टीवी एक्टर्स को इन अजीब शर्तों पर मिलता है मुंबई में किराए का घर

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बॉलीवुड के साथ साथ टीवी इंडस्ट्री भी तेज़ी से प्रोग्रेस कर रही है। जो की न जाने कितने एक्टर्स के लिए बॉलीवुड के दरवाजे खोल देती है। जहाँ किस्मत आज़माने के लिए दूर- दूर से लोग आते हैं। जिन्हे रात दिन की दौड़ भाग करने के बाद भी काम आसानी से नहीं मिलता जिसे लोग स्ट्रगल का नाम देते हैं। खैर ये तो हर एक्टर की कहानी है बिना स्ट्रगल उन्हें कामयाबी मिल जाए तो उस कामयाबी का मज़ा नहीं आता। उसके अलावा घर न मिलने की समस्या अलग, लेकिन क्या आप जानते हैं की मायानगरी मुंबई में इन लोगों को ही नहीं बल्कि जाने माने टीवी स्टार्स को भी रेंट पर घर मिलना बहुत मुश्किल होता है और अगर घर मिल भी जाए तो शर्ते इतनी अजीब होती हैं कि लोग परेशान हो जाए। ऐसी ही कुछ परेशानियों को झेलते टीवी एक्टर्स ने अपना दुःख इस तरह बताया।

‘जाट की जुगणी’ के जाट विशाल वशिष्ठ कहते हैं कि “इस शहर में घर पाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं। लैंडलॉर्ड्स और हाउसिंग सोसाइटीज को जो अच्छा लगता है, वो नियम बना देते हैं। एक बार मेरे एक दोस्त ने बात पक्की कर ली तो मैंने शूट के बाद शिफ्ट होने का तय किया। लेकिन जैसे ही रात को मैं अपने सामन के साथ पहुंचा तो उन्होंने कहा कि उनका मन बदल गया है। वे एक्टर को किराएदार नहीं रखना चाहते थे। उस रात मैं बेघर रहा।”

Vishal Vashishtha

‘बिन कुछ कहे’ सीरियल के समीर अरोड़ा ने बताया “पिछले 6 साल में मैं मुंबई की अलग-अलग जगहों में रह चुका हूं। मकान मालिकों का रवैया मेरे प्रति अच्छा नहीं रहा। एक बार जब मैं एक अपार्टमेंट के पांचवें फ्लोर पर रहता था तो लिफ्ट न होने के बावजूद भी मुझे रेगुलर रेट से ज्यादा किराया चुकाना पड़ता था। पार्टी न करने, लेट न आने, लड़कियों के आने पर रोक, जैसी शर्तें सभी की थीं। जब एक लैंडलॉर्ड फीमेल विजिटर्स के लिए मान गया तो उसका कहना था कि वे शॉर्ट ड्रेस पहनकर नहीं आएंगी।”

Sameer Arora

रोहन गंडोत्रा  ‘काला टीका’ सीरियल के युग का कहना है कि “बैचलर्स को फैमिली वालों से ज्यादा किराया देना पड़ता है। लेकिन अगर आप एक एक्टर हैं तो आपको नॉर्मल लोगों से और भी ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है। अगर मेरी फैमिली आती है तो मुझे लैंडलॉर्ड को पहले से नोटिस देना पड़ता है। फीमेल फ्रेंड्स को घर आने की इजाजत नहीं होती। एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होना और भी स्ट्रेसफुल होता है। इसके लिए दो बार सोचना पड़ता है।”

Rohan Gandotra

वहीँ सीरियल ‘पिया अलबेला’ के अक्षय मात्रे को भी ये सब का सामना करना पड़ा उन्होंने बताया “मैं नवी मुंबई से हूं, लेकिन काम के कारण मुझे गोरेगांव शिफ्ट होना पड़ा। मेरा लैंडलॉर्ड जानता है कि मुझे 12 से 18 घंटे रोज काम करना होता है। फिर भी उसने लौटने के लिए 11 PM की डेडलाइन दी हुई है। उसने यह नियम भी बनाया है कि घर में कोई गेस्ट नहीं आएगा। गोरेगांव शिफ्ट होने से पहले नवी मुंबई में रह रहे मेरे पेरेंट्स को इंटरव्यू देना पड़ा था। जब उन्होंने यह कहा कि वे रेगुलरली मेरे यहां विजिट करेंगे, तब कहीं जाकर लैंडलॉर्ड मुझे किराए पर रखने को तैयार हुआ था।

Akshay Mhatre

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