ट्रेजडी ‘Z’ अक्षर की

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04dev03

मायापुरी अंक 12.1974

यह धारणा भी लोगों में पाई जाती है कि “Z” अक्षर से शुरू होने वाले नाम वाली हर अभिनेत्री देव आनन्द की तीरे नजर का निशाना अवश्य बनती है। जीनत अमान से पहले जाहिरा को यह सौभाग्य प्राप्त था और जीनत के साथ जरीना वहाव पर भी अब देव साहब को मेहरबानियां होने लगी है। लेकिन इसे जाहिरा की ट्रेजडी के अलावा और क्या कहा जा सकता है कि देव जैसे स्टार के साथ काम करके और “Z” अक्षर से शुरू होने वाले नाम के बावजूद जाहिरा वह स्थान प्राप्त नही कर पाई जिस पर जीनत और जरीना आज कब्जा जमाये हुए हैं। या कभी जाहिदा को यह गौरव प्राप्त था। शुरू शुरू में जब जाहिरा फिल्म “गैम्बलर” में आई थी तो लोग समझने लगे कि यह अभिनेत्री जरूर कोई न कोई कमाल कर दिखायेगी। “मैं जरूर कोई न कोई कमाल कर दिखाती जाहिरा ने बताया लेकिन मेरी भूमिका फिल्म में एकदम बदल दी गई। अमरजीत ने मुझे हीरोइन की भूमिका के लिये साइन किया था। लेकिन बाद में देव साहब के दबाव में आकर इसलिये कि जाहिदा उनकी साली है, उन्होनें जाहिदा को हीरोइन बना दिया। मेरा रोल इतना छोटा हो जायेगा यह मैं जानती भी नही थी। मुझे तो इस बात का उस वक्त पता चला जब मैंने फिल्म के रशिज देखे।
वैसे जीनत, जरीना और जाहिदा की तरह जाहिरा भी एकसामन अभिनेत्री है। उनको एक नजर देखने में आपको कोई खास बात नजर नही आयेगी। लेकिन उनके अन्दर छुपी अभिनय क्षमता का आप अनुमान नही लगा सकते। उस बेचारी की तो किस्मत ही खराब है। यही वजह है कि उसका फिल्म करियर तेजी के साथ शुरू नही हुआ वैसे मौके का फायदा उठाना शायद जाहिरा को नही आता। वरना जब “हरे राम, हरे कृष्णा” में जाहिदा ने काम करने से इंकार कर दिया था तो वह जीनत की जगह हासिल कर सकती थी। लेकिन उसे लन्दन भी उसी वक्त जाना था।
“दरअसल बात यह है कि हमारे फिल्म उद्योग में तब तक कोई व्यक्ति अपना स्थान नही बना सकता जब तक उसकी जुबान कैंची की तरह फर-फर न चलती हो। दिल की सफाई के बजाये यहां हाथ की सफाई पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, दो चार हाथ दिखाओ और बन जाओ एक्टर से स्टार। शुरू-शुरू में जब मैं फिल्म उद्योग में आई थी तो मुझे कोई नही पूछता था। हालांकि इस लाइन मे कोई नई नही थी, फिल्मों में आने से पहले मैं लक्स आदि की माडलिंग किया करती थी और कला से भलीभांति परिचित थी। लेकिन फिर भी लोग मुझे हीरोइन लेते कतराते थे। छोटी भूमिकाएं मैं इसलिए स्वीकार नही करती थी क्योंकि मैं जानती थी कि अगर एक बार छोटी भूमिकाओं की हुई तो फिर जिन्दगी भर हीरोइन बनने के चांस खत्म। मैं पहले एक कलाकार के तौर पर पांव जमाना चाहती थी और इसके पश्चात स्टार बनना चाहती थी लेकिन मेरे साथ जो कुछ हुआ वह आपके सामने है। जाहिरा ने एक भेंट के दौरान बताया।
“लेकिन “काल गर्ल” ने आपको एक नया ब्रेक दिया है। अब तो आपको खुशी होगी।
“हां, यह सही है कि “कालगर्ल” ने मुझे एक नया फिल्मी जीवन प्रदान किया है और आज मेरे पास दस बारह फिल्में है जिनमें कलात्मक भी है और व्यवसायिक भी। लेकिन “कालगर्ल” ने लोगों के दिलों में यह गलत फहमी उत्पन्न कर दी कि मैं वास्तव में कालगर्ल हूं “कालगर्ल” से पहले मेरे पास कोनार्ड रूक्स फिल्म “सिद्धार्थ” की करने के लिए नग्नता का सहारा लेती तो सिद्धार्थ द्वारा आज कही की कही होती। वैसे बचपन में मेरे पिता जी मुझे एक पाठ पढ़ाया करते थे कि पर्दा दिल में होना चाहिए
‘गैम्बलर के बाद जाहिरा गुमनामी के अन्धेरों में खो गई थी अब उस गुमनामी से निकल कर उन्हें रोशनी की दुनियां में आने के अवसर मिले है। आज उनके पास बड़ी-बड़ी फिल्में है और बड़े-बड़े बैनर है यदि वह अपनी अभिनय कला को थोड़ा बहुत भी ध्यान दे तो आज “ए” क्लास अभिनेत्री बन सकती है।


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Mayapuri

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