जन्मदिन पर विशेष: अमरीश पुरी का 36 साल पुराना इंटरव्यू  

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अमरीश पुरी के 84 वें जन्म दिवस पर ज्योति वेंकटेश ने 36 साल पहले फ्री प्रेस बुलेटिन में 1 मार्च, 1980 को अमरीश पुरी का इंटरव्यू लिया था

मोगांबो खुश हुआ

स्वर्गीय अमरीश पुरी मदन पुरी के छोटे भाई के रूप में जाने जाते थे। आज वह फिल्म इंडस्ट्री में खुद की एक महत्वपूर्ण जगह बनाए हुए है। वास्तव में फिल्म निर्माताओं द्वारा उनकी भयंकर विलेन वाली भूमिका की मांग की जा रही थी। अमरीश पुरी भले ही फिल्मों में नेगेटिव किरदार में नज़र आते हो, लेकिन निजी जीवन में अमरीश पुरी एक बेहतरीन व्यक्ति के रूप में जाने जाते रहे है।

अमरीश हुकुम का पत्ता के रूप में जाने जाते थे।

जब अमरीश पुरी से पूछा गया कि क्यों वो मंच के लिए बड़ी स्क्रीन पसंद करते हैं, तो उन्होंने बात करते हुए कहा कि ‘स्टेज व थियेटर आपको एक सभ्य जीवन कमाने में मदद नहीं कर सकता। यहां तक की विदेशों में भी पीटर ओतुले, लारेंस ओलिवर,रिचर्ड बर्टन केवल मंच के माध्यम से स्क्रीन पर नज़र आए थे।

इसके अलावा पारिश्रमिक से, जो मंच को आकर्षित करती है, निर्विवाद तथ्य है। थिएटर जो धीरे धीरे एक कला के रूप में मर रहा है उसे आप व्यापक दर्शकों तक पहुंचा सकते हैं। थिएटर जो धीरे-धीरे दुनिया भर में एक कला के रूप में मर रहा है उसे आप व्यापक दर्शकों तक पहुंच सकता है। पीटर ओतुले, लारेंस ओलिवर,रिचर्ड बर्टन जैसे कलाकार अगर बड़ी स्क्रीन पर ना आए होते तो आज लंदन के बाहर कोई भी उनकी प्रतिभा को नहीं जान पाता। मैं लंदन कई बार गया लेकिन क्यों मैं उनके नाटकों को नहीं देख पाया। मैं उन्हें केवल स्क्रीन पर सितारों के रूप में जानता हूं।‘

अमरीश विलन की भूमिका निभाना पसंद करते है

इस बारे में उन्होने स्पष्ट रूप से कहा कि ‘मैंने ‘मंथन’,‘भूमिका’,श्याम बेनेगल की फिल्म ‘निशांत’ में बिना किसी तनाव के काम किया था। अगर आप फिल्म के बाहर के लोकेशन्स पर रहेंगे जैसा कि श्याम बेनेगल रहते है, तो आप फिल्म के किरदार को निभाने के लिए छह से सात दिनों में तैयार हो जाएंगे। अगर शशि ने खुद को एक अच्छा अभिनेता साबित किया, तो इसका कारण नसीरुद्दीन शाह की बेहतरीन एक्टिंग का डर रहा होगा कि कही नसीरुद्दीन उनसे आगे ना निकल जाए।

अमरीश अपने अभिनेता के किरदार से खुश हैं

मुझे पता है कि मैं क्या करने में सक्षम हूं। मैं फिल्म इंडस्ट्री में स्टार बनने नहीं आया हूं, मैं अपने अंदर के कलाकार को सबके सामने पेश करना चाहता था। एक स्टार के रूप में आपको केवल सीमाओं का सामना करना पड़ता है, अमिताभ बच्चन को देख लिजिए वह इतने टेलेंटेड है कि अपने किरदार का चुनाव खुद करते है। दिलीप साहब ने अपने करियर में तैंतीस साल में 33 फिल्मों में काम नहीं किया है फिर भी अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में इतनी सारी फिल्मों में काम किया है जिसकी कोई गिनती भी नहीं है।

अमरीश पुरी का कहना है कि अभिनय कोई मजाक नहीं है।

यह एक उच्च तकनीकी काम है, रचनात्मकता एक गोदाम की तरह नहीं है कि जिसमें की एक रस्सी के माध्यम से अपनी प्रतिभा को दिखा सके। अगर मैं एक व्यावसायिक फिल्म में एक अच्छा दृश्य करता हूं तो, दुर्भाग्य से मैं एक या दो साल के बाद ही उसका परिणाम देख सकूंगा, इसलिए मेरा पहला प्यार हमेशा प्रयोगात्मक कला फिल्मों के लिए ही रहा है। जो मुझे लगता है कि व्यावसायिक फिल्मों का मूल कारण है।

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Mayapuri