INTERVIEW: फैमिली कॉमेडी शो है ‘यारो का टशन’ – धीरज कुमार  

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1986 से 2016 ‘कहां गए वो लोग से ‘यारो का टशन तक। करीब तीस साल का सफर अभिनेता व निर्माता धीरज कुमार के लिए उत्साहजनक भी रहा और उतार-चढ़ाव से भरपूर भी। अब जीवन में स्थिरता है और कारोबार में गतिशीलता। कारोबार टीवी की दुनिया से जुड़ा है। वो दुनिया जो धीरज कुमार की प्रोडक्शन कंपनी क्रिएटिव आई द्वारा निर्मित माइथोलॉजिकल और फैमिली ड्रामा देखती आई है। करीब 9000 घंटों में से 4000 घंटे माइथोलॉजिकल को देना एक बड़ी उपलब्धि है और रिकार्ड भी जो धीरज कुमार के ही नाम है। इस बार धीरज कुमार दर्शकों के लिए कुछ डिफरेंट लेकर आए हैं। दर्शक धीरज कुमार से उम्मीद कर रहे थे कि वो फिर से माइथो लेकर आएंगे पर इस बार फैमिली कॉमेडी शो है जिसका नाम है ‘यारो का टशन जो सोनी सब टीवी पर टेलीकास्ट होने जा रहा है।

धीरज इसके लिए अनुज कपूर और को-प्रोड्यूसर सुनील गुप्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि उनकी मदद से ही हम शो को कपंलीट कर पाए। धीरज कहते हैं कि उनकी कंपनी अब तक हार्डकोर कॉमेडी सीरियल नहीं बना पाई थी लेकिन कुछ धारावाहिकों में हास्य का समावेश जरूर रहा है पर इस बार कॉमेडी को फ्रंट लाइन पर रखा है जो अभिनेता राकेश बेदी मालिनी कपूर अनिरूध दवे के इर्द-गिर्द घूमती है पर यहां सहयोगी कलाकारों ने भी शो में विभिन्न रंग भरे हैं जिनमें प्रमुख हैं माहिरा शर्मा ‘शिल्पी शिवम शर्मा ‘अमर धीरज गुंबर ‘प्रेम उमेश बाजपेयी ‘मिस्टर चतुर्वेदी अपूर्वा बिट ‘गोगी और जयश्री सोन ‘डोली। धीरज कुमार कहते हैं कि इस शो के जरिए हम यह दिखाना चाहते हैं कि हम नए ज़ोनर में भी बेस्ट दे सकते हैं। यह फैमिली एंटरटेनर शो हमारा खुद का आइडिया है जिसके राइटर अमित आर्यन हैं जिन्होंने अब तक नो साल में करीब दस धारावाहिक लिखे हैं। इसमें आपको हॉलीवुड के शो फ्रेंड्स की झलक नज़र आएगी। शो के लिए हमने मुंबई लखनऊ और चंडीगढ़ में ऑडीशन लिए थे जहां से हमें माहिरा धीरज और शिवम जैसे नए प्रतिभाशाली कलाकार मिले। शो के डायरेक्टर हीमैन चौहान और आर्ट डायरेक्टर रजत पोद्दार हैं।yaron-ka-tashan

‘यारो का टशन की स्टोरी शुरू होती है राकेश बेदी और मालिनी कपूर से जो शो में प्रोफेसर अग्रवाल और बीना अग्रवाल का कैरेक्टर प्ले कर रहे हैं। प्रोफेसर अग्रवाल रिटायर्ड रोबोट इंजीनियर है जिसका शौक एक्सपैरिमेंट करते रहना है। वे बेऔलद हैं। पत्नी बीना प्रोफेसर अग्रवाल से बच्चे की ख्वाहिश रखती हैं तो ऐसे में अग्रवाल एक एक्सपैरिमेंट करते हुए छह साल का रोबोट तैयार करते हैं जो ‘यारो के रूप में दर्शकों से रूबरू होगा। इस रोबोट में न तो जान है और न आत्मा। ऐसे में अग्रवाल उस रोबोट में एक दिल लगाने का फैसला करते हैं जिसमें न छल-कपट होगा और न ईर्ष्या। न ही उसके भीतर नेगेटिव फीलिंग्स होंगी। दिल लगाने के बाद ही शुरू होता है असली ड्रामा जिसमें फन टशन मस्ती और हंगामा सबकुछ है। हर एपिसोड में रोबोट क्या गुल खिलाएगा यह देखना दिलचस्प होगा। रोबोट अपने उम्र के तीन चरणों में सामने आएगा। 6 15 और 22 साल के ‘यारो का टशन लाजवाब होगा। शो में रोबोट का किरदार अनिरूध दवे निभा रहे हैं जो इससे पहले करीब दस-बारह धारावाहिकों में काम कर चुके हैं। धीरज कहते हैं कि उनकी टारगेट ऑडियंस फैमिली और चिल्ड्रन हैं। शो में हमने स्माल इन्सीडेंट दिखाए हैं जिनमें रोबोट फन क्रिएट करता है। तीस साल के अपने इस सफर में आपने कई बदलाव देखे। आज टीवी का रूप कितना बदल चुका है! इस सवाल पर धीरज कहते हैं कि बहुत कुछ बदल चुका है। अपने पहले धारावाहिक ‘कहां गए वो लोग की शूटिंग के दौरान तो कैमरा भी हमारे लिए बहुत कीमती और महंगा था जिसे सावधानी से लाया जाता था लेकिन आज तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि हम लोग वीएफएक्स तक आ पहुंचे हैं। हां कलाकार जरूर मशीनी हो गए हैं। अब जितनी क्रिएटिवी उनमें बची है उसी से काम चलाना पड़ रहा है। निश्चित रूप से कला प्रभावित हुई है लेकिन मशीन बनने के बावजूद हम बेस्ट देने की कोशिश कर रहे हैं।Dheeraj-kumar_Yaron-ka-tashan

धीरज कुमार को आखिरी बार बतौर अभिनेता धारावाहिक नियति में देखा गया था। इस धारावाहिक के जरिए उन्होंने टीवी पर 11 साल बाद वापसी की थी। इसमें धीरज कुमार ने ऐसा किरदार निभाया जो दूसरों से मिलने पर उनके जीवन में रंग भरता है। अब दोबारा उनका अभिनय किस धारावाहिक में देखा जाएगा! इस पर धीरज कहते हैं कि अभी कुछ तय नहीं है लेकिन अगर कोई अच्छा प्रोजेक्ट व कैरेक्टर होगा तो जरूर करूंगा। धीरज कुमार से उनके पांच फेवरिट सीरियल पूछने पर यही जवाब मिलता है कि ओम नमः शिवाय उनका सर्वाधिक पसंदीदा धारावाहिक रहा है। यह सीरियल मेरे लिए एक यज्ञ की तरह था जिसमें हर कलाकार ने अपनी कला की आहूतियां समर्पित कीं। आठ भाषाओं में बन चुका यह धारावाहिक आज भी विश्व के किसी न किसी कोने में दिखाया जा रहा है। इसके अलावा ‘कहां गए वो लोग ‘संसार ‘बेटियां और ‘प्रीतो को भी मैंने पसंद किया। इन दिनों धारावाहिकों पर काफी पैसा खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद कई महंगे धारावाहिक स्तरहीन हैं। ऐसा क्यों! इस सवाल पर धीरज कुमार कहते हैं कि आत्मा सोच और पैशन से सीरियल बनते हैं पैसे से नहीं।


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Mayapuri

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