिक तकनीक में सिमट गई है । आज सब कुछ इनके द्धारा ही हो जाता है । लेकिन आधुनिक तकनीक ने काफी कुछ दिया है तो काफी कुछ लिया भी है ।
जंहा तक इस होली की बात है तो इसी महीने मेरी फिल्म ‘बदमाशियां’ रिलीज हुई हैं तो इस बार होली पर दोस्तों के साथ कुछ बदमाशियां करने का इरादा है ।

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Mayapuri